क्या भ्रष्टाचार के लक्ष्यविहीन एकल मुद्दे पर देश को गुमराह किया जा रहा है?

Posted: May 1, 2011 in Children and Child Rights, Education, Geopolitics, Politics, Uncategorized, Youths and Nation

पुरे देश को सिर्फ एक मुद्दे पर गुमराह करना देश के लिए ज्यादा खतरनाक है..चाहे वह मुद्दा भ्रष्टाचार ही क्यों न हो. इससे देश की दलीय व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास उठेगा.. कांग्रेस बीजेपी या किसी भी दल को कोई फायदा नहीं होगा… यह एक पूर्वनियोजित प्रयास है देश पर एक क्रांति थोपने का. नेतृत्व विहीन क्रांति का सबसे ज्यादा फायदा किसको मिलेगा? भारतीय जनता चार  वर्गों में है.. अज्ञानी, अल्पज्ञानी, सर्वज्ञानी और विद्यार्थी  , इन चरों  को अगर आप विश्लेषण करिए तो पाएंगे की “अज्ञानी” का इस प्रकार के प्रयासों से कोई खास सरोकार नहीं है उनकी पहली लड़ाई रोटी की है..इसवर्ग से नेतृत्व की उम्मीद करना बेमानी है. “अल्पज्ञानी वर्ग” बहु दलीय व्यस्था में किसी न किसी दल के प्रति हिमायत रखता है. और “सर्वज्ञानी” तथाकथित उदारवादी है और अंग्रेजों की गुलामी के स्वतंत्रत्योतर प्रभाव की उपज है. उदारवादियों को सिर्फ एडम स्मिथ, डार्विन और ओपेरिन का दिया हुआ ज्ञान ज्यादा रास आता है.., इनको भारत की देश, काल और परिस्थितियों से कहीं ज्यादा ब्रिटेन के शाही घराने की शादी के बारे में लिखने बोलने और पढने में मजा आता है. यदि वह इस प्रकार की क्रांति का नेतृत्व करेंगे भी तो देश को कहाँ पहुंचाएंगे?  जहाँ तक दुसरे सर्वज्ञानी क्रांतिकारियों का सवाल है (जैसे बाबा रामदेव ) इन्होने कोई भी स्थायी  दृष्टिकोण नहीं दिया है..भ्रष्टाचार की लड़ाई करते हुए वे एक ऐसे मार्ग पर चले जा रहे हैं जो जिसमे  आगे सिर्फ  अँधेरा  है. देश के आर्थिक, राजनैतिक, सामरिक और सामाजिक स्वरुप को यथावत रखना चाहते हैं या कुछ और करना चाहते हैं यही स्पष्ट नहीं है.  वास्तव में शिक्षा गुणवत्ता सुधार ऐसी किसी भी क्रांति की पहली जरुरत है उसके लिए कौन आगे आया? स्थायी परिवर्तन शिक्षा से आता है उसके लिए किसने प्रयास किया? पिछले आधे दर्ज़न से ज्यादा देशों  की क्रांतियों का स्वतंत्र अध्ययन करके देख लीजिये वे या तो ईस्ट इण्डिया कंपनियों के मालिकों या फिर   अमेरिकी साम्राज्वाद की देन रही हैं.. फायदा उन देशों के प्राकृतिक  संसाधनों पर कब्जे के रूप में…साइबर युद्ध, नाभिकीय और जैव रासायनिक हथियारों के हमलों साथ वैश्वीकरण, विनिवेश और उदारवाद से करायी गयी तीसरी दुनिया के देशों की  क्रांतियों के सामरिक और आर्थिक लाभों को तथाकथित “विकसित विश्व समुदाय” ने ही साझा किया है.  भारत भी एक प्रचुर संसाधन सम्पन्न देश है. एक विशाल बाज़ार भी है.. जब कोई देश मानसिक तौर पर समर्पण करने के लिए तैयार हो रहा हो तो परंपरागत लड़ाइयों का क्या फायदा ?

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Comments
  1. AKHIL says:

    I do agree with the views expressed
    The whole movement utterly disregard the parliamentary democracy
    The MPs is Parliament r people’s representative n the Anna’s people shows
    that they r above all these MPs n MLAs .What a joke ? Who elected these people to proclaim themselves as citizen’s representative?
    Need of the hour to pledge ourselves for Honesty n behave like responsible citizens.
    Need to bring back VALUES n VIRTUES in our life
    Sorry I disagree with the ANNAs of the world

    • AKHIL says:

      I do agree with the views expressed
      The whole movement utterly disregard the parliamentary democracy
      The MPs is Parliament r people’s representative n the Anna’s people shows
      that they r above all these MPs n MLAs .What a joke ? Who elected these people to proclaim themselves as citizen’s representative?
      Need of the hour to pledge ourselves for Honesty n behave like responsible citizens.
      Need to bring back VALUES n VIRTUES in our life
      Sorry I disagree with the ANNAs of the world

  2. AKHIL says:

    Yr witness pl

  3. HP SINGH Jadoun says:

    जब तब लोकतंत्र में आम नागरिक एवं उनके नेतृत्व दोनों ही मिलकर यह नहीं चाहेंगे तब तक भ्रष्टाचार या किसी अन्य समस्यायों से बच पाना असंभव ही है

  4. ankit says:

    क्या किया जाये गुरु जी! आपरेशन ब्लैक बोर्ड, मिड दे मिल यह सब शिक्षा के लिए ही चलाया जा रहा है आपरेशन बलैक बोर्ड तो ख़तम हो गया और उशको चलने वाले लोग भी जहा तक ख़तम हो गए होंगे जब तक शिक्षा का व्यापक प्रचार एवं प्रसार नहीं होगा तब तक कुछ नहीं होगा आज आवश्यकता है की व्यक्ति कोई भी हो वो इतना शिक्षित तो हो की बुनियादी आवश्यकता और समश्याये जान सके और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो

  5. NAVEEN CHANDRA GUPTA says:

    हिन्दुस्तान को सुधारना है तो सबसे बड़ी जरूरत है मार्शल ला की ताकि लोगो मेँ अनुशासन आ सके द्वितीय चरण है शिक्षा का विकास इन सबके बाद आयेगी राजनीति तभी कल्याण सँभव है

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