एक अन्तराष्ट्रीय साजिश: क्रिकेट और राष्ट्रवाद की काकटेल और भारत

Posted: April 6, 2011 in Uncategorized

भारतीयों    के क्रिकेट के दीवानेपन का आर्थिक और सामरिक दोनों तरह से प्रयोग किया जा रहा है.. किसी एक मैच में एक व्यक्ति की पूरे दिन की उत्पादकता मैच देखने में कुर्बान होती है. यदि मान लीजिये की देश के ५० करोड़ लोग क्रिकेट देखते हैं तो 500000000X8 = 4000000000 कार्यशील घंटे बरबाद हुए. अब यदि किसी व्यक्ति की प्रति घंटे की न्यूनतम उत्पादकता १० रुपये प्रति घंटे भी माने  तो पूरे मैच की देश के लिए कीमत 4000000000X10 = 40000000000 रुपये बैठती है. इसके अलावा मैच का अपना अर्थशास्त्र  अलग जो की एक दिन के लिए लगभग ५० करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश होता है. मेरा सवाल यह है कि यह कीमत कौन चुकाता है? और इसका फायदा किसको होता है? इस पर भी तुर्रा यह है की देश के हर हिस्से में क्रिकेट का बुखार सामान रूप से फैलता है चाहे वह सैन्य या अभिरक्षा कर्मचारी हों या समाजशास्त्री, विद्यालय हों या अस्पताल, सरकारी दफ्तर हों या प्राइवेट कार्यालय. यह बुखार  नहीं होता है तो शायद उस वर्ग को जो कि वंचित है या दिहाड़ी मजदूर जो कि शायद इतना साधन संपन्न नहीं है कि रोजी रोटी के इतर समय खर्च कर सके. इस प्रकार क्रिकेट कि दीवानगी देश वासियों  के लिए एक मीठी अफीम कि तरह है, इसके नशे में राष्ट्रवादिता का प्रभाव निहायत ही खतरनाक और राष्ट्र-विरोधी शक्तिशाली आर्थिक और सामरिक समूहों के लिए एक हथियार के रूप में काम आ रही है. इस विश्व कप में अनपढ़ और अल्पज्ञानी जनता के मनोभावों और उनके उत्प्रेरण के कारकों में क्रिकेट और राष्ट्रवाद कि काकटेल , मीडिया और उसका प्रभाव किसी समाजशास्त्री के लिए एक रुचिकर विषय होना चाहिए और जनता पर उनके प्रभावों का आर्थिक या सामरिक दोहन शक्तिशाली अन्तराष्ट्रीय समूहों का. यहाँ पर यह चिंतनीय हो जाता है कि देश के जनमानस की जीवनधारा के सामाजिक स्वरुप की प्राथमिकता में क्रिकेट तो है लेकिन राष्ट्र की समस्याएं क्यों नहीं? एक अन्तराष्ट्रीय साजिश के तहत क्रिकेट विश्व कप के माध्यम से यह जानने के लिए प्रयोग किया गया कि भारत में मिस्र जैसी तथाकथित क्रांति कैसे लायी जा सकती है. अब आप लोग ही बताएं कि प्रयोगकर्ता कितने सफल हुए? और इस प्रयोग के परिणाम क्या हो सकते हैं?

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s