गंगा परियोजनाओं में में एफ़० डी० आई० से सावधान रहना होगा : उमा भारती

Posted: October 13, 2012 in Children and Child Rights, Education, Politics, Youths and Nation

राकेश मिश्र, कानपुर 

 

  • ·             केवट और मल्लाहो को दिए जाएँ  बालू खनन के अधिकार 
  • ·             दोषपूर्ण विकास की प्रक्रिया से गंगा को बड़ा नुक्सान हुआ 
  • ·             बांधो की निर्माण प्रक्रिया में सुधार की ज़रूरत

 

समग्र गंगा यात्रा के कानपुर  पड़ाव में गंगा किनारे जन सभा को संबोधित  करते हुए साध्वी उमा भारती ने कहा कि 

आज सारा देश गंगा कि दुर्दशा से चिंतित है गंगा कि अविरलता की चिंता भी उतनी ही  बड़ी है.  जितनी की प्रदुषण की चिंता

 हिन्दू तो गंगा को माँ मानते है खेती में सिचाई के लिए गंगा के योगदान के मद्देनज़र कई  मुस्लिम विचारको ने रोटी के नाते गंगा को माँ माना है

 गंगा की अविरलता को लेकर पंडित मदन मोहन मालवीय के आन्दोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने

 कहा की मालवीय जी ने साधू संतो और राजाओं को साथ लेकर अँगरेज़ सरकार को चुनौती दी थी जिसके 

 आगे अंग्रेज सरकार को झुकना पड़ा था उस समझौते में गंगा की अविरलता को चुनौती देने वाले विकास

 कार्यो की मनाही के दस्तावेज आज भी मौजूद है आज़ादी के बाद बने बांधो ने गंगा की दुर्दशा कर डाली है

 आज बांधो को विकास का सोपान माना जा रहा है विकास की ऐसी अवधारणाओ से गंगा नदी का सबसे 

ज्यादा नुक्सान हुआ है टिहरी बाँध के    निर्माण में एक धारा ऊपर से सीधे नीचे लाकर गंगा में मिलाने 

का प्रस्ताव रखा गया था जोकि पूरा नहीं किया गया. बांधो की तकनीकी खामिया गंगा की अविरलता के

 साथ साथ जनजीवन के लिए भी  समस्याए खड़ी कर रही है. उन्होंने आगे कहा की गंगा लोक की भी 

रक्षा करती है और परलोक की भी इसी विश्वास के साथ गंगा के किनारे रहने वाले लोग मेलो में शामिल होते है 

जनभावनाओं  का सरकारी नीतियों में सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए. गंगा जल के महत्व को

 उन्होंने बताते हुए कहा की गंगाजल एक ब्रह्म दव है वैज्ञानिक भी इसको स्वीकार करते है. भौतिक दृष्टि 

से गंगा  भले ही प्रदूषित हो गई हो लेकिन लोगो का विश्वास  और आध्यात्मिक लगाव कम नहीं हुआ है.

 कानपुर क्षेत्र गंगा प्रदूषण के लिहाज़  से सबसे ज्यादा चुनौती पूर्ण क्षेत्र है यहाँ के औद्योगिक  प्रदुषण की

 चुनौती सबसे बड़ी है. फूल पत्ती और मूर्तियों के विसर्जन से कही ज्यादा  बड़ा नुक्सान औद्योगिक कचरे 

और दोषपूर्ण व्यवस्था से है. उसका आकलन करने की बजाय फूल पत्ती शवदाह और मूर्तियों पर लोगो 

का ध्यान लगवाकर दोषपूर्ण व्यवस्था से होने वाली समस्यायों पर पर्दा डालना ठीक नहीं है. जनता और 

सरकारों  को उसके बारे में सोचना होगा. गंगा नदी पर होने वाले विदेशी निवेश से पचास करोड़ लोगो के 

हित प्रवाहित होंगे. इस पर हम सभी को सावधान रहना होगा गंगा की चुनौती के प्रमुख कारणों को गिनाते 

हुए उन्होंने कहा की गंगा के लिए तीन प्रमुख चुनौतिया है. 

अविरलता में बाधा खनन और प्रदूषण नियंत्रण ने जन सहभागिता के लिए केवट और मल्लाह समुदायों

 को बालू के खनन के अधिकार दिए जाए. इससे रोज़गार का सृजन भी होगा और अवैध खनन की समस्या

 से निजात मिल सकेगी. लाइसेंसों को निरस्त करके समुदायों के विकास को ध्यान में रखा जाए अपने इस

 अराजनैतिक आन्दोलन की प्रमुख मांगो में गंगा बेसिन अथौरिटी को गंगा केन्द्रित किया जाना, गंगा के 

बालू पर केवट और मल्लाहो को अधिकार दिए जाने और  बांधो के तकनीकी सुधार को प्रमुखता से लोगों के सामने रखा. 

उन्होंने इन सब मांगो के लिए वैज्ञानिको और गंगा सेवी संगठनों के साथ बीस नवम्बर को राउंड टेबल कांफेरेंस 

करके परिणाम मूलक समाधान लोगो के सामने रखने को समग्र गंगा का प्राथमिक उद्देश्य बताया.

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