चिन्मयानंद और भडासी कलमकारों का सामाजिक मनोविज्ञान

Posted: November 23, 2011 in Children and Child Rights, Education, Geopolitics, Politics, Uncategorized, Youths and Nation

शराब पीकर महिलाओं से तेल लगवाते हैं स्वामी चिन्मयानंद

यह है एक लेख का शीर्षक  जो की यशवंत जी के पोर्टल bhadas4media.com पर प्रकाशित हुआ. अति चर्चा परिचर्चा  किस हद तक जा सकती है शायद यह हमारे कलमकारों को पता नहीं है. और यदि पता है तो शायद उनका सामाजिक मनोविज्ञान का दृष्टिकोण स्व- यानि उनके व्यक्तिगत अहम् से ज्यादा मायने नहीं रखता.
उन सभी महानुभावों के वक्तव्यों को यथावत यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ ताकि हमारे सुधि पाठकजन अपने तर्क प्रस्तुत कर सकें.

कुमार सौवीर, लख्‍ानऊ said…

सहमत, केवल एक बात को छोड़कर। रावण कभी महिलाओं से तेल नहीं लगवाता था। चिदर्पिता जी को पहले ही सतर्क हो जाना चाहिए था। लेकिन वे लगातार स्‍वामी चिन्‍मयानन्‍द के बारे में फेसबुक पर सक्रिय थीं। खैर, अब जो कुछ भी हो रहा है, बेहतर ही है। देर आयद दुरूस्‍त आयद।

Machala said…

yeh baat ekdam satya prateet hoti hai. actually ham bharatwaasi apni aankh band kiye hue hain aur na to janna chahte aur agar koi kuchh bataye to sun na bhi achha nahi lagta. Mene to jab Chidarpita ji ka article padha tha vivah ka nirnay tabhi samajh gayi thi ki wo spast roop se nahi par kaafi kuchh kah gayi hain aur jo commonsense rakhta hai wo samjh jayega bina bole sab kuchh. B. P. Gautam ji, apne sab baat clear likhi hain aur jaroori bhi hai ye sab baat out karna bz Commonsense is not so common. Ye log bas insan ke roop mei janam le lete hain aur insaniyat ke rakhwale bante hain. bahut jaroori hai ye sab out karna.

Raj said…

Hamam me sare hi nange h Chahe BJP ho ya koi aur

पंकज झा. said…

स्वामी जी उनके गुरु हैं इसके लिए साध्वी उनकी छवि नहीं तोडना चाहती थी लेकिन पति ने काफी संकोच से कहे पत्नी की निजी बात को सार्वजनिक कर दिया? हद है. यहां हो सकता है कि अन्य तमाम स्वामियों की तरह चिन्मयानंद का के बारे में ऊपर लिखी बातें सच हो, लेकिन कल तक जिस साध्वी द्वारा अपने ऐसे गुरु को पुजते हुए ‘गर्व’ का अनुभव होता हो अनायास ही उसे अपने पति द्वारा खल्नायाक और राक्षस साबित कर दिया जाना समझ से पड़े है. अगर साध्वी ने अपने पति को भरोसे में लेकर ऐसा कहा हो तो गौतम भरोसा तोड़ने के दोषी हैं. और अगर साध्वी की अनुमति से इसे प्रकाशित किया गया हो तो चिदार्पिता को भी उचित नहीं कहा जा सकता है. फेसबुक पर काफी मुखर रहते हुए भी अपने साथ ही हुए किसी कथित ‘असत्य आचरण’ को कल तक बर्दाश्त करना और आज अलग जीवन अपनाते हुए ही अपने पालक गुरु के प्रति इस तरह का खुलासा करना अवसरवाद ही कहा जाएगा.

vibhu said…

sadhvi ne kya bagair oil lagaye hi asharam me itani najadiki swami ji se banayi…..

Acharya Santosh Santoshi said…

kya kaha jaay , sab ishwar ki kripa hai ,

amit sharma said…

गौतम जी आपने अपनी पत्नी का पक्ष लिख दिया, लग रहा है की उनसे ज्यादा सती सावित्री कोई नहीं है लेकिन साध्वी जी उर्फ़ कोमल गुप्ता के बारे में कौन नहीं जानता इसलिए अपने परिवार में मस्त रहो और स्वामी जी पर कीचड उछालना छोड़ो सबको ये भी पता है की साध्वी जी ने स्वामी जी के साथ क्या गुल खिलाये है strong text

chinmit said…

गौतम जी जिस तरह से लिखते हैं ,,,,,,वे धन्य हैं ,,,,,,अपनी लेखनी से एक पत्रकार कैसे वार करता है कोई उनसे बखूबी सीख सकता है ,,,,,विशुद्ध, स्पष्ट, निर्भीक व् प्रशंसनीय

shiv said…

Sadhwi ji duniya ko Gyan deti fir rahi thi, khud itni bholi bachchi thi ki unko kuch pata hi nahi chala, agar ye maan bhi liya jaye ki wo sankoch ke karan kuch kah nahi payi lekin fir facebook par apne guru ke charitra, gyan ke yogdan ke geet kyo gati rahti thi.

Gautam ji aapne apna level bahut hi neeche gira liya hai or bade dukh ki baat hai BJP ke ticket ke lalach me “Komal Gupta” bhi aapke level tak pahuch chuki hain.

Is lekh ka shirshak hona chahiye tha “Ek Sadhwi ka patan”

raghwendra said…

ये लेख लिखते समय लेखक ने निश्चित तौर पर यही सोचा होगा की सिर्फ़ और सिर्फ़ चूतिया भड़ास पर आते हैं और जो भी वो लिख देगा उसे परम सत्य मान लिया जाएगा. उस नन्हे नवजात स्वतंत्र पत्रकार को संभवतः इस बात का अहसास नहीं है की यहाँ ऐसे ऐसे लोग आते हैं जो उस नादान का चूसा हुआ चेहरा देख कर बता दें की उसके शौक क्या हैं, पसंद क्या है, फस्ट हॅंड सामान पसंद करता है या सेकेंड हॅंड. बहुत सारे बौद्धिक मित्रों की प्रतिक्रियायें पहले ही ये बताने को पर्याप्त हैं की लोग उसके बारे मे क्या सोचते हैं. आइए इसे पकड़ कर चलते हैं क्लास की ओर . . . .भईये आजा, भड़ासी क्लास में.
माना की स्वामी बालकभोगी है, मान लिया एक दम पर भई ये जो बालक भोगी है वो क्या चिकनी जवानियों को छोड़ देगा क्या. समरथ को नहीं दोष गुसाईं वाले तर्ज पर समझ ले की जो मारे वो सहो परजो मराए वो बही. “आज के लिए इतना ही, आगे कुछ ऐसा पढ़ा तो फिर लगेगी ऐसी क्लास, जा ऐश कर . . . . .

Dr. Deepak Acharya said…

s. p. semwal said…

patrkar je ne sahi likha hai..
yah sab bhadas hee chaap sakta tha. kuch bhi ho satya samne aana chahiye. jin logon ko mirch lag rahi ho us swami ke pas jakar apni marwa len..

raj oberoi said…

हो सकता हो कि गौतम के इस खुलासे में दम हो पर एक बात समझ नहीं आई कि आखिर चिदर्पिता जी इतने समय तक क्यों चुप्पी साधे रही |शिष्या होने का यह मतलब तो नहीं था कि गुरु के गलत कामो में उनका साथ देती ,अगर ऐसा है तो वो भी उतनी ही दोषी है जितना कि किसी अपराधिक मामले में सबूत मिटाने वाला व्यक्ति होता है ,क्योकि उन्होंने कभी अपने गुरु की सच्चाई को जनता के सामने लाने की कोशिश नहीं की वल्कि फैसबुक पर उन्हें भगवन का दर्जा देने की कोशिश की |यदि आज उनके पति बी.पी.गौतम स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के खिलाफ लिख रहे है तो कही न कही इसके पीछे चिदर्पिता जी की सहमति है| जो स्वामी जी महिलाओ से तेल लगवाने के शोकीन थे क्या उन्होंने कभी चिदर्पिता जी से तेल मालिश नहीं करवाई होगी ,यह बात गले से नहीं उतरती |अब तो दिल कहे बार बार कि सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली |

चौहान said…

@raghwendra अपनी बेटी कितने हाथों में कौन सा खेल खेल रही है तुम्हें नहीं पता होगा….फर्स्ट हैंड(शायद) पत्नी तुम्हारे ऑफिस जाने के बाद कितनों को कृतार्थ करती है और अब सेकेण्ड, थर्ड या कौन स हैंड हो चुकी है तुम्हें ये भी नहीं पता होगा…बाकी दुनिया की सब बात पता है….एक आदमी जो सच व्यवहार करते हुए सच उजागर कर रहा है उसके बारे में ये बकवास लिखते हुए तुम्हें शर्म तो नहीं ही आयी होगी तुम्हारी भाषा से ही लग रहा है….कृष्ण ने सोलह हज़ार राजकुमारियों को राक्षस कैद से आज़ाद करवाया था तो दुनिया आज भी उन्हें पूजती है…सिर्फ तुम जैसे राक्षस नहीं पूजते….

choon choon said…

swamy se bach ke rahna. kahin idhar udhar ghumte huye pakad lega to jam kar pelega . . . .jab tab mooh khol kar badboo mat failaya karo.

sanjay Awasthi said…

Komal Gupta alias Chidarpita Puri tarah se avasarwadi hai. Uske liye apne fayade ke alawa koi baat important nahi hai. Kisi ko Guru banane ke pahle uske character ko dekha jata hai aur agar komal gupta ko ye pahle se pata tha ki uske Guru Bhrasht hain to kahe unhe Guru mana. Nau so Chuhe Khaker Billi Haz ko Chali.

raghwendra said…

@ chauhan कोमल गुप्ता के बारे मे इतना दर्द हो रहा है, बात समझ मे आ गयी, तुम्हारी मा भी किसी आश्रम मे सेवा दे चुकी है, तुम्हारी बहन भी दे रही है और जिस तरीके का तुम्हारा खानदान है, तुम्हारी बेटी भी जम कर देगी. तुम खुद तो देते ही हो, तुम्हारा बाप भी ऐसा ही था. तुमको पैदा पता नही कैसे किया है तुम्हारी मा ने, पीछे से निकले लगते हो . . . . .

rahmat said…

@ CHAUHAN, lag raha hai ki ap apni apbiti suna rahe ho.

Girraj said…

ye.kya.ho..rha.he.aap.log..kyo.ese.beheve.kar.rhe.ho.ho.sakta.he.patrkar.ko.ek..nai.story.ke.liye.masala.mil.gya.he.yar..ese..kisi.news.paper.me.jagah.mili.ya.nahi.agar.mile.to.plese.iski.kating.jarur.prakashit.karna.ll

abs said…

Ka ho swami g ab yahi sab kuch karne ko bacha hai.

अज्ञानी said…

लेखक और इनकी पत्नी जी के फेसबुक गपशप से तो ये लगता है की दोनों ही परले दर्जे के स्वार्थी हैं और ये भी नहीं जानते की बिस्तर की बातें यूँ बाहर नहीं करनी चाहिए! अगर यूँ ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब दोनों एक दुसरे की टाँगे खींचते गली में नजर आयेंगे! Sadhvi Chidarpita Gautam ‎@Ajit Dwivedi // Dont mind and don expect..they are doing what they are expected to do. If they can not choose the right person to follow how can they choose right words to utter? बी.पी. गौतम मैं तो शुरू से ही कहता आ रहा हूँ कि यह दोनों धर्म के नाम पर पाखंड फैला कर जनता को लूटने के इरादे से ही काम कर रहे हैं, पर यहाँ तो हर आदमी को अपनी आखों पर ही विश्वास नहीं होता और दो सौ साल तक गुलाम रह लेता है, तभी देश की तरह ही धर्म के भी टुकड़े ही होते चले जा रहे हैं और जब तक जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक यह सब होता भी रहेगा!

इस २ टके के पत्रकार को ये भी नहीं पता की स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण किसी धर्म का प्रचार नहीं कर रहे बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं वो भी बिलकुल मुफ्त में!

धर्म गुरुओं की सेक्स गाथा और भारतीय मीडिया.

वित्तेष्णा (पैसा या पैसे से पाई जा सकने अली वस्तुओं को प्राप्त करने कि इच्छा ), पुत्रेष्णा (आज की विकृत कमेष्णा) और लोकेष्णा (सामाजिक प्रतिष्ठा यानि इज्जत पाने कि इच्छा  ) जो कि   मनुष्य की तीन मूलभूत तृष्णाएं (बसिक human desires) हैं उसमे  यदि किसी का भी दमन या अति की जाये तो मानवीय अध्यात्मिक प्रवृत्तियों यानि स्वभाव  और मनुष्य  की बनाई हुई व्यवस्था तक में विभ्रन्तियाँ होना तय है…यह सामान्य मानव मनोविज्ञान है.. मेरा यहाँ कोई सरोकार नहीं कि स्वामी चिन्मयानन्द की वासनाओं या उनसे जुड़े अपराधिक कृत्यों को कोई अध्यात्मिक जमा पहनाऊं. लेकिन जब उदारवादी विश्व  “काम वैश्यों” (pornstars) को इलेक्ट्रोनिक मीडिया लगातार महिमंडित कर रहा है. और लोग चटखारे ले-ले कर पढ़-सुन रहे हैं तो क्या यह विचारनीय नहीं है कि हमारे समाजशास्त्री मीडिया महानुभाव  इस प्रकार बिक रही कामुकता के व्यक्ति या सामाजिक  मनोवैज्ञानिक प्रभावों का अध्ययन करें और उससे भारतीय समाज पर पड़ रहे प्रभावों को भी प्रकाश में लायें. क्या हमारे मीडिया महानुभावों ने कोई पैमाना तय किया है कि दूरदर्शन या इन्टरनेट जब कामुकता परोसे तो वह बुरा नहीं लेकिन जब एक स्वामी ऐसा करता है तो वही सबसे जघन्य अपराध कैसे? अब यदि आपने अपने कोई पैमाने निर्धारित नहीं किये हैं तो फिर तो “खाता न बही जो कही वो सही” कि तर्ज़ पर विदेशी मीडिया जो भी कहे उसी को सर्वमान्य बना देना ही भारतीय मीडिया का काम रह जाता है. क्या स्वामी या धर्मगुरु एक मनुष्य नहीं है? ये तब जरुर मायने रख सकता है जब स्वामी ने किसी से जबरदस्ती कोई इस प्रकार कि सेवाएँ ली होती.
स्वामी चिन्मयानन्द से अनभिज्ञ सुधी पाठकजन पार्लियामेंट की वेबसाईट के निम्नलिखित लिंक से  जानकारी प्राप्त कर सकते हैं…


Advertisements
Comments
  1. praveen says:

    एक ओर किसी धर्मगुरु पर आरोप लगाना दूसरी ओर एक पोर्न स्टार को घर घर पहचाना ये कदापि उचित नहीं लगता ! ये तो मीडिया का दोमुहा रवैया है जिसके लिए उनको पुनः आत्मवलोकन की आवश्यकता है !

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s