साम्राज्यवाद विरोधी समाजवाद के प्रतीक थे शावेज

Posted: March 15, 2013 in Uncategorized

साम्राज्यवाद विरोधी समाजवाद के प्रतीक थे शावेज

आलोक कुमार राव

21वीं शताब्दी में दुनिया के नक्शे पर लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला की अलग पहचान कायम करने वाले राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज का पांच मार्च को निधन हो गया। लंबे समय तक अमेरिकी नीतियों एवं पूंजीवाद के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले शावेज कैंसर से जंग हार गए। करिश्माई शख्सियत के मालिक एवं दुनिया के मंच पर निर्णायक असर रखने वाले शावेज वेनेजुएला को समाजवाद के जिस रास्ते पर आगे बढ़ाया, वह अन्य देशों के लिए अनुकरणीय हो सकता है। मुश्किलों एवं कठिनाइयों के समक्ष कभी न झुकने वाले शावेज अपनी उपलब्धियों के चलते लैटिन अमेरिकी देशों में प्रेरणा के स्रोत रहे। शावेज ने सामाजिक असमानता दूर करने के लिए नीतियां चलाईं और इसका सकारात्मक असर भी दिखा।

फरवरी 1999 में सत्ता मे आते ही शावेज ने सबसे पहले सैन्य प्रतिष्ठान पर अपनी पकड़ मजबूत की, सेना से उन लोगों को चलता किया जिनकी निष्ठा संदिग्ध थी। उन्होंने नौकरशाहों एवं सेना के अक्षम एवं भ्रष्ट लोगों के गठजोड़ से चलाए जा रहे सामाजिक कार्यक्रमों में व्यापक बदलाव किए। शावेज ने अपनी यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी आफ वेनजुएला का गठन किया और पारंपरिक राजनीतिक दलों को हाशिए पर किया।

शावेज जानते थे कि उन्होंने अपने समाजवाद का जो आदर्श गढ़ा है, उसे अमली जामा पहनाने के लिए उन्हें सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक, राजनीतिक सभी मोर्चों पर एक ऩई शुरुआत करनी है। इसी शुरुआत के तहत शावेज ने तमाम देशों की नुमाइंदगी वाले लोकतंत्र (रेप्रेजेंटरी डेमोक्रेसी) से हटकर भागीदारी वाले लोकतंत्र (पार्टीसिपेटरी डेमोक्रेसी) को चुना। यानी वह राजनीति जो सीधे जनता से जुड़ती हो, लोगों के दुख-दर्द और आकांक्षाओं से सीधा वास्ता रखती हो। शावेज को पता था कि नुमाइंदगी वाला लोकतंत्र मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच एक ऐसे उच्च तबके को पैदा करता है जो सत्तारूढ़ दल को मिले जनादेश के राह में बाधा उत्पन्न करता है।

पश्चिमी एवं अमेरिकी पूंजीवाद के धुर विरोधी शावेज ने नागरिकों को सामाजिक न्याय सुनिश्चित कराने के लिए कई सामाजिक कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। उन्होंने कॉरपोरेट के नेतृत्व वाले विकास के मॉडल को खारिज किया। गरीब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के हकदार बनें इसके लिए उन्होंने क्यूबा से तेल के बदले 44000 ड़ॉक्टरों का करार और शिक्षा एवं रियायती सेवाओं को सुनिश्चित कराने के लिए पहचान पत्र का प्रावधान किया। रियायती दर पर सुपर बाजार की व्यवस्था की। सहकारी संस्थाओं के जरिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए और बेघरों के लिए घर का इंतजाम किया।

शावेज ने इन सारे सामाजिक कार्यक्रमों में तेल के निर्यात से देश को प्राप्त अरबों डॉलर निवेश किए। कल्याणकारी योजनाएं एवं सामाजिक कार्यक्रम हमेशा ही शावेज की प्राथमिकताओं में रहे। सामाजिक कार्यक्रमों को निर्बाध चलाने के लिए शावेज ने देश के उच्च कुलीन वर्ग जिसे भ्रष्ट के रूप में देखा जाता था, उन पर लगाम कसी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से अपना संबंध धीरे-धीरे खत्म करने के अपने वादे पर खरे उतरते हुए उन्होंने अमेरिकी कंपनियों एक्सॉन एवं कोनोको फिलिप्स को वेनेजुएला से बाहर का रास्ता दिखाया। साथ ही अमेरिका एवं यूरोपीय देशों की हिस्सेदारी वाली पेट्रोकेमिकल्स, टेलिकम्यूनिकेशंस, खनन, बैंकिंग, इस्पात, सीमेंट, खाद्य प्रसंस्करण एवं रिटेल सुपरमार्केट से जुड़ी परिसंपत्तियों को राष्ट्रीयकृत किया।

शावेज ने लैटिन अमेरिकी देशों की मदद करने एवं अपने नागरिकों का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया। प्राकृतिक संसाधनों और निर्यात से एकत्र होने वाले राजस्व का इस्तेमाल उन्होंने गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य देखभाल और पेंशन जैसी कल्याणकारी सेवाओं के लिए किया। इन सब सामाजिक कार्यक्रमों का परिणाम यह हुआ कि वेनेजुएला में गरीबी एक दशक में 67 प्रतिशत से घटकर 1997 में 33 प्रतिशत पर आ गई। समाज में आर्थिक असमानता की खाई काफी हद तक दूर हुई।

शावेज ने शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव किए। उन्होंने निचले स्तर से विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा मुफ्त की। आज हर तीन में से एक नागरिक उच्च शिक्षा प्राप्त है। शिक्षा के मामले में वेनेजुएला दुनिया का पांचवा राष्ट्र है जिसका उच्च शिक्षा अनुपात सबसे अधिक है। यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला में निरक्षरता समाप्त हो गई है। दूसरी ओर, खाद्य कार्यक्रमों के चलते कुपोषण में पांच प्रतिशत की कमी आई। किसानों के लिए कल्याणकारी योजना शुरू होने से खाद्य उत्पादन के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ और बड़े पैमाने पर खाद्य सामग्रियों का उत्पादन होना शुरू हुआ। जो देश 1980 में अपनी खपत का 90 प्रतिशत अन्य देशों से आयात करता था वह 2011 में घटकर 30 प्रतिशत पर आ गया। शावेज के शासन काल के दौरान देश के शिशु मृत्यू दर में भी उल्लेखनीय कमी आई। वेनेजुएला की 96 प्रतिशत जनता के पास आज पीने के लिए स्वच्छ पेयजल है। हालांकि, महंगाई और बेरोजगारी अभी भी बरकरार है।

वर्ष 1998 से प्रत्येक बार राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने वाले शावेज का वर्ष 2002 में तख्तापलट करने की असफल कोशिश की गई। शावेज ने वर्ष 2004 में एक जनमत संग्रह के जरिए सत्ता से खारिज करने के विपक्ष के प्रयासों को असफल किया। हालांकि, 2007 में संविधान में संशोधन के लिए कराया गया जनमत संग्रह शावेज हार गए लेकिन वर्ष 2009 में हुए जनमत संग्रह से उनका दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया। गत अक्टूबर में शावेज ने राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में स्थानीय गवर्नर हेनरिक कैपरिल्स को 11 फीसदी मतों के अंतर से हराया था लेकिन जीवन भर पूंजीवादी विचारधारा से लड़ाई लड़ने वाले और करिश्माई व्यक्तित्व के धनी शावेज जिंदगी की जंग हार गए।

लैटिन अमेरिकी देशों में सबसे लोकप्रिय एवं सफल नेता के रूप में देखे जाने वाले शावेज अपनी बात बेबाकी से रखते थे। अमेरिका को हमेशा अपने निशाने पर लेने वाले शावेज मौका मिलने पर उसकी तीखी आलोचना करने से नहीं चुकते थे। अमेरिका एवं पश्चिमी देशों के लाख विरोध के बावजूद उन्होंने ईरान के साथ अपने संबंध दिनोंदिन और प्रगाढ़ किए। अपने विचारों एवं आदर्शों के प्रति हमेशा निष्ठावान एवं सजग रहने वाले शावेज मुश्किलों में कभी कमजोर नहीं पड़े। अमेरिकी नीतियों से आहत होने पर शावेज राष्ट्रपति बराक ओबामा को ‘क्लाउन’ और पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलिसा राइस को ‘लिटिल गर्ल’ के खिताब से नवाजा।

21वीं शताब्दी में ‘समाजवाद’ को अपनी तरह से आगे बढ़ाने वाले ह्यूगो शावेज के निधन पर वेनेजुएला के लोग गमज़दा हैं। शावेज की लोकप्रियता का आलम इसी से लगाया जा सकता है कि उनके निधन पर लैटिन अमेरिकी देशों और दुनिया के कई हिस्सों में लोग शोक संतप्त हैं और उन्हें याद कर रहे हैं।

Source : http://zeenews.india.com

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