पहाड़ का नाम बदनाम न करो

Posted: June 25, 2013 in Children and Child Rights, Education, Politics, Uncategorized, Youths and Nation

चित्र में —-टेंट लगाकर बनी रसोई में दस से ज्यादा गांवों की  महिलाएं भोजन बनाने में जुटी हैं।

घनसाली में स्थानीय लोगों द्वारा सैलानियों के लिए लगाया गया लंगर

देवभूमि के वासी अपने यहां आनेवाले यात्रियों को देवता का दर्जा देते हैं

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पहाड़वासी जो पैसा इकट्ठा करेंगे वह प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की बजाय सामाजिक संगठनों के जरिए खर्च करेंगे।
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उत्तराखण्ड में आई आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्य के साथ साथ कुछ ऐसी खबरें भी आ रही हैं जो दहलानेवाली हैं। मसलन, यात्रियों के साथ लूटपाट की जा रही है या फिर आपदा की इस घड़ी में महिला यात्रियों के साथ बलात्कार तक की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। लेकिन उत्तराखण्ड में खासकर गढ़वाल से जुड़े लोग इसका जमकर प्रतिवाद कर रहे हैं और कह रहे हैं पहाड़ को इस तरह बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। देवभूमि के वासी अपने यहां आनेवाले यात्रियों को देवता का दर्जा देते हैं और ऐसे वक्त में इस तरह का व्यवहार पहाड़वासियों को बदनाम करने की साजिश है।
सोशल मीडिया पर मौजूद पहाड़ या उत्तराखण्ड के समूह पेजों पर लोगों द्वारा ऐसी जानकारियां लगातार जारी की जा रही हैं जो बताती हैं कि कैसे आपदा की इस घड़ी में पहाड़ के निवासी लोगों को लूटने की बजाय उनकी मदद कर रहे हैं। इन समूहों पर उन खबरों का भी जोरदार खंडन किया जा रहा है जिसमें बताया जा रहा है कि पाहड़ के लोग सैलानियों से मनमानी कीमत वसूल रहे हैं।
पहाड़ से जो अपडेट मिल रहे हैं उसके मुताबिक लूटपाट की कुछ घटनाएं हुई हैं और कुछ लोगों के पास से मंहगे लैपटॉप, मोबाइल, नकदी और गहने भी बरामद किये गये हैं लेकिन ये पहाड़ के लोग नहीं है बल्कि नेपाली मजदूर हैं जो सीजन में यहां कमाई करने आते हैं। पहाड़ के लोगों का कहना है कि इन्हें पुलिस नहीं पकड़ रही है बल्कि पहाड़ लोग ही पकड़ रहे हैं उनके पास से माल बरामदगी कर रहे हैं।
इसी तरह इन समूह पेजों पर दी जा रही जानकारी में बताया जा रहा है कि सरकारी कोशिशों से अलग कैसे पहाड़ के लोग सैलानियों की सेवा करने में लगे हुए हैं। घनसाली में होटल व्यापारी अपनी ओर से पहल करके होटलों में सैलानियों को न सिर्फ मुफ्त भोजन करा रहे हैं बल्कि रात में रुक रहे यात्रियों को मुफ्त में कमरे भी उपलब्ध करवा रहे हैं। होटलों के अलावा स्थानीय लोगों ने लंगर लगाकर लोगों को भोजन करवाया है। स्थानीय लोग अपनी ओर से सैलानियों को भोजन पानी उपलब्ध कराने के साथ ही कम्बल और कपड़े भी उपलब्ध करवा रहे हैं और जिनके पास किराये तक के पैसे नहीं हैं ऐसे जरूरतमंदों को रूपये पैसे भी दे रहे हैं। हालांकि यात्रियों का कहना है कि अगर ऐसी ही व्यवस्था गुप्तकाशी और मयाली जैसी जगहों पर हुई होती भूख प्यास से कई लोग दम तोड़ने से बच जाते।
घनसाली में चलनेवाले लंगर में शामिल रहे मुकेश बड़ोनी लिखते हैं कि यह लंगर तीन दिनों तक चला है। उनका दावा है कि घनसाली के अलावा इतनी बड़ी नि:शुल्क सेवा दूसरी किसी जगह पर नहीं दी गई है। उत्तराखंड से आ रही लूट की खबरों पर वे टिप्पणी करते हैं कि यह सच है कि एक मछली सारे तालाब का पानी गंदा कर देती है।
सरकार को नहीं देंगे सहायता राशि
इस बीच दिल्ली और मुंबई में रहनेवाले पहाड़वासियों ने आज जगह जगह बैठकें की और पहाड़ को इस आपदा की घड़ी में मदद करने के लिए राहत जुटाने और पहाड़ तक पहुंचाने की शुरूआत की। दिल्ली में दो जगह और मुंबई में एक जगह ऐसी मीटिंग होने की सूचना है। मुंबई में हुई मीटिंग में तय किया गया है कि मुंबई में रहनेवाले पहाड़वासी जो पैसा इकट्ठा करेंगे वह प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की बजाय सामाजिक संगठनों के जरिए खर्च करेंगे।
साभार :  दैनिक भास्कर एवं विस्फोट . कॉम
By visfot news network 23/06/2013 21:20:00

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