Posted: May 24, 2012 in Uncategorized

punarnav bharat

कुछ  सूत्र कहते हैं कि अलकायदा का अस्तित्व कब का ख़त्म हो गया था. और यदि इसको जीवित रखा या रहने दिया तो उसके पीछे का उद्देश्य  तेल का खेल और विश्व व्यवस्था   में   रणनीतिक   सेंध   लगाना  ही  था. उपलब्ध आंकड़े कहते हैं कि इस अल कायदा नाम का मुखौटा लगा के अमेरिका ने प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों वाले राष्ट्रों पर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से कब्ज़ा किया और एशिया में 330 से अधिक सामरिक ठिकाने बनाये.  तेल के सबसे बड़े भंडारों के कब्जे का नतीजा पूरी विश्व कि अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है. यही वजह है 10 सेंट प्रति बैरेल उत्पादन  लागत वाला  कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में 110 डॉलर प्रति बैरेल बिकता है. अगर इतना बड़ा फायदा होता है और आप सामरिक रूप से सशक्त हैं तो युद्ध के लिए सिर्फ एक बहाने कि ही तलाश करनी होगी. इसी विश्व बाज़ार व्यवस्था का नतीजा भारतीय जनता को भी उठाना पड़ रहा…

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Comments
  1. kaushalk says:

    Reblogged this on kaushalk and commented:
    It can help you a little to understand the economics of petropolitics in India…

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