सहारा ने मॉरीशस के रास्‍ते भेजा लग्‍जरी होटल खरीदने का पैसा

Posted: January 7, 2013 in Geopolitics, Politics, Youths and Nation

ईडी कर रहा है जांच : सहारा ग्रुप को विदेशी डील के लिए कैसे फंड मिलते रहे हैं, इसका पता एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने लगा लिया है। दिसंबर 2010 में सहारा ने रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) से 47 करोड़ पाउंड लेकर लंदन में ग्रोसवेनर हाउस खरीदा था। उसकी यह विदेशी डील देशी-विदेशी मीडिया की सुर्खियों में रही थी, जिससे ईडी का ध्यान इसके फाइनेंसिंग सोर्स पर गया। ईडी आरबीआई की मंजूरी बगैर विदेशी डील करने के चलते पहले से ही इस ग्रुप के पीछे लगा था।

सहारा की एक कंपनी का पैसा कुछ इस तरह से दूसरी कंपनी में गया और अंतत: विदेश पहुंच गया। डील की जड़ में सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्प और सहारा इंडिया कमर्शल कॉरपोरेशन थे। सहारा इंडिया रियल एस्टेट सेबी की नजरों में चढ़ गया है और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को इनवेस्टर्स का पैसा फरवरी के पहले हफ्ते तक दो किस्तों में लौटाने का ऑर्डर दिया है। सहारा की इन दो कंपनियों ने लाखों इनवेस्टर्स से कनवर्टिबल डिबेंचर के जरिए लगभग 20,000 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें 3,620 करोड़ रुपए आईएनजी वैश्य की लखनऊ और एसबीआई की मुंबई खार ब्रांच में जमा किए गए। इसके बाद फंड पीएनबी की लखनऊ की एक ब्रांच में सहारा ग्रुप की कंपनी एम्बी वैली के खाते में डाले गए।

ईडी के अफसरों ने बताया कि पैसा एम्बे वैली को लोन के तौर पर दिया था। इसके बाद सहारा ने अहम फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन किया, जिससे बाकी पैसा विदेश चला गया। एम्बी वैली के अनसिक्योर्ड लोन को इक्विटी में बदला गया। इससे इसकी नेटवर्थ मार्च 2009 के 841.81 करोड़ से बढ़कर 31 मार्च 2010 को 6,058.91 करोड़ रुपए हो गई। नेटवर्थ बढ़ने से एम्बी वैली ‘ऑटोमैटिक रूट’ (आरबीआई परमिशन की जरूरत नहीं) के जरिए फंड विदेश भेजने में कामयाब रही। फॉरेक्स नियमों के मुताबिक, कंपनियां ऑटोमैटिक रूट के जरिए नेटवर्थ के चार गुना तक विदेश में इनवेस्टमेंट कर सकती हैं।

इस तरह, एम्बी वैली ने अपना फंड फुली ओन्ड सब्सिडियरी एम्बी वैली मॉरीशस को ट्रांसफर कर दिया। मॉरीशस वाली कंपनी ने फंड तुरंत लंदन के लग्जरी होटल की शॉपिंग के लिए भेज दिया। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि क्या ट्रांजैक्शन, खासतौर पर ऑटोमैटिक रूट से फंड रेमिटेंस से कोई फॉरेक्स नियम टूटा है। ईडी जिन ट्रांजैक्शन की जांच कर रहा है, उन सब पर सहारा के प्रवक्ता से ग्रुप के व्यू पता नहीं चल पाया है। ईडी के सूत्रों के मुताबिक, फंड ट्रांसफर के अंतिम दौर को एक्सिस बैंक ने मैनेज किया। ईडी इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या बैंक ने फंड ट्रांसफर से पहले ड्यू डिलिजेंस किया था। इस बारे में एक्सिस बैंक का कहना है कि ट्रांजैक्शन केवाईसी सहित सभी जरूरी प्रोसेस से गुजरा है। ईडी 2जी स्पेक्ट्रम पाने वाली टेलीकॉम कंपनी एसटेल के साथ सहारा ग्रुप की डीलिंग की भी जांच कर रहा है। (एनबीटी)

Source : http://bhadas4media.com/vividh/7754-2013-01-07-04-50-38.html

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