गंगा दुर्दशा का अफसरशाही संस्करण : कानपुर नगर निगम जोन-4

Posted: December 3, 2012 in Education, Politics, Youths and Nation

ग्वालटोली,  चुन्नीगंज, मैकराबर्ट गंज, जवाहर नगर, खलासी लाइन, परमट, बेनाझाबर, सीसामऊ, अशोक नगर, स्वरुप नगर, गाँधी नगर, सूटरगंज, बेकनगंज, कर्नल गंज का यह क्षेत्र ब्रितानिया हुकूमत की अफसरशाही का गढ़ रहा है। ऐसा  गुलामी के समय के बने  अंग्रेजी बाबू लोगों के बंगले  और मुहल्लों के नाम देख कर नज़र आ जाता है। एल्गिन मिल और लाल इमली इसी क्षेत्र का हिस्सा हैं जिसके दम पर बहुत से लोग गुलामी के ख़त्म होने के बाद भी मैनचेस्टर ऑफ़ ईस्ट का लबादा इस ऐतिहासिक शहर को ओढ़ाये रहे।

इस क्षेत्र को कानपुर नगर का दिल कहा जा सकता है इसके दो कारण हैं पहला कि यह सबसे ज्यादा घनी आबादी वाला क्षेत्र है दूसरा शहर के सबसे ज्यादा व्यस्त बाज़ार इसी क्षेत्र में आते हैं। दो बड़े कब्रिस्तान और शहर की सबसे बड़ी ईदगाह  भी इसी क्षेत्र  का हिस्सा है। नगर संसद (कानपुर नगर निगम) और विकास प्राधिकरण  भी इसी क्षेत्र के मोतीझील में पड़ती है। पुराना कानपुर और कर्नलगंज जैसे सबसे पुराने क्षेत्रों के साथ साथ नयी कालोनियां और बहुमंजिला इमारतों के साथ.साथ नयी चुनौतियाँ खड़ी  हुई हैं।  वैसे तो पिछले कुछ वर्षों में नगरीय व्यवस्था में सुधार को पूरे शहर ने भुगता है लेकिन इस क्षेत्र के निवासियों के लिए अभी भी तकलीफों का दौर थमा सा नहीं लगता। उस पर से कहाँ परए कौन सा सरकारी विभागए  कब काम करवा रहा है यह आम नागरिकों को तो दूर कभी.कभी स्थानीय पार्षद तक को नहीं पता होता।

पेय जल व्यवस्था मानकों के अनुसार देखी जाए तो अपर्याप्त ही नज़र आती हैए गुणवत्ता मे भी  हालिया मीडिया रिपोर्टों को देखा जाए तो राज्य सरकार के दावों की पोल खुलती नज़र आती है। कहने को तो नगरीय जलापूर्ति के लिए बहुत सी पानी की टंकियां बन कर खड़ी  हो गयी हैं लेकिन उनमे से अधिकांश पार्कों के अतिक्रमण और अफसरशाही की सुविधाओं की देन कही जानी चाहिए। उस पर भी उनकी क्षमताओं और निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा की जाए तो निश्चित रूप से जल निगम की अफसरशाही का बेहतर अंदाज़ा लग जायेगा। उस पर भी ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर टंकियां अभी चालू हालत में नहीं हैं। टंकियों के निर्माण में जन विमर्श और स्थानीय पार्षदों की भूमिका सीमित है। इन टंकियों में पानी कहाँ से आएगा उस जलापूर्ति का गंगा नदी या भूजल स्तर पर क्या प्रभाव होगा ऐसी समीक्षा जन सामान्य के लिए उपलब्ध नहीं है। सीवेज और दूषित जल निस्तारण के लिहाज से  शहर का यह हिस्सा महत्वपूर्ण है जिसमे बहुधा आज़ादी के पूर्व के नगर नियोजन की मरम्मत नई लाइनें बिछा के की जा रही है। कई विशेषज्ञों का मानना यह भी है की पुरानी लाइनों की जानकारी न होने की दशा में किये जा रहे काम सिर्फ कागजों पर हुए विकास सरीखा साबित होंगे ।

कचरा प्रबंधन पर नज़र डालते ही ।A2Z कंपनी कार्य घनी आबादी के मुख्य मार्गों पर रखे कूड़ेदान सुगम यातायात या समुचित सफाई व्यवस्था में से एक चुनने के हालात बनाते नज़र आते हैं।  ।A2Z  कंपनी के  शहर के कूड़ाघरों से निजात के दावे बज़रियाए चुन्नीगंजए हीरागंजए अशोक नगरए चमनगंजए सूटरगंज में सडकों पर बिखरे नज़र आते हैं। जोन.4 के प्रमुख बाज़ारों में खास तौर पर दर्शनपुरवा सब्जीमंडीए सीसामऊ बाज़ारए खलासी लाइन की सीसामऊ नाले पर लगने वाली सब्जीमंडी भी ठेकेदार कंपनी के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं है।   

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