शुक्रिया,धन्य वाद या क़तज्ञता

Posted: May 11, 2011 in Uncategorized

साभार: इन्द्र भूषण रस्तोगी…एक गुमनाम संपादक (पत्रकार)

हर बार जब हम धन्‍यवाद देते है तो प़थ्‍वी पर स्‍वर्ग का एहसास होता है । धन्‍यवाद वास्‍तव में एक ऐसी संवेदना है, जो न केवल बेहतर जीवन के रास्‍ते खोलती है, बल्कि हमें कमियों में भी सुकून देती है । शोधों में भी पाया गया है कि जो आभार व्‍यक्‍त करना जानते है उन्‍हें जिंदगी जीने की कला आती है । वे सिर्फ खुशियों में नही दुख में में भी यकीन करते है, लेकिन उन्‍हें भरोसा होता है कि वे अपनों की बदौलत उस मुश्किल समय को भी आसानी से पार कर लेगें ।

,एक साधारण सा धन्‍यवाद आपके जीवन को बदल सकता है।छोटे – छोटे धन्‍यवाद के शब्‍द बडे से बडे कार्य कर जाते है । यह तब, जबकि आपने उसे किसी शब्‍द को भी वस्‍तु की प्राप्ति के ऐवज में ही दिया होता है । गहराई से देखने पर क़तज्ञता दो प्रकार से नजर आती है । पहला वह, जब आप अपनी सम्‍पत्ति और अपनी तात्‍कालिक परिस्थितियों के लिये क़तज्ञता व्‍यक्‍त करते है । और दूसरा वह जब आप गैर भौतिक चीजों के लिलये क़तज्ञता प्रकट करते है । पहले स्‍तर में क़तज्ञता प्रकट करना हम बचपन से सीखते है । यथा उपहार के लिये,कैंडी के लिये या फिर पार्क में घूमने आदि के लिये क़तज्ञ होना । यही अभ्‍यास वयस्‍क होने तक सिर पर एक छत के लिये, सम्‍पत्ति,स्‍वास्‍थ्‍य, रिश्‍ते, परिवार, नौकरी, अपने कौशल और छुटिटयों आदि में बदल जाता है। यह क़तज्ञता अच्‍छी या बुरी नही होती, लेकिन यह काफी कमजोर होती है । इसके बावजूद ज्‍यादातर लोग इस क़तज्ञता का अभ्‍यास ज्‍यादा करते है और वह भी नकारात्‍मक परिस्थितियों में ताकि उन्‍हें सकारात्‍मक पक्ष नजर आये । ऐसी क़तज्ञता के वक्‍त आप अक्‍सर कम से कम का प्रयोग करते है । इस क़तज्ञता के मूल में यही होता है कि मेरे पास जो है वह ठीक है और मै उसके प्रति अस्‍थाई क़तज्ञता महसूस करता हूं । यह शब्‍द आपको अक्‍सर खालीपन के साथ अकेला छोड देता है और आप अपनी पुरानी स्थिति से जुडें रहते है । दूसरे स्‍तर की क़तज्ञता एक अलौलिक क़तज्ञता है । यह जीवन, अस्तित्‍व, आप जो भी और जैसा भी अनुभव करते है उसके प्रति आभार है । यह अस्‍थाई भावना की जगह एक अभित़ति है । इसके अभ्‍यास के साथ यह आपका जीवन बन जाता है । इसमें आप गैर भौतिक चीजों – अपने जीवन, ब्रहमाण्‍ड, समय और स्‍थान, अपनी समस्‍या, चुनौतियों और कठिनाइयों, गल्तियों, चेतना, अहंकार, भावनाओं, अपनी पसंद, स्‍वतंत्रता, विचारों व अवधारणाओं के लिये क़तज्ञता प्रकट करते है ।ऐसी क़तज्ञता के वक्‍त आप कहते है ‘होना ही कितना अदभुत है’ । यहॉ परिस्थितियों की बाध्‍यता नही होती । परिस्थितियों से प्रभावित न होने के कारण यह स्‍थाई होती है और इसलिये यह आपके लिये स्‍थाई हिस्‍सा बन जाती है । आप साहसिक परिस्थितियों के लिये आभारी होते है जिन्‍हें जीवन ने आपको सभी उतार-चढाव और घुमाव के साथ दिया है । इसमें हार या बदलाव का डर नही हो । आप इसकी तुलना ीवीडियों गेम से कर सकते है । आप उस खेल के ग्राफिक, म्‍युजिक गेमप्‍ले, कैरेक्‍टर आदि से आश्‍चर्यचकित होते । आपको इस बात से फर्क नही पड़ता कि आप हारेंगें या जीतेंगें, आपको मिला अनुभव अपने आप में पर्याप्‍त होता है ।ऐसी स्थिति में आप खेल में बेहतर प्रदर्शन करते है और अनुभव का आनन्‍द लेते है । कुल मिलाकर आप क़तज्ञता जाहिर करने की जगह क़तज्ञ होते हैं । इस स्‍तर पर आप आकर्षण के सिद्वान्‍त को सक्रिय कर लेते है, क्‍योंकि इसकी बदौलत आप क़तज्ञता के क्षेत्र का खुद ही विस्‍तार कर लेते है फिर यह कहने की जगह कि ‘मैं इसके लिये क़तज्ञ हूॅ’ आप कहते हैं ‘क़तज्ञ हूं’।

क़तज्ञता की शक्ति:

* अपने दिमाग को ठंढा रखें ।

* प्रक़ति और पूरी दुनिया के प्रति आभारपूर्ण रवैए को विकसित करें ।

* लोग क्‍या कर रहे है इसके प्रति सजग रहें ।

* हर छोटे काम को सम्‍मान और बराबर महत्‍व देना सीखें ।

* जहॉ आवश्‍यक हो अपनी सच्‍ची भावनाओं के साथ आभार प्रकटकरें।     दिखावे के मदद न करें ।

* ध्‍यान रहे आप जिनके प्रति क़तज्ञता व्‍यक्‍त कर रहे है वे किसी भी उम्र के हो सकते है यदि वे आपसे अम्र में काफी छोटे है तब भी संकोच न करें और खुले दिल से आभारी बनें ।

* अपनी जाति,धर्म और संस्‍क़ति से उुपर उठकर अपने आस-पास के लोगें को धन्‍यवाद कहें ।

* याद रखें, स्‍वतंत्र रुप से अपनी भावनाओं के साथ की गयी अभिव्‍यक्ति आपको दोगुनी खुशी देगी ।

* उग्र और वरिष्‍ठता का कोई बंधन इसमें नही है । चाहे वह आपके आफिस का एक छोटा सा कर्मचारी ही क्‍यों ना हो ।

* एक ग्रीटिंग्स कार्ड आपकी भावनाओं को व्‍यक्‍त करने के लिये बेहतरीन विकल्‍प साबित हो सकता है ।

* एक खास तरह का उपहार अपने बहुत से प्‍यार के साथ दें ।

* एक सरप्राइज पार्टी का आयोजन करके आप अपना आभार व्‍यक्‍त कर सकते है ।

* एफ एम रेडियों के द्वारा एक खास तरह का शुक्रिया संदेश भिजवा सकते हैं ।

* उपहार के रुप में उसे गिफट वाउचर भी दिया जा सकता है ।

* उस व्‍यक्ति के लिये रात्रि का भोजन या एक कप काफी पिलाकर भी उसका आभार व्‍यक्‍त किया जा सकता है ।

* शिष्‍टतापूर्वक शुक्रिया कहें उसमें चापलूसी का भाव न आने दें ।

* बुके या पसंदीदा फूल भी दिये जा सकते है‍ि ।

* बहुत प्‍यार के साथ एक परम्‍परागत पत्र लिखें सजिसमें खूबसूरत लेखन के साथ अपनी भावनाओं को उजागर करें ।

* यदि वह आपका करीबी दोस्‍त है तो उसे डिस्‍कोथेक भी ले जा सकते हैं ।

* फिल्‍मों के शौकीनों को आप एक फिल्‍म का टिकट भी दे सकते हैं ।

* आप चाहें तो किसी विश्‍शेष स्‍थान पर पिकनिक के लिये ले जा सकते है ।

* यदि उनकी दिचस्‍पी सांस्‍क़तिक कार्यक्रमों में है तो उन्‍हें ऐसे कार्यक्रमों में आमंत्रित कर सकते हैं ।

*चाकलेट या कुकीज भी उपहार में दे सकते है 1

* यदि वह आपकी कोई महिला मित्र है तो उसे साड़ी या वेस्‍टर्न ड़ेस भी उपहार में दे सकते है ।

* उन्‍हें पत्रिकाएं पढने का शौक है तो अच्‍छी मनोरंजक व ज्ञानवर्द्वक पत्रिकाओं का पैक बनाकर दें ।

*यदि वह बुजुर्ग हैं तो उन्‍हें किसी तीर्थस्‍थल की सैर करायें ।

* खुद की आवाज में रिकार्ड शुक्रिया संदेश युक्‍त कैसेट दे सकते है ।

* मित्रों को गाने या गजल की सी डी दी जा सकती है ।

* उनके पसंदीदा अभिनेता, अभिनेत्री, माडल या खिलाड़ी का पोस्‍टर फ्रेम कराकर दे सकते हैं ।

* प्रक़ति प्रेमियों और गार्डनिंग के शौकीनों को नर्सरी से पौधें लाकर दें ।

* और अन्‍त में एक वहुत आसान, लेकिन प्रभावी और जाना माना नुस्‍खा है एक अच्‍छी मुस्‍कान के साथ शुक्रिया कहें ।

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