सूचना का अधिकार : एक छलावा

Posted: April 6, 2011 in Uncategorized

जो लोग ये मानते हैं की सुचना का अधिकार कानून ने कोई बड़ा भूचाल ला दिया है, मै उनको लगभग निर्बुद्धि   मानता हूँ. सुचना के अधिकार को एकल खिड़की समाधान के तहत लागु करना चाहिए था. सूचनाएं इतनी बुरी तरह से विकेन्द्रित हैं की किसी एक शहर में यदि किसी व्यक्ति को सूचना चाहिए तो सबसे पहले उसे शहर के कम से कम १०० से ज्यादा सरकारी दफ्तरों को सूचीबद्ध करके अपने पास रखना पड़ेगा. यदि कोई व्यक्ति महीने में १० सूचनाएं एकत्रित करने की इच्छा रखता है तो उसे कम से कम १० दिनों के लिए अपने काम, व्यवसाय से छुट्टी  लेनी होगी. और सूचना कार्यालय में दरख्वास्त लगा देने के बाद कम से कम ४५ दिन तक सही या गलत जो भी सूचना मिलनी है उसका इन्तजार  करना होगा. इस पर भी तुर्रा यह है कि देश कि आधी आबादी निरक्षर है, वह न तो सूचनाओं का कोई मतलब जानते हैं और न ही इसका अपने जीवन में कोई सरोकार मानते हैं. और जो इनका मतलब जानते हैं या इसके उपयोग को हथियार बना के इस्तेमाल करना जानते हैं उन्हें ही इसके आर्थिक सामाजिक तौर पर प्रयोग करके इसका स्वरुप तय करना होता है (पिछले ६ सालों में ज्यादातर पत्रकार भाइयों ने ही इसका सही या गलत जैसा प्रयोग बन पड़ा किया है.) और उस पर भी  सुचना के अधिकार के कार्यकर्ताओं के लिए जान तक का खतरा कितना ज्वलंत है.. इस पुरे विधेयक के लिए प्रयुक्त संसाधन सफ़ेद हाथी (almost unproductive ) ही साबित हुए हैं. कहने का मतलब हर एक सरकारी कार्यालय में एक  अलग विभाग बना के सुचना अधिकारी और उसके अधीनस्थ कर्मचारियों और संसाधनों कि उपयोगिता लगभग शुन्यमान नहीं तो और क्या है? जनसेवकों का मान रखने के लिए सूचना का अधिकार भी मिल गया और इसके विकेंद्रीकरण कि वजह से आम आदमी कि पहुँच से यह इतना दूर रहा कि न ही यह जनोपयोगी साबित हुआ और न ही आखिरी आदमी इससे जुड़ पाया…. अब आप बताएं कि सरकारें इससे अपनी पीठ ठोंकी हैं तो यह कितना उचित है. एक कंप्यूटर पर पूरी दुनिया कि जानकारी आ सकती है तो भारत देश कि क्यों नहीं? और सुचना तकनीकी की क्रांति में सूचना के अधिकार को इससे अलग रखने में सुनियोजित साजिश नहीं तो और क्या माना जाये ?
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Comments
  1. HP SINGH Jadoun says:

    जब इस तरह के कानून बनाने मैं जनता की सीधी भागीदारी (समाज सेवकों की) नहीं होगी इस तरह के कानून मात्र छलावा ही रहेगे . अन्ना हजारे जी का जन लोक पाल भी यही कह रहा है की लोग पाल विधेयक का मसौदा जो सरकार ने बनाया है वो भ्रष्टाचार को मिटने के लिए उपयोगी नहीं है . आज तक वोटर को केवल वोट देने का ही अधिकार है उसके द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि अगर गलत कर रहे हैं तो जनता को कोई अधिकार नहीं उनसे जबाब मांगने का . अगले ५ साल जनता को इंतज़ार करना होता है क्या यह सरासर नेताओं की दादागिरी नहीं है .

  2. ankit says:

    up rajya soochna aayog ki websitr par jaye to dekhne ko milega kam se kam 15 din me 1000 matter aishe hi pade rahte hai mera bhi ek soochana mangi thi 4 mahine ho gayr hai jal sanshthan se but maine rajya soochana aayog tak apil kar daali ab tak koi soochana nahi prapt ho paYI HAI ha pura read kar liya sab nirthak hai soochana ka adhikaar kuch nahi hota ladai aur lo aur buraii bhi

  3. Bimal kumar surana says:

    ak dusre ki kam anai wali abadi jayada hai.kewal chetna,ni swarth bhawan ki jarurat hai.dusro par dos se adhik apna atam bal jain sadhuwo ki tarah badhaye

  4. jitujain says:

    ye such hai ki 50% janta rti ka malab bhi nahi janti agar janti bhi to kya karti itni tedhi khir hai ye 1 mahine tak tim se khana nahi khaye to 1 suchna mile vo bhi jhuthi..jay bharat ..

  5. KUSHWAHA says:

    UTTAR PRADESH SUCHNA AYOG, AK AISA AYOG HAI JO SAMAY PAR APPEAL KA NISTARAN NAHI KARATA, ALAM YEH HAI KI APPEAL KARANE KE BAD 6 MAHINE MEIN ME PAHALI SUNWAI AUR YADI PAHALI SUNWAI MEN SUCHANA NAHI MILI, TO PHIR 6 MAHINE, YANI EK SUCHANA KE LIYE KAM SE KAM 15 MAHINE.

  6. kumar gaurav says:

    rti me koi b suchna apko sahi milegi iski koi gurantee nhi.suchna ayog safed hathi hai.kisi vibhag pr jurmane se jyada kuch nhi ukadh sakte.

  7. virendra kumar sharma 33 c/1 new mandhi gaunshalla road muzaffar nagar u.p says:

    mane upadyaksh / jan suchna adhri muzaffar nagar vikash pradhikaran muzaffar nagar se registred letter dated 02-11-2011 dwara suchna magi thi. is vikash pradhikran ke virudh adhyaksh jansuchna ayog u.p se registred letter dated 03-04-2012 dwara apeal ki thi . aajtak gyat nahi hua ki mari apeal savikar ki gai athwa nai ?

  8. ekesh chandra mishra says:

    rajya suchana aayug u.p agar samaya ka paian khud nahi karegi torajya karamchariyu se kya omeed kiya jaye

  9. shahzad ali khan says:

    bakwas hy suchna ka adekaar 7 mah sy apny rashan card ke suchna ky ley koshesh kar raha hu aaj tak koe suchna nahe mile

  10. shahzad ali khan says:

    bykaar hy rajya suchna aayog up bhe janta ky mahnat ky payso ki haram ki rotya tood rahy hy

  11. puneet says:

    abhi tak koi sunvai nahi hui

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