मै अन्ना आन्दोलन (IAC) के खिलाफ क्यों?

Posted: August 18, 2011 in Children and Child Rights, Education, Geopolitics, Politics, Uncategorized, Youths and Nation

जुझारू और समर्पित गाँधीवादी अन्ना हजारे के नाम पर देश के जनमानस को भ्रष्टाचार के विरुद्ध जो सामान्य ज्ञान दिया गया या दिया जा रहा है,  मै उसके लिए धन्यवाद देना चाहूँगा. यद्यपि भ्रष्टाचार देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है है फिर भी  मै इंडिया अगेंस्ट करप्शन  के आन्दोलन के खिलाफ हूँ..चलिए मै आप लोगों को अपने कुछ क्लू देता हूँ आप अन्ना के आन्दोलन को मुझे समझाने का प्रयास कीजियेगा … शायद मेरी बुद्धि  सच में खुल जाये..

1. एक बहुत नामी गिरामी अंतर्राष्ट्रीय संस्था भ्रष्टाचार के तथाकथित ठोस सर्वेक्षण लेकर आती है.
२. लोकतान्त्रिक सरकार सभी सामाजिक संस्थाओं को एक अनिवार्य औडिट के लिए आशय  जारी  करती  है.. सरकार की मंशा सामाजिक संस्थाओं के अंतर्गत होने वाले भ्रष्टाचार का समाधान करने के लिए नियमितता सुनिश्चित करने की थी.(इस आन्दोलन में ज्यादातर  देशी-विदेशी  एनजीओ ही धमाचौकड़ी  काटे हैं..? )
३. बहुत से विदेशी एनजीओ या उनके प्रतिनिधि हमारे देश के कई विदेशी दृश्य श्रृव्य मीडिया में अंशधारिता रखते  हैं. क्या इसीलिए हमारे  मीडिया कि प्राथमिकतायें बदल गयीं? देश कि तमाम दूसरी समस्याओं कि तुलना में जादू की छड़ी ही सबसे बड़ा हथियार और उसको बनाने वाले भारत भाग्य विधाता नज़र आने लगे ?
4.बहुत सारे टॉप कार्पोरेट प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार के लिए अलग-अलग एक पत्र लिखते हैं.. जनवरी १७,२०११ (लेकिन पत्र किसी समाचार पत्र या चैनल में प्रकाशित नहीं होते हैं… प्रकाशित हुए आज से लगभग  एक सप्ताह  पूर्व …?)
5. सच तो यह है की जुझारू गाँधीवादी अन्ना ने स्वयम  प्रत्यक्षतः जन लोकपाल बिल को तैयार नहीं किया है. तथाकथित “सिविल सोसाइटी” ने इसे क्यों  बनाया और  किसके  कहने पर बनाया यह मुझे अन्वेषण का विषय नज़र आता है.
६. इतने दिनों से चल रहे इस आन्दोलन का आधार सिर्फ एक जादू की छड़ी लोकपाल ही है और मै दावा करता हूँ की इसके लिए कराये गए जनमत संग्रह में मत देने वाले से आप जा के पूछ लीजिये तो वह खुद ही इसकी कलाई खोल देगा की वह जादू की छड़ी के बारे में क्या जानता है…?
७. क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है कि इतने दिनों से चल रहे भ्रष्टाचार के अन्वेषण  और संस्थागत प्रयास या तो लगभग बंद हो गए हैं या मीडिया कि प्राथमिकता से नदारद…?
हम तो नौ नगद को तेरह उधर से ज्यादा बेहतर मानते हैं. जो हाथ में है उसको ही सही से निपटा लीजिये. जादू कि छड़ी जब मिलेगी तब मिलेगी.
८. क्या यह आश्चर्य नहीं है की जिन राजनैतिक दलों को IAC ने पहले आन्दोलन में दूर से ही भगा दिया था वे ही IAC के आंदोलनों में जगह-जगह प्रमुख भागीदार हैं.?
९. क्या यह आश्चर्य नहीं की आन्दोलन से पूर्व अमेरिका का बयान आया और वह IAC की छवि को ही महिमामंडित करता है. ?
इस आन्दोलन का आधार सिर्फ एक जादू की छड़ी लोकपाल न होकर अगर कैग (CAG) की रिपोर्ट, जनसूचना अधिकार के लिए जागरूकता, या जन-जनसेवक संवाद  जैसे  स्थापित स्तंभों पर होता तो एक बड़ा वर्ग देश में खड़ा हो सकता था जिसको एक लोकतंत्र  में अपनी हैसियत का अंदाज़ा होता. लेकिन अभी जो भी इस तथाकथित आन्दोलन में मीडिया जनित देशभक्ति से लगे हैं क्या वे व्यक्तिगत सन्दर्भ में भ्रष्टाचार या भ्रष्टाचार से सम्बंधित   कोई   अनुसन्धान   करना   चाहेंगे?
अन्ना तो बेचारे बहुत सज्जन और दिल के बहुत नेक व्यक्ति हैं. तन मन देश सेवा में समर्पित करके  दुनिया के लिए सच्चे गांधीवाद का आदर्श प्रस्तुत किया है. लेकिन तार्किक और गैर तार्किक चर्चाओं का नतीजा इस प्रकार के आन्दोलन ही क्यों? मुख्यधारा  की राजनीति भी इसके समाधान में सहयोग हो सकती थी. देश के जनादेश की मुख्यधारा पर भरोसा क्यों नहीं?
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Comments
  1. anil says:

    क्या सिविल सोसाइटी में पड़े लिखे और इम्न्दर लोग नही है जो आप आरोप लगा रहे है ???अब इस आन्दोलन क लिया अगर कल किसी दुसरे देश का सन्देश आज्ये तो क्या अन्ना उसके लिया दोसी है आप खुद अपनी बूढी का प्रयोग करे और बताये क्या कमी है इस लोकपाल में ???या फिर आप ये कहना चाहते है सरकारी लोकपाल सही है ??? क्या अन्ना और पार्टी इमानदार नही है ???क्या सवाल उठाने से पहले खुद इन प्रश्नों के हाल दुडने नही कोसिस की जो चिपका दिया यहाँ पर

  2. kmoksha says:

    अनिल जी,
    जनलोकपाल बिल में , `प्रजा अधीन-लोकपाल (राईट टू रिकाल-लोकपाल ) और पारदर्शी शिकायत प्रणाली के खंड जुड़ने चाहियें , जो वर्त्तमान लोकपाल में नहीं हैं |
    बिना इसके जनलोकपाल या सरकारी लोकपाल भी खतरनाक है , क्योंकि बिना इन खण्डों के , ईमानदार अफसर और छोटे-मध्यम व्यापारी तबाह हो जायेंगे और लोकपाल विदेशी कंपनियों का एजेंट बनकर देश को बेच देगा और हमारी खेती,हथियार बनाने की शक्ति और तकनिकी को पूरी तरह नष्ट करवा देगा |
    आशिक जानकारी के लिए देखें-

  3. गुलज़ार सिंह says:

    आप खिलाफ हो भी तो कोई खास फर्क पड़ता नहीं….

    आदमी लाख इमानदारी से अपना काम करे, लेकिन सभी लोगों को सहमत नहीं किया जा सकता…मेरा व्यक्तिगत मत है बातें मैं खुद भी बहुत कर लेता हूँ लेकिन मैदान में आ के कुछ काम करने वाले कर्मयोगियों की बहुत क़द्र करता हूँ….

    ये जो लोकतान्त्रिक तरीके से चुनाव लड़ने की बात है ना वो तर्क का एक झुनझुना भर है कि लो पकडो इसे और बजाओ…. आज चुनाव पैसे और गुंडागर्दी से जीता जाता है जिसमे अन्ना टीम हमारी राजनीतिक पार्टियों के मुकाबले कहीं नहीं टिकती… तो पहले माहौल तो बनाएँ न कि चुनाव ईमानदार लोग भी जीत सकें…. तो जनलोकपाल बिल से कम से कम कुछ मदद तो मिल ही जायेगी…

    सरकार को झुकाना लुंज पुंज लोगों का काम नहीं है, कुछ दम ख़म चाहिए होता है वरना रामदेव को भी अपने देखा ना…अब कानूनों की आड़ ले के पूरा मोर्चा खोल दिया उसके खिलाफ कि आगे कभी सर न उठाये….

  4. rajasthan says:

    अन्ना देश को बेवकूफ बना रहा है

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