ये देखो जेल में खेल

Posted: June 13, 2013 in Education, Politics, Youths and Nation

ल प्रशासन कहता है कि सोमवार को छापे में एक भी मोबाइल नहीं मिला। हम नहीं कहते, मगर जेल से लाइव शूट करकेभेजे गए एक वीडियो का सच है कि जेल में एक नहीं, मोबाइल फोन्स का जखीरा है। इनका छुपाकर नहीं बल्कि खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। केवल बात करने में ही नहीं जेल प्रशासन के कारनामों को उजागर करने के लिए भी।
उन्नाव जेल में शूट किए गए करीब सवा तीन घंटे के इस वीडियो में धड़ल्ले से मोबाइल पर बतियाते बंदी, खाने की खराब गुणवत्ता पर बंदियों के लाइव बयान, अस्पताल की कहानी, वसूली की कहानी और…। यह लिखते हुए थोड़ा संकोच हो रहा है पर आपको हकीकत बताने के लिए यह जरूरी है। वीडियो में दो बंदी तीसरे बंदी को जबरन पकड़ते हुए दुष्कर्म का प्रयास करते हुए दिखाए गए हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि यह वीडियो फिल्म किसने बनाई और हमें कैसे मिली? यह सीडी जेल में बंद एक बंदी ने अपने मोबाइल से पांच, छह और सात जून को बनाई है। यकीन नहीं आता तो आप भी देख लीजिए।
पेश है सीनियर रिपोर्टर आशुतोष मिश्र की रिपोर्ट
सीन-1
•आवाज आती है, ‘ये है बैरिक नंबर नौ…’। पूरी बैरिक का नजारा। एक युवक लेटा लाल रंग के मोबाइल से बात कर रहा है। मोबाइल पर इस तरह बात हो रही है, ‘जो कुछ बचा है वो भी बेच दो। हमको थोड़ा बहुत दे दो। यहां व्यवस्था ठीक कर लेबे… खेती बेच डालो…’।
•‘ये है पंकज, अपनी मम्मी से बात कर रहे हैं… पंकज काहै को खेती बिचवा रहे हो…।’ (सीडी बनाने वाले की आवाज आती है)
•‘…कब मर रही हौ… आज ही मरि जावौ…’। (पंकज की आवाज)
•‘महतारी ना मारौ… यार पंकज भैया…’। (बीच में सीडी बनाने वाले की आवाज)
•तभी चंद्रप्रकाश ने फोन छीन लिया। ‘बढ़िया फोन है… यार पंकज।’ (चंद्रप्रकाश, फोन देखते हुए)
•‘ऐ ये क्या कर रहे हौ… तुम सीडी बना रहे हो का?’ (पंकज की आवाज)
•‘हां… यह बताओ यहां खाना कैसा मिलता है…’ (सीडी बनाने वाले की आवाज पत्रकार के अंदाज में)
•‘अबै कुत्ते भी नहीं खा सकते.. हम तौ इन्सान हैं…’ (पंकज की आवाज)।
•‘तुम्हारे भाई ने लॉकप में…’ (सीडी बनाने वाला)
• ‘हां डाई पी ली थी…’ (पंकज)
•‘खाना तुम खुद बनावत हौ, सब्जी आलू सब बाहर से लाते हो? (सीडी बनाने वाला)
•जेल अधिकारी चोर हैं न… (पंकज)
•अधिकारियों से काहै नहीं बतावत हौ? (सीडी बनाने वाला)
•(गालियां) ‘लंबरदारों से पिटवाते हैं..। इसके बाद कई अफसरों के बारे में गलत तरह की बातें… बैरिक में सीवर टूटा पड़ा है..। हमें आए दस महीने हो गए…’। (पंकज)
•‘अच्छा हर बंदी को वेजेज (पारिश्रमिक) मिलता है?’ (सीडी बनाने वाला)
•‘कहां देते हैं? (पंकज)
•‘कुशल कारीगर को 40 रुपये एक दिन का मिलना चाहिए। छह माह में पांच सौ देते हैं, बाकी खुद खा जाते हैं…। हम सब सबूत हाईकोर्ट पहुंचा रहे हैं…’। (सीडी बनाने वाला अपने आप ही जवाब देता है)
‘ये हैं बैरिक नंबर नौ के राइटर। बब्बू भैया..।’ (सीडी बनाने वाला) फिर जेल का पूरा नजारा दिखाया जाता है
‘देखिए ये हैं तिरगा सन ऑफ श्याम लाल। काहै कच्ची भिंडी खा रहे हो।’ (सीडी बनाने वाला)
‘हां! कच्ची ही फायदा करती है।’ (बंदी)
तभी दूसरे बंदी की आवाज आती है, ‘जेलर पैसा खाए जा रहे हैं…’ और गाली देता है।
‘पहले नाम बताओ?’ (सीडी बनाने वाला)
‘हमार नाम मुकेश तिवारी सन ऑफ राम दास आजाद नगर गंगाघाट’। (मुकेश)
‘कितने दिन से बंद हो? (सीडी बनाने वाला)
‘दस साल से।’ (मुकेश)
‘काहे में?’ (सीडी बनाने वाला)
‘मर्डर में सजा है…।’ यह कहते हुए मुकेश बैठ जाता है।
‘खाना कैसा मिलता है?’ (सीडी बनाने वाला)
गालियां देते हुए, ‘यहां कोई नहीं आता। विजय सिपाही गांजा-चरस बिचवाता है। मोबाइल का दो हजार रुपये लेता। तीन हजार अंदर लाने का…।’ (मुकेश)
आवाज आती है, ‘हमने भी डिप्टी जेलर को दिया…’
‘तुम कहां हो?’ (सीडी बनाने वाला)
‘चार नंबर में।’ (बंदी)
‘यहां कैसे आ गए नौ नंबर में?’ (सीडी बनाने वाला)
‘घूमने-देखने।’ (बंदी)
‘तिवारी (मुकेश) बताओ ब्रेड कब से नहीं मिली?’ (सीडी बनाने वाला)
‘सब खा गए। चाय ऐसी कि पानी, चीनी ही नहीं।’ (मुकेश)
‘डीएम से शिकायत काहे नहीं करते?’ (सीडी बनाने वाला)
‘जब वो चले जाते हैं तो बहुत पिटवाते हैं। शीलू पासी लंबरदार… डिप्टी जेलर आदित्य झा का … है।’ (मुकेश)
तभी एक बंदी बोलता है, ‘देखो हमने डीएम को चिट्ठी दी थी… कुछ नहीं हुआ’।
पैसा फेंको ऐश करो
सीन-2
‘ये हैं राजू सन ऑफ लाला कोरी…, तुम को वेजेज कब से नहीं मिला… चार-पांच महीने से…’ (सीडी बनाने वाला)
‘आधा देते आधा खुद खा जाते… (गालियां)’। (राजू)
‘तुम भंडारे में हो…’ (सीडी बनाने वाला)
‘हां…’ (राजू)
‘दाल कितनी मिलती है…’ (सीडी बनाने वाला)
‘ऐसे ही 26-26 किलो, बाकी साफ कर लेते हैं, दूध एक पैकेट में दो बीमार को आधा-आधा मिलता है…’ (राजू)
‘ये बताओ डीएम हर बैरिक में आते हैं… डीआईजी आते हैं’ (सीडी बनाने वाला)
‘नहीं बाहर से ही चले जाते हैं, खानापूरी करते हैं, सब चोर हैं…।
चंद्रप्रकाश… गर्वनमेंट हमें खिलाने के लिए 27 लाख देती है… नौ लाख में खिला देते हैं बाकी बंदरबांट हो जाती है…’ (राजू)
पूरे जेल का फील्ड दिख रहा है
‘का नाम है तुम्हार?’ (सीडी बनाने वाला)
‘विपिन कुमार सोनी।’ (बंदी)
पूछा गया सन ऑफ… तो विपिन ने चुप्पी साध ली
‘तुम गजेंद्र मर्डर में हो? ठीक… परेशान न हो। (सीडी बनाने वाला)
बीच में आवाज आती है ‘बीड़ी का बंडल लाओ…’
‘आज कौन आया था? आज तारीख कितनी है?’ (सीडी बनाने वाला)
‘पांच जून 2013…’ फिर एक अफसर का नाम लिया (बंदी)
‘हर बैरिक में गए थे?’ (सीडी बनाने वाला)
‘नहीं।’ (बंदी)
सीन-3
‘लाल बहादुर… तुम्हें कितने साल हो गए?’ (सीडी बनाने वाला)
‘दस साल से 20 दिन ज्यादा।’ (लाल बहादुर)
‘खाना कैसा आता है?’ (सीडी बनाने वाला)
‘दाल में पानी आवत है।’ (लाल बहादुर)
‘दाल तुम्हारे हिसाब से भंडारे में कितनी बनती है?’ (सीडी बनाने वाला)
‘26 किलो।’ (लाल बहादुर)
‘सब्जी?’ (सीडी बनाने वाला)
‘ऐसे ही 35-36 किलो।’ (लाल बहादुर)
‘एक हजार बंदियों को अंट जाता है?’ (सीडी बनाने वाला)
‘मजबूरी है…।’ (लाल बहादुर)
‘जूता-लात भी मारते हैं ये लोग?’ (सीडी बनाने वाला)
‘का करिहौ…।’ (लाल बहादुर)
‘ऐ किसका मोबाइल पकड़ा गया?’ (सीडी बनाने वाला)
‘नरेश का।’ (बंदी)
‘काहे पकड़ा गया… तलाशी हुई थी?’ (सीडी बनाने वाला)
‘हां, भैया कहिस… मोबाइल और स्मैक तुम्हारी … में घुसेड़ देंगे। हमने कहा तीन नंबर में खुलेआम स्मैक बिक रही…। हमरी ही सारे … फाड़े पड़े हैं। हमरे पास न मोबाइल है, न स्मैक…। देखो ये आए महेश यादव… ये ही बिकवा रहे हैं…।’ (बंदी)
‘महेश… गांव पिकासी.. आसीवन थाना..।’ (सीडी बनाने वाला)
‘चंद्रप्रकाश यार हमारा नाम झूठा ना बताऔ…। (महेश)
सीन-4
‘राजू तुम्हें कितने साल हो गए?’ (सीडी बनाने वाला)
‘पांच साल…।’ (राजू)
‘कहां से बंद हो?’ (सीडी बनाने वाला)
‘उन्नाव कोतवाली से…।’ (राजू)
इसके बाद सलाखें और पूरी बैरिक दिखाई जाती हैं।
सीन-5
जेल की दीवार दिखाई दे रही है। हैंडपंप पर बंदी नहा रहे हैं। एक चूल्हा जल रहा है।
‘तुम लोग खाना बना रहे हो?’ (सीडी बनाने वाला)
‘हां भैया।’ (बंदी)
‘काहै खाना बना रहे हौ?’ (सीडी बनाने वाला)
‘वहां कुछ नहीं देते हैं, न दाल… न कुछ…।’ (बंदी)
‘ये क्या रखा है… सब्जी मसाला, ये कटा हुआ प्याज, ये धनिया, ये तेल…। अबै ये काहै?’ (सीडी बनाने वाला)
‘कितने दिन से बंद हो?’ (सीडी बनाने वाला)
‘दस महीने से।’ (बंदी)
‘नाम बताओ?’ (सीडी बनाने वाला)
‘सुनील सिंह सन ऑफ नारायण सिंह।’ (बंदी)
‘ब्लाक प्रमुख के भाई हो? जेल में कितने दिन हो गए?’ (सीडी बनाने वाला)
‘दो महीने, हमारे भैया ऐंठा करते हैं।’ (बंदी)
तभी आवाज आई, ‘भैया उधर लगाओ..’ और एक व्यक्ति मोबाइल पर बात करते दिखता है। सफेद कढ़ा हुआ कुर्ता, हाथ में कलावा। युवक ने कान से मोबाइल हटाया। यह काले रंग का मोबाइल है। अजय नाम का कैदी चावल बनाता हुआ।
‘चावल नहीं मिलता है क्या?’ (सीडी बनाने वाला)
‘मिलता है पर कीड़े निकलते हैं।’ (अजय)
एक युवक पूछता है ‘चरस पीओगे…’
जवाब मिला ‘नहीं हम नशा नहीं करते हैं…’।
साभार : अमर उजाला ई-पेपर
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