Matri Sadan Haridwar

35 नहीं गाँव वालो का कहना है कि लगभग 60 पोकलैंड मशीनों से गंगाजी का सीना छलनी करने की तैयारी , प्रशासन के तरफ से उपजिलाधिकारी पहुंचे पुलिस संग आश्रम पर गंगा रक्षा हेतु कोई निर्णय लेने में दिखाई अक्षमता
sdm 23 may jal tyag 2nd day 2015

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Indu

हो सकता है की खुद को  पेशे से अधिवक्ता घोषित करती  इंदु सिंह की खबर पक्की हो या बात सच्ची हो लेकिन सोशल मीडिया पर भी लोग कहने लगे हैं की इस तरह की झूठ औरअफवाहों के बाज़ार बना के इंदु सिंह कौन सा आन्दोलन चला रही हैं….? अब रही बात तेल मालिश करने या करवाने की तो ये दो लोगों का आपसी सरोकार है… और एक व्यापार भी| यदि वो इस उक्त महिला की मालिश करने की मजदूरी के लिए लेबर कोर्ट में मुकदमा करके मदद करती तो संभवतः मै भी यथासंभव सहयोग देता| आप इसका नैतिक मसाले में छौंक क्यों लगा रही हैं? जिसे आप सत्य के साथ आगे बढ़ने का नाम दे रही हैं वो सोशल मीडिया की लफ्फाजी से ज्यादा और कुछ भी नहीं|

इंदु सिंह एक क्रांतिकारी महिला हैं ये बात तो मुझे मंजू मोहन जी के यहाँ हुए पहले साक्षात्कार से ही समझ आ गयी थी| लेकिन उनका भाजपा या गोविन्दाचार्य से कोई परिचय है ये मुझे परसों पता चला| चौबीस की शाम को लगभग छः- सात बजे के बीच जब गोविन्द जी जंतर मंतर पर गौ रक्षा आन्दोलन के कार्यकर्ताओं के साथ मंत्रणा कर रहे थे तभी इंदु जी का आगमन हुआ| आने के दौरान गोविन्द जी भले ही कोई ध्यान न दिया हो लेकिन इंदु जी ने तुरंत उनके बगल वाले सहायक को हटा के कुर्सी कब्जाई| ऐसा लग रहा था की कुछ खास बात है| खैर जिस विदुषी महिला के सन्दर्भ में उनसे मुलाकात हुई उनके लिए मेरे मन में विशेष सम्मान है| इसलिए इंदु जी के ऊपर उस समय कोई संदेह करना उचित नहीं जान पड़ा| लेकिन देश के महापुरुष अन्ना हजारे के ऊपर की गयी इस बचकानी बयानबाजी से दुखी होकर मै कई तारों को जोड़ने का प्रयास कर रहा हूँ| इसके पीछे शायद मुझे इंदुजी की नासमझी या फिर किसी भगवा षड्तंत्र के तार मिल सकें|
इंदु जी खुद पेशे से वकील हैं और लोकतान्त्रिक व्यवस्था की शिखर संस्था के सम्मान में एक आन्दोलन चलाने का दावा भी करती हैं|
लेकिन उनके दावों में बचकानेपन को व्यवहारिक और सैद्धांतिक तौर पर न तो उचित माना जा सकता है न ही इस प्रकार गंभीरता से लिया जा सकता है|

खुद मंजू मोहन कहती हैं, “इस प्रकार की छीछल बातें हमारी सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ हैं| ऐसे लोगों के लिए तो एक रीड्रेसल सेल बना देना चाहिए| वहां पर इन लोगों की ऐसी शिकायतें सुननी चाहिए फिर मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों को इस गंभीर बीमारी पर विचार करना चाहिए| ताकि ऐसे लोगों का इलाज किया जा सके| सिर्फ सस्ता प्रचार पाने के लिए ऐसे बचकानी बयानबाजी का सिर्फ यही समाधान हो सकता है| उनसे पूछिए की अभी तीन दिन पहले अन्ना हजारे यहीं पर थे उस समय उन्होंने अन्ना से मिल के क्यों नहीं पूछा? अन्ना के पीछे इस तरह की बातें करना निहायत बेमानी है| मंजू जी इसमें आगे जोडती हैं की “अगर इंदु सिंह अपने भाजपाई होने का दायित्व निभा रही हैं तो उन्हें मोदीजी की पत्नी के साथ हुए अन्याय पर भी सवाल उठाना चाहिए”|

तेईस -चौबीस वाले आन्दोलन के लिए इसी प्रकार की छीछालेदर में बहुत से बयान वीर दावे करते रहे की अन्ना हजारे पचौरी के साथ जिंदल के जहाज में बैठ के आये थे| इसका पैसा जिंदल ने दिया आन्दोलन का खर्चा जिंदल उठा रहे हैं| लेकिन जब जनसत्ता के संपादक ओम  थानवीजी ने अन्ना की हवाई यात्रा का टिकट सामने लाकर रखा तो बयानवीरों ने बगलें झाँकनी शुरू कर दी|

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लोकसभा चुनावों के पूर्व अन्ना की जगह बहुत से लोगों ने मोदीजी के चरित्र हनन का प्रयास किया…. मोदीजी की गर्लफ्रेंड होने के भी दावे किये, उसकी चर्चा में लड़की की जासूसी करवाने के मामले को चटखारे लेकर सुनाया| इस सतही मसालेदार छीछालेदर पर देशवासियों ने भले ही कोई खास ध्यान न दिया हो लेकिन इससे प्रेरणा लेकर शायद इंदु सिंह भी शायद अपने स्तर पर वही सब कर रही हों.. लेकिन इसका मकसद क्या है जब तक स्पष्ट नहीं होता तब तक किसी को इंदु सिंह के आन्दोलन से कोई सहानुभूति कैसे हो सकती है?


राकेश मिश्र

भारत देश का शायद ही कोई बच्चा हो जिसने दूध के बिना दुनिया देखी हो| जब से होश संभाला है देखते ही देखते दूध के दाम पांच रुपये लीटर  से पैंतालिस रुपये लीटर हो गए| पिछले दशक में दूध के दाम जिस प्रकार बढे हैं उससे तो यही लगता है की दूध भी अब अमीरों की लक्जरी की वस्तु बनता जा रहा है|

इस मुद्दे पर जितने लोग इकट्ठे हुए हैं.. और जितने लोग गाँव की मिट्टी से जुड़े हैं उनमे से कौन इस बात से इनकार करेगा की गाँव और गाँव की जमीन का सबसे आसानी से भला हो सकता है तो गाय की परवरिश से| गाय से सीधे जुडी है गाँव की खेती और कुपोषण से|

जिसके आंकड़े कुछ इस तरह के हालात बयां करते हैं

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पिछले एक दशक में भारत की खेती योग्य 12.5 करोड़ हेक्टेयर जमीन में से 1  करोड़ 8० लाख जमीन खेती से बाहर  हो गयी|

आंकड़े बताते हैं की देश का हर चौथा आदमी भूखा है और हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है|

पिछले एक दशक में देश के किसान की माली हालत कुछ यूँ रही है की लगभग ढाई लाख किसानों ने आत्म हत्या की| काबिले गौर बात ये है की ज्यादातर किसान मदर इण्डिया वाले सुक्खी लालाओं के कर्ज और ब्याज से बुरी तरह प्रताड़ित थे |

Photo Courtesy : Reuters

गोबर की खाद से फसल और मिट्टी का स्वस्थ्य ठीक होता है | लेकिन हरित क्रांति में भारतीय सांस्कृतिक विरासत का ये तथ्य हमेशा के लिए उपेक्षित बना दिया गया| भारत  में हरित क्रांति, फोर्ड के ट्रेक्टर और भोपाल गैस वाले दाऊ केमिकल्स के कीटनाशकों से परवान चढ़ी |   किसान भले ही ज्यों के त्यों रहे हों यूरिया कंपनियों के लाभ दिन दूना रात चौगुना बढ़ते रहे| फोर्ड का ट्रेक्टर लेकर औसत दर्जे के किसानों को  कर्ज चुकाते हुए कई दशक गुजर गए |

गाय और पशुधन की बदहाली से हालत ये हुई की आज भी औसत जोत के किसानों की पैदावार खाने पीने भर को भी पूरी नहीं होती| उस पर महंगाई की मार से गाँव भी अछूते नहीं रहे| जाहिर है की उदारीकरण के बाद से  जमीन पर खेती करना सबसे चुनौती पूर्ण काम बन गया है|

एक नजर जंतर मंतर

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जंतर मंतर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का एक समूह भी था| उनका मुद्दा था गन्ने की फसल के भुगतान न हो पाने का| पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान के लिए मीलों  द्वारा तीन साल से गन्ने का  भुगतान न हो पाने की वजह से खाने तक को मोहताज हैं| उनके नेता हैं वी एन सिंह जिनके साथी हजारों किसान अन्ना के आन्दोलन में शामिल हुए| इस आशा के साथ की अन्ना हजारे और “एनजीओ ब्रिगेड” वाले इस मसले को उठाएंगे| मंच से हजारों बातें हुयीं दर्जनों भाषण और बयानबाजियां हवा में उछाली गईं| लेकिन किसानों से सीधा जुदा मसला भूमि अधिग्रहण आन्दोलन से अछूता ही रहा| इस मसाले पर प्रख्यात गाँधीवादी अन्ना हजारे, जलपुरुष राजेंद्र सिंह, जैसी नामचीन शख्सियतों के इस प्रकार से मुह फेर लेने से असली आन्दोलनकारी किसानों को गहरी निराशा हुई है|

गौरक्षा पर आन्दोलन में शामिल लोग मोदी सरकार के यू टर्न से पहले से ही निराश हैं|

कुछ इसी प्रकार की निराशा हुई है गौरक्षा के सवाल पर तीन महीने से जेल में बंद संत गोपाल दास समर्थकों को भी| संत गोपाल दास ने तिहाड़ जेल में  इक्कीस तारीख से निर्जल अनशन शुरू कर दिया है| फाफी अरसे पहले संत गोपाल दास और तमाम संतों के साथ हुए क्रूरतम सरकारी अत्याचार पर तमाम संगठनों ने आन्दोलन शुरू किया था| जन्तर मंतर पर आन्दोलन का सिलसिला फिलहाल जारी है| समर्थकों पिछले कई दिनों से  भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ आन्दोलन के लिए जुटने वालों से संत गोपाल दास की ससम्मान रिहाई और गौरक्षा मामले में समर्थन माँगा| गाय, गाँव और गंगा वाले भारत देश के इस मूलभूत मुद्दे पर एनजीओ ब्रिगेड के प्रदर्शनकारियों की अनिच्छा साबित करती है की जमीनों की सौदेबाजी और दलालों की कारस्तानी के बीच गाय और गाँव की हैसियत कुछ भी नहीं|

‘अन्ना जी की रैली में आए हैं। हमारे नेताजी लेकर आए हैं। हमें नहीं पता यह धरना-प्रदर्शन किस लिए हो रहा है।’

यह कहना है कटनी, मध्यप्रदेश से जंतर-मंतर पर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में अन्ना हजारे के दो दिवसीय धरने में शामिल होने आए किसान खदामी लाल का। उनके साथ 200 से अधिक लोग आए हैं। किसानों को जिस तरीके से बरगला के लाया गया वो इतने से ही साफ़ हो जाती है|

इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। लेकिन अधिकतर को नहीं पता कि अन्ना धरना क्यों दे रहे हैं। कई किसानों ने बात करने से साफ इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि नेताजी ने किसी भी बाहरी से बात करने से मना किया है। आपको जो पूछना है नेताजी से पूछें।

इनके नेता हैं प्रख्यात समाजवादी एक्टिविस्ट सुनीलम जिनके नाम नक्सली आन्दोलन में शामिल होने के कई मामले जुड़े हैं|

एकता परिषद के अध्यक्ष पी   वी राजगोपाल गाय और गाँव की बात न करके जल, जंगल और जमीन की बात करते हैं| विदेशी बीवी के साथ जय जगत का नारा लगाने वाले राजगोपाल के ट्रेवलर और आन्दोलन के खर्चे किस कंपनी के चंदे से चलते हैं इस बात का जिक्र करने से ही आप जन विरोधी हो जायेंगे| ठीक उसी तरह जैसे गाय गाँव और गंगा की समग्र बात करने वाले लोग विकास विरोधी ठहरा दिए जाते हैं|

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भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ एकजुट दिखने वाले इन सभी लोगों ने जंतर मंतर पर ही अलग अलग मंच बना लिए और आन्दोलन में शामिल जनता के लिए पूरे दिन ऊहापोह की स्थिति बनी रही| मंच भी बने  तीन जिसमे से अन्ना हजारे के मंच के सञ्चालन में लगे लोग दिन भर घोषणा   करते रहे की अन्ना अभी थोड़ी देर में आने वाले हैं| जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM ) की मेधा पाटेकर और राकेश रफीक अन्ना के साथ अलग मंच पर नज़र आये तो पी वी राजगोपाल और राजेंद्र सिंह अलग दिखाई दिए| पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का अलग धडा राष्ट्रीय अध्यक्ष वी एन सिंह के नेतृत्व में अलग थलग पड़ा रहा तो इस आन्दोलन में गाय के सवाल की भूमिका तलाश  रहे गोविन्दाचार्य मंच पर जगह नहीं पा सके| कुल मिला कर कुछ लोग मंच पर तो कुछ लोग मीडिया की नज़रों में जमीन तलाशते रहे|

अब बात करते हैं भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की तो भूमि अधिग्रहण के मसले पर जंतर मंतर पर जुटे लोगों ने इतने गंभीर मुद्दे पर अपरिपक्वता का

परिचय दिया है| इतनी नामचीन हस्तियों ने जिस प्रकार से एक जुट होने का प्रयत्न किया है वह निशिचित रूप से बनने से पहले ही बिखर चुकी है| जानकार लोग  इस मुद्दे की उच्छाल में  अरविन्द केजरीवाल का शामिल      आम आदमी पार्टी के राजनैतिक विस्तार के तौर पर देख रहे हैं| कहना वाजिब भी लगता है क्योंकि संसद के विधान सभा सत्र में संसद की चौखट पर हो रहे आन्दोलन से मोदी  सरकार के साथ सौदेबाजी के लिए माहौल तो बना ही दिया|

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There are few more questions on the after math.
The FIR was written in Urdu script and Persian language. One of the witness of Gandhi murder walked to the police station and gave a statement that Gandhi was killed by Revolver shots precisely 3 shots. Now immediately after death of Gandhiji there was lot of commotion. No doctors were there no postmartum done ? How can a civilian in the crowd not close to Gandhi gives testimony that 3 bullets fired ?
The police sent him back to Birla house and prepared the FIR in Persian and Urdu script and came to Birla house and rather than himself finding what happened spent next few hours finding the complainant and he read the statement to the complainant and asked him if it is true. The complainant said it was true and signed the document.

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Gandhijiwho dedicated himself for Social Justice, Gandhiji and Gandhiesm himself suffered injustice in real.

Jawaharlal Nehrusaid in Parliament: “And today the fact that this mighty person whom we honoured and loved beyond measure, had gone because we could not give adequate protection is a shame for all of us..”
This is what We discuss today. It is not less shame as then felt by Jawaharlal Nehru than today we should feel. With latest cutting edge technologies, forensic evidences, hundreds eyewitness accounts, years of police survivalance of radicals, accessibility to hundreds of police records still we cannot conclude who killed him correctly or why they killed him. For last 64 years we discussed many times on many death occasions how great he was hoe ideal he was. But today I want to talk killing Gandhiji twice. Once with bullets. Next all of us participating for last 64 years in…

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Health tips – 12 Indian Foods That Cut Fat

1. Garlic 

An effective fat-burning food, garlic contains the sulphur compound allicin, which has anti-bacterial effects and helps reduce cholesterol and unhenkghy fats.

2. Cardamom 

This is a thermogenic herb that increases metabolism and helps burn body fat. Cardamom is considered one of the best digestive aids.
3. Cabbage 

Raw or cooked cabbage inhibits the conversion of sugar and other carbohydrates into fat. Hence, it is of great value in weight reduction. 

4. Buttermilk 

The probiotic food contains just 2.2 grams of fat and about 99 calories. Regular intake provides the body with all essential nutrients and does not add fats and calories to the body. 

5. Chilies 

Chilies contain capsaicin that helps in increasing the metabolism. Capsaicin is a thermogenic food, so it causes the body to burn calories for 20 minutes after you eat the chillies. 

1. Cinnamon and cloves 

The spices have been found to improve the function of insulin and to lower glucose, total cholesterol, LDL and triglycerides in people with type 2 diabetes. 

2. curry leaves 

Incorporating curry leaves into your daily diet can help you lose weight. These leaves flush out fat and toxins, reducing fat deposits that are stored in the body, as well as reducing bad cholesterol levels. If you are overweight, incorporate eight to 10 curry leaves into your diet daily. Chop them finely and mix them into a drink, or sprinkle them over a meal.


3. Honey 

It is a home remedy for obesity. It mobilises the extra fat deposits in the body allowing it to be utilised as energy for normal functions. One should start with about 10 grams or a tablespoon, taken with hot water early in the morning. 

4. Millet 


Fibre rich foods such as millets – jowar, bajra, ragi, etc – absorb cholesterol and help increase the secretion of the bile that emulsifies fats. 

5. Moong dal 

The bean sprouts are rich in Vitamin A, B, C and E and many minerals, such as calcium, iron and potassium. It is a rich source of protein and fibre, which helps lower blood cholesterol level. The high fibre content yields complex carbohydrates, which aid digestion, are effective in stabilising blood sugar and prevent its rapid rise after meal consumption 

1. Mustard oil 

This has low saturated fat compared to other cooking oils. It has fatty acid, oleic acid, erucic acid and linoleic acid. It contains antioxidants, essential vitamins and reduces cholesterol, which is good for the heart. 

2.  Turmeric 

Its regular intake may help reduce low-density lipoprotein (LDL) and high BP, increase blood circulation and prevent blood clotting, helping to prevent heart attack. 


This is what looking down at your phone does to your spine 

For the sake of your spine, think about how you’re looking at your phone.

HOW long do you think you could last with an eight-year old sitting on your head?

According to a new study by spine surgeon Dr Kenneth Hansraj looking down at our phones is the equivalent of having around 27 kgs worth of weight on your neck.

On average, our heads weigh 4-5kgs, but when we are looking down scrolling through Facebook, the gravitational pull is massively increased.

“As the head tilts forward the forces seen by the neck surges to 27 pounds (12kg) at 15 degrees, 40 pounds (18kg) at 30 degrees, 49 pounds (22kg) at 45 degrees and 60 pounds (27kg) at 60 degrees,” Hansraj writes in the paper.

The further you look down, the more weight your neck feels. Source: Supplied

Having this sort of pressure on our necks, is of course not a good thing for our health, especially when the average person spends between two to four hours a day in this position.

In the paper, Dr Hansraj cited that good posture when looking at your phone is having your ears aligned with your shoulders and your shoulder blades back.

This will lower body stress, in comparison to poor posture which will stress the spine and possibly lead to early degradation.

It’s not just staring down at your phone that is bad for you.

Studies have suggested that radiation from your phone can even cook your eyes.

By cooking, we mean that if your eyes are exposed to the kind of heat and radiation given off by phones for long enough, tiny bubbles can start to form in your eyes. This is a precursor to cataracts.
This happens due to your eyes inability to dissipate the heat into the rest of your body, essentially because it’s mostly operating on its own up there.

Studies show that radiation from phones can damage a person’s eyes.

Let’s not forget how technology can ruin your sleep as well. This is mostly due to the type of ‘blue’ light that the screen on your phone, tablet or computer emits.

The light reduces the production of melatonin, our natural sleeping hormone which increases sleeping difficulties and causes more daytime sleepiness. To combate this, scientists recommend turning off all devices at least an hour before you go to sleep.

Insomnia? Blame your laptop.

Using your computer all day could also be a big contributer to why your hands and body are aching. Any repetitive movement can result in Repetive Strain Syndrome and it can affect any part of the body.
But with all that typing, tapping and clicking, it’s usually our hands and arms that suffer problems, with millions of people worldwide now developing RSI.

Symptoms include pain, muscle weakness, swelling, numbness and restricted mobility of the joint. It will typically increase after a long session of computer or device use, according to the health department.
The best cure is rest, continued use will make the problem worse.

Using a computer all day can cause Repetitive Strain Syndrome.

And finally, let’s not forget those who listen to their music too loud.
About 37 per cent of hearing loss in Australia is caused by preventable noise exposure, acocording to HearNet.

And one in five teenagers today has some form of hearing loss – around 30 per cent more than in the 1990s.

Our exposure to dangerous noise levels through our headphones is on the increase, with Australians losing their hearing much earlier than previous generations.

The maximum acceptable exposure to noise over a day is 85 decibels – the equivalent of listening to the sound of traffic on the street from the footpath.

Our devices can reach up to 120dB. Osteopaths say that as a rule of thumb, you should only use devices at levels up to 60 per cent of maximum volume for a total of 60 minutes a day. If you can’t hear what’s going on around you, it’s too loud.

Put down your phone!

iPhones, Androids and smartphones are everywhere but it’s the holiday season, a time to spend with family and friends and take a break from ever-present screens. Unless, of course, you’re one of the millions of phone addicts out there. In his latest song for the Guardian, Joe Stilgoe urges you to put down your phone and reconnect with the outside world.


1. When there is a CIA-organised false flag attack there is usually a drill going on at the same time.

In the attack on the Peshawar School:
One of the wounded students, Abdullah Jamal, said that he was with a group of teenagers who were getting first aid training with a team of Pakistani army medics when the violence began.

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Irfan Shah told how he was sitting in his class at 10:30 when he heard the sound of firing outside.

Shah told MailOnline: ‘It was our social studies period.

“Our teacher first told us that some kind of drill was going on and that we do not need to worry.”

Read more: http://www.dailymail.

A plainclothes security officer.

2. When there is a CIA-organised false flag attack, the security services are often late in responding.

“After half an hour of the attack, the army came and sealed the school,” a teacher who escaped told a private television channel.

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Blackwater.

3. In a CIA-organised false flag attack, there are the ‘patsies’ and there are ‘the real killers’.
In Peshawar, the ‘patsies’ had instructions not to kill children.
Our suicide bombers have entered the school, they have instructions not to harm the children, but to target the army personnel,” a spokesperson for the Pakistani Taliban told Reuters.
4. In a CIA-organised false flag attack, the CIA usually gets help from elements of the local police and military.
Eyewitnesses said the attackers were dressed in army uniforms.

In 2009, Israeli foreign minister Avigdor Lieberman said Pakistan was a greater threat to his country than Iran.

In Pakistan, there seems to be a Gladio-style operation which aims to promote the interests of certain gangsters.

On 16 December 2014, it was reported that mysterious gunmen had killed 132 children at a ‘heavily guarded’ military-run high school in Peshawar (above) in Pakistan.

Killing spree at Pakistan school, 132 students dead.

Attack on church in Peshawar, Pakistan, Sept. 22, 2013

This attack on the school looks like a false-flag inside job carried out by the security services.

Several children said that the gunmen communicated with each other in a foreign language.
Witnesses said that some of the gunmen were wearing Pakistani military uniforms.

Killing spree at Pakistan school, 132 students dead.


The 2004 attack on a school in Russia’s Beslan, which killed more than 330 people, was blamed on the CIA.

The Pakistani military is said to use Islamist militants to carry out attacks in places such as Kashmir and Afghanistan.

Killing spree at Pakistan school, 132 students dead.


David Headley, drug dealer and ‘CIA asset’.
Peshawar is an area where the drugs and weapons mafias are active, and it is an area known well by ‘CIA asset’ David Headley.
Reportedly, the so called Islamic terrorism is Pakistan is all about gang warfare.
According to Rakesh S. , at gather.com,
1. In the North West Frontier Province of Pakistan we find

(A) The ordinary people who often have no land, no jobs and little to eat. They are often treated like slaves.

(B) the rich elite who are made up of such people as army generals who run businesses, large landowners, warlords who sell drugs and guns, and certain mullahs with links to crime.

2. The ordinary people are often forced to work for the local warlords.

These ordinary people appear to be Islamic Terrorists but are, in fact, unwilling mercenaries for the warlords.

These unwilling mercenaries get slaughtered in the wars between the warlords and wars against the Pakistan government.

Bin laden worked for the Jewish Russian Mafia and the CIA, reportedly.
Rakesh.S writes that according to a Peshawar politician:

‘The Great Jihad of the 1980s was a myth…
‘People like Osama Bin Laden and Gulbuddin Hekmateyar were basically running mercenary operations and protection rackets with money from the Gulf and from Saudi Arabia, with arms provided by the CIA and MI6, and with the protection of Pakistan’s notorious Inter Service Intelligence (ISI) agency.’

Reagan’s friends.
The Taliban is being blamed for the attack on the Peshawar school.

Pakistan President Asif Ali Zardari has said that the CIA and Pakistan’s ISI together created the Taliban.

“The ISI and CIA created them together,” Zardari told the NBC news channel in an interview.

(informationliberation – CIA and ISI together created Taliban, says …)

Baitullah Mehsud

“For years the US mysteriously refused to kill former Pakistan Taliban chief Baitullah Mehsud via remote drone despite being offered his precise location by Pakistani intelligence authorities.”

It is believed that the Taliban is run by elements of the security services of the USA, UK, Israel, India and Pakistan.

Apparently the Pakistan Taliban are armed with US weapons.

(aangirfan: PAKISTAN TALIBAN ARMED WITH WEAPONS FROM USA, GERMANY …)

Dawood Ibrahim, Pakistani gangster and ‘CIA asset’.
Apparently the US owns a lot of top Pakistanis.

US Security Firm Bribes Pakistani Officials, Top Interior Ministry Officer Arrested

US officials have said that the CIA had routinely brought ISI operatives to a secret training facility in North Carolina.

(‘No smoking gun linking command to militants’ )

Some of the ‘bombers’ in Pakistan “have acknowledged that they have been trained by Israeli and Indian intelligences agencies in the camps located in Afghanistan.”

On 5 November 2009, The Nation (Pakistan) referred to Journalists as spies in FATA (part of Pakistan bordering Afghanistan)?.

Matthew Rosenberg, South Asian correspondent of the Wall Street Journal, has been spotted travelling frequently between Washington, Islamabad, Peshawar and New Delhi during the last couple of months….

According to an official of a law enforcement agency, who requested anonymity, Matthew was working as chief operative of the CIA and Blackwater in Peshawar. The law enforcement agencies, he said, had also traced Matthew’s links with Israel’s intelligence agency Mossad as well.

According to the BBC, “on Christmas Day 2007, the Afghan government said it was expelling two high level diplomats, one a British UN political affairs expert, the other, an Irishman and the acting head of the European Union mission.”

(BBC NEWS ‘Great Game’ or just misunderstanding?)

According to the Independent: “Britain planned to build a Taliban training camp for 2,000 fighters in southern Afghanistan.”

(Revealed: British plan to build training camp for Taliban fighters …)

A post at this site Cached tells us of the British government link to the terror in Pakistan.

In 2007 Pakistani Intelligence traced the source of much of terror in Pakistan to a ‘terrorist’ camp in Helmand province in Afghanistan.

The camp was run by Michael Semple and Mervyn Patterson.

Both of these British spooks were ostensibly working with humanitarian organizations.

Following extraordinary intelligence work by ISI, Karzai of Afghanistan and high officials in the Musharraf government exchanged visits which eventually resulted in the arrest and expulsion of Patterson and Semple from Afghanistan.

The real story was that these training camps were to create the Pakistan Taliban or Tehreek-e Taliban-e Pakistan (TMP); but why?

If the Taliban were to take over some areas in Pakistan and a part of the capital, then this would provide a sufficient basis for the US to bomb Pakistani nuclear installations and cease their nuclear weapons.

There were serious war plans and military exercises conducted by US forces for this scenario.

British India (www.zum.de/whkmla/histatlas)

On 19 October 2009, it was treported that the Pakistan Taliban (TTP) leaders were being evacuated by mysterious airlifts

“Mysterious airlifting of some Taliban elements from areas of the Pakistan-Afghanistan border linking Waziristan have been reported by several sources and fears are growing that anti-Pakistan TTP terrorists are also being rescued by their “foreign allies” from across the border.

“The unexplained movements of “un-marked” helicopters and aircraft have been reported since the last few days along the Pak-Afghan border and one source claimed that they were being transported to the Eastern Afghanistan.

“Some experts believe that secret allies of the friendly-Talibans took the action in order to secure the militants from an assault in South Waziristan by Pakistani Armed Forces while others believe the secret evacuation was part of a larger deal between some Western States and “good Taliban.”

“The airlifting and evacuation of TTP leaders from South Waziristan coincided with a report by foreign news media or a similar mysterious evacuation of “militants” from South Afghanistan to North Afghanistan.

“An Iranian news site on October 18 reported that the “British Army has been relocating Taliban insurgents from southern Afghanistan to the north by providing transportation means.”

“Quoting diplomats who spoke on condition of anonymity, the Iranian site claimed that insurgents are being airlifted from the southern province of Helmand to the north amid increasing violence in the northern parts of the country.

“The PressTV.com also claimed that “the aircraft used for the transfer have been identified as British Chinook helicopters.”

“The report suggested that the secret operation was being launched under the supervision of Afghan Interior Minister Mohammad Hanif Atmar, who “was still operating under the British guidance.”

“Afghanistan’s Pajhwok news agency reported that ‘US ambassador scotched speculation that his country was helping terrorists in the north, saying America had nothing to do with the air-dropping of armed men from helicopters in Samangan, Baghlan and Kunduz provinces.’

“At an October 11 news conference in Kabul, President Hamid Karzai had himself claimed that “some unidentified helicopters dropped armed men in the northern provinces at night.”

“According to a Pajhowk news report President Karzai revealed “the government had been receiving evidence of the air-dropping of gunmen from mysterious helicopters in the provinces over the last five months.”

“A comprehensive investigation is underway to determine which country the helicopters belong to; why armed men are being infiltrated into the region; and whether increasing insecurity in the north is linked to it.”

Mehsud, used by the CIA to get US troops into Pakistan?

Baithullah Mehsud, a ‘deceased’ tribal leader in Pakistan, may have links to the CIA.

Source: http://aanirfan.blogspot.in/

1799025_880071302033881_7986616807598658352_oदेश जागरुक नौजवानों में शायद ही कोई हो जो आज़ादी बचाओ आन्दोलन के प्रमुख रहे राजीव दीक्षित के नाम से वाकिफ़ न हो| नव उदारवादी व्यवस्था के विरोध में इलाहबाद में स्वर्गीय प्रोफ़ेसर बनवारी लाल शर्मा द्वारा भरी हुंकार के दौरान देश भर के हजारों युवा प्रोफ़ेसर साहब के साथ आज़ादी बचाने के लिए जुड़े| उनमे से प्रखरतम बौद्धिक चेतना और जनता की आवाज बनकर निकले राजीव दीक्षित| राजीव दीक्षित के सहयोगियों में प्रमुख रहे ध्रुव साहनी बताते हैं कि     2009 मे राजीव भाई बाबा रामदेव के संपर्क मे आए और बाबा रामदेव को देश की गंभीर समस्याओ और उनके समाधानो से परिचित करवाया और विदेशो मे जमा कालेधन आदि के विषय मे बताया और उनके साथ मिल कर आंदोलन को आगे बढाने का फैसला किया| आजादी बचाओ के कुछ कार्यकर्ता राजीव भाई के इस निर्णय से सहमत नहीं थे|

फिर भी राजीव भाई ने 5 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान आंदोलन की नीव रखी| आन्दोलन का मुख्य उदेश्य लोगो को अपनी विचार धारा से जोडना, उनको देश की मुख्य समस्याओ का कारण और समाधान बताना| योग और आयुर्वेद से लोगो को निरोगी बनाना और भारत स्वाभिमान आंदोलन के साथ जोड कर 2014 मे देश से अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नई पार्टी का निर्माण करना था जिसका उदेश्य भारत मे चल रही अँग्रेजी व्यवस्थाओ को पूर्ण रूप से खत्म करना, विदेशो मे जमा काला धन, वापिस लाना, गौ ह्त्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना, और एक वाक्य मे कहा जाए ये आंदोलन सम्पूर्ण आजादी को लाने के लिए व्यवस्था परिवर्तन के लिए शुरू किया गया था|
आन्दोलन की गरिमा और उसमे लोगों की भागीदारी के बारे में बताया जाता है कि राजीव भाई के व्याख्यान सुन कर मात्र ढाई महीने मे 6 लाख कार्यकर्ता पूरे देश मे प्रत्यक्ष रूप मे इस अंदोलन से जुड गए थे राजीव भाई पतंजलि मे भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ के बीच व्याख्यान दिया करते थे जो पतंजलि योगपीठ के आस्था चैनल पर के माध्यम से भारत के लोगो तक पहुंचा करते थे| समर्थकों का मानना है कि राजीव भाई राजनैतिक एकीकरण में विश्वास रखते थे उनका का कहना था भारत की सभी राजनीतिक पार्टियो के पास कुल सदस्यो की संख्या मात्र 5 करोड़ है यदि हम इससे ज्यादा लोगो को अपने साथ जोड़ लेते है और जरूरत पड़ी तो देश के 79 बड़े संतो से समर्थन मांगेगे जिनके साथ देश के 45 करोड़ लोग है ! तो हम एक नई पार्टी बनाकर उनको 2014 मे जीतकर पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन कर देंगे |
राजीव दीक्षित के कर्मयोगी होने की बात स्वीकार करते हुए ध्रुव सहनी मानते हैं कि इतना सब होने के बावजूद  राजीव भाई भारत स्वाभिमान आंदोलन के प्रतिनिधि बनकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले गाँव-गाँव शहर-शहर जाया करते थे पहले की तरह व्याख्यान देकर लोगो को भारत स्वाभिमान से जुडने के लिए प्रेरित करते थे|


क्या हुआ नवम्बर 2010 में

सोशल मीडिया पर लिखी गयी एक पोस्ट में ध्रुव साहनी ने खुलासा करते हुए लिखा है कि लगभग आधे भारत की यात्रा करने के बाद राजीव भाई 26 नवंबर 2010 को उडीसा से छतीसगढ राज्य के एक शहर रायगढ पहुंचे वहाँ उन्होने 2 जन सभाओ को आयोजित किया| इसके पश्चात अगले दिन 27 नवंबर 2010 को जंजगीर जिले मे दो विशाल जन सभाए की इसी प्रकार 28 नवंबर बिलासपुर जिले मे व्याख्यान देने से पश्चात 29 नवंबर 2010 को छतीसगढ के दुर्ग जिले मे पहुंचे|

उनके साथ छतीसगढ के राज्य प्रभारी दया सागर और कुछ अन्य लोग साथ थे | दुर्ग जिले मे उनकी दो विशाल जन सभाए आयोजित थी पहली जनसभा तहसील बेमतरा मे सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक थी |राजीव भाई ने विशाल जन सभा को आयोजित किया| इसके बाद का कार्यक्रम साय 4 बजे दुर्ग मे था, जिसके लिए वह दोपहर 2 बजे बेमेतरा तहसील से रवाना हुए |

साथ ही ध्रुव साहनी ने इशारा किया है कि  इस बात की घटना विश्वास योग्य नहीं है इसके बाद की सारी घटना उस समय उपस्थित छतीसगढ के प्रभारी दयासागर और कुछ अन्य साथियो द्वारा बताई गई है| उन लोगो का कहना है गाडी मे बैठने के बाद उनका शरीर पसीना पसीना हो गया ! दयासागर ने राजीव जी से पूछा तो जवाब मिला की मुझे थोडी गैस सीने मे चढ गई है शोचलाय जाऊँ तो ठीक हो जाऊंगा|

फिर दयासागर तुरंत उनको दुर्ग के अपने आश्रम मे ले गए वहाँ राजीव भाई शोचालय गए और जब कुछ देर बाद बाहर नहीं आए तो दयासागर ने उनको आवाज दी राजीव भाई ने दबी दबी आवाज मे कहा गाडी स्टार्ट करो मैं निकल रहा हूँ ! जब काफी देर बाद राजीव भाई बाहर नहीं आए तो दरवाजा खोला गया राजीव भाई पसीने से लथपत होकर नीचे गिरे हुए थे| उनको बिस्तर पर लिटाया गया और पानी छिडका गया दयासागर ने उनको अस्पताल चलने को कहा ! राजीव भाई ने मना कर दिया उन्होने कहा होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाएंगे |

थोडी देर बाद होमियोपैथी डॉक्टर आकर उनको दवाइयाँ दी | फिर भी आराम ना आने पर उनको भिलाई से सेक्टर 9 मे इस्पात स्वयं अस्पताल मे भर्ती किया गया| इस अस्पताल मे अच्छी सुविधाइए ना होने के कारण उनको दूसरी जगह  मे भर्ती करवाया गया| राजीव भाई एलोपेथी चिकित्सा लेने से मना करते रहे| उनका संकल्प इतना मजबूत था कि वो अस्पताल मे भर्ती नहीं होना चाहते थे ! उनका कहना था कि सारी जिंदगी एलोपेथी चिकित्सा नहीं ली तो अब कैसे ले लू ? ऐसा कहा जाता है कि इसी समय बाबा रामदेव ने उनसे फोन पर बात की और उनको आईसीयु मे भर्ती होने को कहा|

फिर राजीव भाई 5 डॉक्टरों की टीम के निरीक्षण मे आईसीयु भर्ती करवाएगे| उनकी अवस्था और भी गंभीर होती गई और रात्रि एक से दो के बीच डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित किया| सोशल मीडिया पर दिए गए  ध्रुव साहनी के वक्तव्य के मुताबिक   बेमेतरा तहसील से रवाना होने के बाद की ये सारी घटना राज्य प्रभारी दयासागर और अन्य अधिकारियों द्वारा बताई गई है अब ये कितनी सच है या झूठ ये तो उनके नार्को टेस्ट करने ही पता चलेगा |

राजीव जी की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बता कर सब तरफ प्रचारित किया गया| 30 नवंबर को उनके मृत शरीर को पतंजलि लाया गया जहां हजारो की संख्या मे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे| और 1 दिसंबर राजीव जी का दाह संस्कार कनखल हरिद्वार मे किया गया|

समर्थकों ने जताया हत्या का संदेह 

राजीव भाई के चाहने वालों का कहना है कि अंतिम समय मे राजीव जी का चेहरा पूरा हल्का नीला, काला पड गया था| उनके चाहने वालों ने बार-बार उनका पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया लेकिन पोस्टमार्ट्म नहीं करवाया गया| राजीव भाई की मौत लगभग भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत से मिलती जुलती है| ध्रुव साहनी की पोस्ट में ये भी कहा गया है कि ताशकंद से जब शास्त्री जी का मृत शरीर लाया गया था तो उनके भी चेहरे का रंग नीला, काला पड गया था| और अन्य लोगो की तरह राजीव भाई भी ये मानते थे कि शास्त्री जी को विष दिया गया था| राजीव भाई और शास्त्री जी की मृत्यु मे एक जो समानता है कि दोनों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था|
राजीव भाई दीक्षित की मृत्य  से जुडे कुछ सवाल सबके कान खड़े करने के लिए काफी हैं समर्थक चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो ताकि पता चल सके कि राजीव भाई की मृत्यु दिल का दौरा पडने से हुयी है ये किसके आदेश पर ये प्रचारित किया गया| 29 नवंबर दोपहर 2 बजे बेमेतरा से निकलने के पश्चात जब उनको गैस की समस्या हुए और रात 2 बजे जब उनको मृत घोषित किया गया इसके बीच मे पूरे 12 घंटे का समय था| जांच में इस बिंदु की भी तफ्तीश हो कि  घंटे मे मात्र एक गैस की समस्या का समाधान क्यों  नहीं हो पाया|अंत पोस्टमार्टम ना होने के कारण उनकी मृत्यु आजतक एक रहस्य ही बन कर रह गई असामयिक मृत्यु के पश्चात् आखिर पोस्ट मार्टम करवाने मे क्या तकलीफ थी| राजीव दीक्षित  का फोन जो हमेशा आन रहता था उस 2 बजे बाद बंद क्यों था| राजीव दीक्षित  के पास एक थैला रहता था जिसमे वो हमेशा आयुर्वेदिक, होमियोपैथी दवाएं रखते थे वो थैला खाली क्यों था |
संदेह खड़े करने के सबब और भी हैं मसलन 30 नवंबर को जब उनको पतंजलि योगपीठ मे अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था उनके मुंह और नाक से क्या टपक रहा था उनके सिर को माथे से लेकर पीछे तक काले रंग के पालिथीन से क्यूँ ढका था ?
राजीव भाई की अंतिम विडियो जो आस्था चैनल पर दिखाई गई तो उसको एडिट कर चेहरे का रंग सफेद कर क्यों दिखाया गया समर्थक कहते हैं कि  अगर किसी के मन को चोर नहीं था तो विडियो एडिट करने की क्या जरूरत थी ??
राजीव दीक्षित की मौत का सम्बन्ध विदेशी ताकतों से जुड़े होने का संदेह जाहिर करते हुए ध्रुव साहनी ने दावा किया कि   राजीव भाई की मृत्यु के बाद पतंजलि से जुड़े एक बहुत बड़े सदस्य को इंग्लैंड ने सम्मानित किया था, साथ ही इसको पुख्ता करते हुए विदेशी ताकतों के आर्थिक हित होने का भी हवाला दिया है उन्होंने स्पष्ट किया है कि ये बात  सब जानते है ये विदेशी लोग बिना अपने हित के किसी को आवर्ड नहीं देते|
राजीव भाई के कई समर्थक उनके जाने के बाद बाबा रामदेव से काफी खफा है क्योंकि बाबा रामदेव अपने एक व्याख्यान मे कहा कि राजीव भाई को हार्ट ब्लोकेज था, शुगर की समस्या थी, बी.पी. भी था राजीव भाई पतंजलि योगपीठ की बनी दवा मधुनाशनी खाते थे !

पूर्व में दिए एक व्याख्यान में राजीव दीक्षित ने खुद बताया  था कि  उनका शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल सब नार्मल है| साथ ही दावा किया था कि  वे पिछले 20 साल से डॉक्टर के पास नहीं गए और अगले 15 साल तक जाने की संभावना नहीं है|राजीव दीक्षित  के चाहने वालो का कहना है कि हम कुछ देर के लिए राजीव भाई की मृत्यु पर प्रश्न नहीं उठाते लेकिन हमको एक बात समझ नहीं आती कि पतंजलि योगपीठ वालों ने राजीव भाई की मृत्यु के बाद उनको तिरस्कृत करना क्यों शुरू कर दिया अब योगपीठ के कार्यक्रमों में मंचो के पीछे उनकी फोटो भी  नहीं लगाई जाती| साथ ही साथ आस्था चैनल पर उनके व्याख्यान भी दिखने बंद हो  गए ??
इसके अतिरिक्त उनके कुछ समर्थक कहते हैं कि भारत स्वाभिमान आंदोलन की स्थापना जिस उदेश्य के लिए हुए थी राजीव भाई की मृत्यु के बाबा रामदेव उस राह हट क्यों गए ? राजीव भाई और बाबा खुद कहते थे कि सब राजनीतिक पार्टियां एक जैसी है हम 2014 मे अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे !

बदले हालात तो हर शख्स ने मुंह फेर लिया 

राजीव दीक्षित के समर्थकों के संदेह को ख़ारिज भी कर दिया जाये तो भी बहुत से लोग रहे जिन्होंने बाबा रामदेव को अपनी उम्मीदों का साझीदार बनाया|   पिछले दशक में बाबा रामदेव के उदय और पतंजलि योगपीठ के संचालक बाबा रामदेव के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर साथ चलने का वादा करने वाले युवा भारत के लोग कहाँ हैं| युवा भारत से निकले राजीव दीक्षित ने   बाबा रामदेव और पतंजलि योगपीठ का जमीनी आधार बनाने में स्वदेशी और भारत स्वाभिमान आन्दोलन ने बड़ी भूमिका निभाई| 
फिलहाल बाबा रामदेव पर आर्थिक हित साधने का आरोप है| समर्थक कहते हैं कि स्वदेशी और स्वराज के प्रणेता  राजीव दीक्षित  की मृत्यु के बाद बाबा रामदेव ने भारत स्वाभिमान के आंदोलन की दिशा बदल दी और राजीव की सोच के विरुद्ध उन्हे भाजपा सरकार का समर्थन किया| परिणाम सामने है कि भाजपा के सबसे बड़े दावों में से एक  गौ ह्त्या अभी तक तक बंद नहीं हुई| इस पर तुर्रा यह भी है कि  3 हजार 527 करोड़ की सबसिडी दी कत्लखानो को दी है| मोदी सरकार मनमोहन सरकार से 10 कदम आगे जाकर विदेशी कंपनियो को भारत मे बुला रही है जिसके राजीव दीक्षित  कड़े विरोधी थे|

राजीव दीक्षित के विचारों से अभिभूत रहे श्रोताओं के मुताबिक, “राजीव भाई ने  ने अपने पूरे जीवन मे देश भर मे घूम घूम कर 5000 से ज्यादा व्याख्यान दिये| सन 2005 तक वह भारत के पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण चार बार भ्रमण कर चुके थे| उन्होने बहुराष्ट्रीय  कंपनियो की नाक मे दम कर रखा था| ये अलग बात है कि इतना विशाल व्यक्तित्व मुख्यधारा की मीडिया के लिए अछूत बना रहा|  क्योकि वह देश से जुडे ऐसे मुद्दो पर बात करते थे की एक बार लोग सुन ले तो देश मे 1857 से बडी क्रांति हो जाती ! वह ऐसे ओजस्वी वक्ता थे जिनकी वाणी पर साक्षात माँ सरस्वती  निवास करती थी। जब वे बोलते थे तो स्रोता घण्टों मन्त्र-मुग्ध होकर उनको सुना करते थे !”
राजीव दीक्षित  के समर्थको में प्रमुख ध्रुव साहनी का कहना है की काश बाबा रामदेव ने जितना प्रचार भाजपा-मोदी का किया उसका 20% भी राजीव भाई का किया होता आज उनके साथ 5 करोड़ लोगो की फोज होती जो ये पूरी व्यवस्था बदल डालती| लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो पाया और हमारे हाथ फिर से 5 साल के लिए बंध गए|
फिलहाल  राजीव भाई के  बहुत से चाहने वाले भारत स्वाभिमान से हट कर अपने अपने स्तर पर राजीव दीक्षित  का प्रचार करने मे लगे हैं| फिलहाल की मानें तो बाबा रामदेव को जेड प्लस सिक्योरिटी मिल चुकी है और राजसत्ता सत्ता की नजदीकियों से बहुत से बिगड़े काम भी बन पड़े हैं| सुना जा रहा है कि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बाबा रामदेव के प्रकल्पों में निवेश का भी करार किया है| राजीव दीक्षित के समर्थकों ने बाबा रामदेव से अलग होकर अलग राह पकड़ी है और फिलहाल उनके विरोधी तेवर जरुर बाबा रामदेव के लिए चिंता का सबब बने हैं|सवालों और संदेहों के घेरे में बाबा रामदेव  खड़े तो हैं लेकिन देखना होगा कि सरकारी प्रश्रय से संदेह का लाभ कितने दिन मिल पाता है| 


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