मै अन्ना आन्दोलन (India Against Corruption) के खिलाफ क्यों-2 (गज़ब ईमानदारी का गज़ब खुलासा…!!!!)

Posted: August 19, 2011 in Children and Child Rights, Education, Geopolitics, Politics, Uncategorized, Youths and Nation

साभार   :सतीश चन्द्र मिश्र (वरिष्ठ पत्रकार ) फेसबुक   से

रामलीला मैदान में अभी-अभी खत्म हुई प्रेस कांफ्रेंस में अरविन्द केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने साफ़ और स्पष्ट जवाब देते हुए लोकपाल बिल के दायरे में NGO को भी शामिल किये जाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है. विशेषकर जो NGO सरकार से पैसा नहीं लेते हैं उनको किसी भी कीमत में शामिल नहीं करने का एलान भी किया. ग्राम प्रधान से लेकर देश के प्रधान तक सभी को लोकपाल बिल के दायरे में लाने की जबरदस्ती और जिद्द पर अड़ी अन्ना टीम ((India Against Corruption)) NGO को इस दायरे में लाने के खिलाफ शायद इसलिए है, क्योंकि अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया,किरण बेदी, संदीप पाण्डेय ,अखिल गोगोई और खुद अन्ना हजारे भी केवल NGO ही चलाते हैं. अग्निवेश भी 3-4 NGO चलाने का ही धंधा करता हैऔर इन सबके NGO को देश कि जनता की गरीबी के नाम पर करोड़ो रुपये का चंदा विदेशों से ही मिलता है.इन दिनों पूरे देश को ईमानदारी और पारदर्शिता का पाठ पढ़ा रही ये टीम अब लोकपाल बिल के दायरे में खुद आने से क्यों डर/भाग रही है.भाई वाह…!!! क्या गज़ब की ईमानदारी है…!!!

इन दिनों अन्ना टीम की भक्ति में डूबी भीड़ के पास इस सवाल का कोई जवाब है क्या…..?????

जहां तक सवाल है सरकार से सहायता प्राप्त और नहीं प्राप्त NGO का तो मई बताना चाहूंगा कि….

भारत सरकार के Ministry of Home Affairs के Foreigners Division की FCRA Wing के दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2008-09 तक देश में कार्यरत ऐसे NGO’s की संख्या 20088 थी, जिन्हें विदेशी सहायता प्राप्त करने की अनुमति भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा चुकी थी.इन्हीं दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2006-07, 2007-08, 2008-09 के दौरान इन NGO’s को विदेशी सहायता के रुप में 31473.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुये. इसके अतिरिक्त देश में लगभग 33 लाख NGO’s कार्यरत है.इनमें से अधिकांश NGO भ्रष्ट राजनेताओं, भ्रष्ट नौकरशाहों, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के परिजनों,परिचितों और उनके दलालों के है. केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त देश के सभी राज्यों की सरकारों द्वारा जन कल्याण हेतु इन NGO’s को आर्थिक मदद दी जाती है.एक अनुमान के अनुसार इन NGO’s को प्रतिवर्ष न्यूनतम लगभग 50,000.00 करोड़ रुपये  देशी विदेशी सहायता के रुप में प्राप्त होते हैं. इसका सीधा मतलब यह है की पिछले एक दशक में इन NGO’s को 5-6 लाख करोड़ की आर्थिक मदद मिली. ताज्जुब की बात यह है की इतनी बड़ी रकम कब.? कहा.? कैसे.? और किस पर.? खर्च कर दी गई.  इसकी कोई जानकारी उस जनता को नहीं दी जाती जिसके कल्याण के लिये, जिसके उत्थान के लिये विदेशी संस्थानों और देश की सरकारों द्वारा इन NGO’s को आर्थिक मदद दी जाती है. इसका विवरण केवल भ्रष्ट NGO संचालकों, भ्रष्ट नेताओ, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों, भ्रष्ट बाबुओं, की जेबों तक सिमट कर रह जाता है. भौतिक रूप से इस रकम का इस्तेमाल कहीं नज़र नहीं आता. NGO’s को मिलने वाली इतनी बड़ी सहायता राशि की प्राप्ति एवं उसके उपयोग की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नही है. देश के गरीबों, मजबूरों, मजदूरों, शोषितों, दलितों, अनाथ बच्चो के उत्थान के नाम पर विदेशी संस्थानों और  देश में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न सरकारी विभागों से जनता की गाढ़ी कमाई के  दसियों हज़ार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लूट लेने वाले NGO’s की कोई जवाबदेही तय नहीं है. उनके द्वारा जनता के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के भयंकर दुरुपयोग की चौकसी एवं जांच पड़ताल तथा उन्हें कठोर दंड दिए जाने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है. लोकपाल बिल कमेटी में शामिल सिविल सोसायटी के उन सदस्यों ने जो खुद को सबसे बड़ा ईमानदार कहते हैं और जो स्वयम तथा उनके साथ देशभर में (India Against Corruption) की मुहिम चलाने वाले उनके अधिकांश साथी सहयोगी NGO’s भी चलाते है लेकिन उन्होंने आजतक जनता के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के  दसियों हज़ार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लूट लेने वाले NGO’s के खिलाफ आश्चार्यजनक रूप से एक शब्द नहीं बोला है, NGO’s को लोकपाल बिल के दायरे में लाने की बात तक नहीं की है.

इसलिए यह आवश्यक है की NGO’s को विदेशी संस्थानों और देश में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न सरकारी विभागों से मिलने वाली आर्थिक सहायता को प्रस्तावित लोकपाल बिल  के दायरे में लाया जाए. (कृपया इस पोस्ट को जितने ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकते हों उतने ज्यादा लोगों तक पहुंचाइये.)

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Comments
  1. Gaurav versain says:

    This is well known that lokapal can put check on people but cannot change there intension, And give this message to team Anna that A SHEEP NEVER WALKS UNDER WOLFS SKIN.

  2. anonymous says:

    sirf itni si bat ke liye andolan ka virodh karna koi buddhimani nahi hai. apko ye bhi dekhna chahiye ki isse corruption pe kafi had tak ankush lagega.

  3. गुलज़ार सिंह says:

    अभी तो शुरुआत है….. अभी पूरा समर शेष है…. अगर आप में भी कुछ दम ख़म है तो बातें छोड़ के मैदान मैं आइये…देश को कर्मयोगियों की ज्यादा ज़रूरत है…. एक 74 वर्षीय बुजुर्ग 13 दिन भूख बर्दाश्त कर के अपना काम कर के चला गया..अब बुद्धिजीवी लोग ऑपरेशन करते रहेंगे, कई वर्षों तक जुगाली करने का मसाला मिल गया है… यकीनन एन जी ओज में बहुत भ्रष्टाचार व्याप्त है…लेकिन एक राजा, कलमाड़ी, येदुरप्पा वो लुहार हैं जो अकेले इन सौ सुनारों पे भारी हैं….
    ये बदलाव की शुरुआत भर है…. 64 साल से बिगड़ा है तो वक्त तो लगेगा न सुधरने में…. एन जी ओ वाले भी बच के कहाँ जायेंगे….
    और अभी तक मेरे पास अन्ना या केजरीवाल पर संदेह करने का कोई कारण भी नहीं.. लेकिन सरकार, संसद, लोकतंत्र, कानून जैसे झुनझुनों पे संदेह करने की ढेर सारी वजहें हैं…. कुछ बुद्धिमान ये सवाल भी उठा रहे हैं पैसा कहाँ से आया, तो ये जानने में भी मेरी कोई रूचि नहीं, और अधिकार भी नहीं,सही प्रयोजन के लिए वेश्याओं से भी लिया धन भी गंगाजल की तरह पवित्र है…..

  4. Yashwant singh says:

    ye bhi koi congresse h , jo ngo ki baat kar raha h ,sab ko pagal samagh rakha h kya ,tum jo soch kar likh rahe ho sab samazte h , ye kutte raja aur kalmadi jab date par aate h to haste h ki abhi tumko kya pata , abhi to kuch aur gotale bhi khulne wale h tab hum hum ko bhul jaoge aur uus par focus ho jayega .

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