भागीरथ प्रयास से ही जिवंत होगी माँ गंगा :- डॉ करण सिंह

Posted: July 15, 2012 in Education, Politics, Uncategorized, Youths and Nation

आज यहाँ इंडिया इंटर नेशनल सेंटर, नई दिल्ली में ‘ गंगा की व्यथा कथा : नष्ट होती संस्कृति एवं प्राकृतिक  विरासत ‘ विषय पर दो दिवसीय विचार गोष्टी का उदघाटन करते हुए प्रख्यात विद्वान् , राजनयिक डॉ. करण सिंह ने कहा की हजारों साल से गंगा करोडो  व्यक्तियों की आस्था का प्रतीक, और जीवनदयानी रही है परन्तु गंगा की दुर्दशा हजारो हज़ार  करोड  रुपये खर्च करने पर नहीं सुधरी है | उन्होंने कहा की गंगा एक्शन प्लान एक और दो पर काफी संसाधन खर्च हो गए पर गंगा की स्थिति क्यों नहीं सुधरी यह समझाने की जरूरत है, मूल्याङ्कन  होना चाहिए की गंगा सवचछत्ता अभियान पर अभी  तक हुआ खर्च कहाँ गया और उसका गंगा की  सवचछत्ता में कितना योगदान रहा  |
आज हरिद्वार से कांशी  तक गंगा प्रदूषित है गंगा के तट पर बसे शहरो के नगर निकायों को सीवरेज नालों के निपटान की वेकल्पिक  व्यवस्था करनी होगी | सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट क्यों सफल नहीं हुए समीक्षा करना होगी. बांधो के सवाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा की जहाँ यह सही है कि  बांध बनाने से गंगा का प्रवाह प्रभावित होता है, वही दूसरी और जनता की मांग बिजली के लिए भी है. हम सब बांधो को न नहीं कह सकते. पर बड़े पैमाने पर बाँध बनाना भी उचित नहीं है कोई बीच का रास्ता तलाशना होगा. एक ऐसी समग्र योजना बने जिससे नदी और पर्यावरण कि रक्षा भी हो सके और लोगो कि समस्याओं का भी संधान हो .
डॉ कर्ण सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भारत सरकार  ने २०२० तक गंगा को प्रदुषण मुक्त करने का वायदा किया है. हम उम्मीद करते हैं कि यह वायदा पूरा होगा . हमारे पूर्वजों के अथक परयासों से गंगा धरा पर आई है. आज फिर गंगा को जिवंत  करने के लिए एक बड़े अभियान जिसमे मिडिया, नागरिक समाज ,धर्म गुरुओं और नगर निकायों को मिलकर भागीरथ प्रयास करने होंगे.
गोलमेज सम्मलेन में गंगा सेवा मिशन के अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरुप जी ने अपना आधार वक्तव्य रखते हुए कहा कि यह समेल्लन गंगा कि व्यथा कथा पर व्यापक समझ बनाने के लिए आहूत किया गया है .वह गंगा जिसके नाम लेने मात्र से पवित्रता का बोध होता है. वह आज विश्व कि सर्वाधिक प्रदूषित नदियों कि सूचि में पांचवे स्थान पर है. हम जब तक माँ गंगा को संसाधन मानते रहेंगे ,यह सिथितियाँ नहीं सुधेरेंगी. हमे समझाना होगा कि प्रकृति संसाधन नहीं है ,जिसका निर्बाध दोहन किया जाये. स्वामी आनंद स्वरुप ने कहा कि हमारे किसी से विरोध नहीं है ,न ही हम विकास विरोधी हैं. हम विकास के नाम पर हो रही अराजकता के जरूर खिलाफ हैं.हम मानते हैं कि गंगा कि वर्तमान स्थिति पर सभी जागरूक नागरिक चिंतित हैं ,और गंगा जी के नैसर्गिक ,अविरल और निर्मल प्रवाह के द्वारा गंगा जी को जिवंत बनाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं.एक राष्ट्रीय साझा समझ बनाने का हमारा प्रयास है ,आशा है कि इस विचार मंथन से नवनीत  निकलेगा,कोई रास्ता बनेगा .
पिचली डेड़ सदी में धर्म,संस्कृति और गंगा पर निर्मम हमले हुए है, अकल्पनिये नुकसान हुआ है .इस के लिए प्रायश्चित तो दूर ,हमे अपराध बोध भी नहीं है कि हमने गंगा को मरनासन्न स्थिति में पहुंचा दिया है. यह जरूरी है कि कम से कम अपराध बोध कि भावना उतपन्न हो जिससे हम सही दिशा में सोच सके|
प्रख्यात कानूनविद सोली सोराबजी ने कहा कि गंगा का हमारे लिए काफी अद्यात्मिक महत्व है और गंगा कि दुर्दशा देख कर हमारा मन उद्देलित होता है | उन्होंने कहा कि हमारे देश में प्रदूषण नियंत्रण कानूनों कि कोई कमी नहीं है मात्र अर्थ दंड  कानून तोड़ने वालो को हतोत्साहित करने में विफल रहा है भ्रष्टाचार  के चलते भी इन कानूनों कि धजिय्या  उड़ाई जाती है,श्री  सोली सोराबजी ने कहा कि पर्यावरण  को नुकसान पहुकाहने वालों के लिए जेल जेसी कड़ी सजा के प्रावधान हो .गुनाहगारो के पोस्टर प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जेसे एअरपोर्ट आदि पर उन्ही के खर्च से लगाये जाये उन्होंने कहा कि गंगा नदी कि दुर्दशा के लिए कोर्पोराते जगत का असीमित लालच और भ्रष्टाचार भी जिमेदार हैं.पर्यावरण से जुड़े केसों कि सुनवाई के लिए त्वरित अदालतों का गठन किया जाये ,जिनमे ऐसे न्यायधीशों कि नियुक्ति   हो  जिन्हें पर्यावरण कि गहरी समझ हो . हर राज्य में एक अधिकार संपन्न संसथान बने जो स्वायत  तौर पर पर्यावरण सम्बन्धी शिकायतों को सुने ,जाँच करे और श्वेत पत्र जारी करे. 
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जेनरल भुवन चन्द्र खंडूरी जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वे गंगा कि रक्षा के लिए प्राणोंत्सर्ग  करने के लिए तैयार हैं बर्शते कोई वाजिब कारण हो .उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखते हुए होना चाहिये. उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र से मुख्यमंत्री और लोकसभा में सांसद रहा हैं  इस नाते वे भी गंगा कि स्थिति के लिए गुनहगार हैं. उन्होंने कहा कि गंगा जल कि शुद्धता और गुणवता महतवपूर्ण मुद्दा है , सुरंग में जाने से पहले और पावर प्लांट  से बाहर आने के बाद जल के नमूने लेकर जाँच कि जनि चहिये. यदि पावर प्लांट से बाहर आने वाले जल कि गुणवता कम होती है तो परियोजनाओ पर पुनर्विचार करना चहिये. जल कि गुणवता खतम होती है तो नदी को सुरंग में नहीं डालना चहिये. लेकिन जल कि गुणवता और शुद्धता प्रभावित नहीं होती है तो परियोजनाओ का विरोध नही किया जाना चहिये . उन्होंने कहा कि देव भूमि में जनम लेने के कर्ण वे माँ गंगा से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं वन्ही २० साल से जन प्रतिनिधित्व   करने के कारण जनता को सडक बिजली पानी पहुचाने के लिए भी वे अपने को उत्तरदायी मानते हैं. श्री खंडूरी ने कहा कि गंगा एक्शन प्लान से कुछ हासिल नहीं होनेवाला उतरदायित्व और जिम्मेदारियां टी करना जरूरी है और साथ ही जन जाग्रति भी जरूरी है कि गंगा भक्त भी माँ गंगा को प्रदूषित न करे ,इसके लिए धर्माचार्य जिम्मेदारी निभाए.
पीरजादा रईस मियां चिस्ती सज्द्दा नशीं ,दरगाह हज़रात सलीम चिस्ती ने कहा कि गंगा हिंदुस्तान के इतिहास का,पवित्रता और आस्था का हिस्सा है. गंगा जल न केवल हिन्दुओं के लिए पवित्र है बल्कि मुसलमानों के लिए भी पाक हे जो इसमें वजू करते हैं.  हम गंगा -जमुनी तहजीब कि बात करते हैं ,जब गंगा जमुना ही नहीं रहेगी तो तहजीब केसे बचेगी. उन्होंने गंगा कि दुर्दशा पर अफ़सोस जाहिर करते हुए इसकी रक्षा और पवित्रता को बनाये रखने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारत सर्कार एक सशक्त हकुमत है और इसे इस और अविलम्ब ध्यान देना चहिये. 
इस समेलन का आयोजन इण्डिया इंटरनेशनल  सेंटर , गंगा सेवा मिशन और हज़रत सलीम चिस्ती फौन्ड़ेष्ण की और से संयुक्त रूप से किया गया है .
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