संघ भारत में इजरायली आतंक का भारतीय संस्करण है : पूर्व संघ प्रचारक

Posted: July 8, 2013 in Education, Geopolitics, Politics, Uncategorized, Youths and Nation

बाबा विजयेन्द्र 

कल नरेन्द्र मोदी का प्रचार-बम फटा. मोबाइल पर ही मोदी ने पंद्रह सौ कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और चुनाव प्रबंधन का टिप्स दिया. उस टिप्स में नीतीश के खिलाफ हल्ला बोल करने की रोचक योजनायें समझाई गयी. शाम का संबोधन नरेन्द्र का समाप्त हुआ कि उधर गया में सुबह नौ सीरियल ब्लास्ट हो गए. मामले की गंभीरता मरने और हताहत होने की संख्या में नहीं है मामला भावी राजनीति का है. ब्लास्ट के बाद मोदी कह सकते हैं की जबतक भाजपा साथ में थी बिहार में दंगा नहीं हुआ, दंगा रोकने के लिए देश में भाजपा का आना जरूरी है.

नीतीश की लापरवाही भी सामने लाई जायेगी. सरकारी तंत्र किसी मुस्लिम-तंत्र का नाम भी ले सकता है. कुछ निर्दोष मुस्लिम नौजवान की गिरफ्तारी और जेल भी हो सकती है ? गया के बौद्ध मंदिर पर आक्रमण करबा कर मुस्लिम और दलित के बीच में दूरियां भी स्थापित की जायेंगी. यह बिहार स्तर का खेल नहीं है. यह संघ परिवार की राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है.
शायद पाठको को ध्यान में होगा की पिछले दस वर्षों में दंगे की कमान संघ परिवार ने दलितों और पिछड़े नेतृत्व को ही सौप रक्खी है. गुजरात के दंगें में दलित आदिवासी की नयी जमात बनाई गयी. इस जमात को ही मुसलमानों के सामने खड़ा किया गया. इस जमात के द्वारा क्या खूनी खेल हुआ गुजरात में बताने की जरूरत नहीं.

राम मंदिर आन्दोलन में कामेश्वर चौपाल को जो बिहार के दलित हैं, मोहरा बनाया गया. राम मंदिर का शिलान्यास इसी वंचित नेता ने किया था. फिर अम्बेडकर की पुण्यतिथि छह दिसंबर को मस्जिद ढहा देने की सफल कोशिश हुयी. जिन्ना के बचपन के गोधरा का चयन यूं ही नहीं किया गया? और आगे देखें वाजपेयी ने बुद्ध पूर्णिमा पर एटम-बम का विस्फोट किया. करूणा और मैत्री के प्रतीक दिवस का चयन ही क्यों? बुद्ध और बाबा साहेब के प्रतीकों पर प्रहार संघ परिवार के राजनीतिक षड्यंत्र का ही हिस्सा है. नरेन्द्र और नीतीश दो पिछड़ा नेतृत्व को आपस में लड़बा देना भी एक रोचक राजनीतिक खेल का हिस्सा है. मुसलमानों और दलितों को सावधान रहने की जरूरत है.

संघ के स्वयंसेवकों का कहना है कि मुस्लमान दलितों के दुश्मन हैं. मुसलमानों ने पूरी दुनिया में दलितों के प्रतीकों पर प्रहार किया है. दलितो और बौद्ध धर्मियो के खिलाफ मुसलमानों ने बांग्लादेश, पाकिस्तान, भारत, म्यानमार, थाईलैंड और पुरे दुनिया में कितना जबरदस्त आतंक मचाया हुआ है! बांग्लादेश में 100 बुद्ध मंदिरों में आग लगा दी। मुसलमानों ने अफगानिस्तान में बामियान की बुद्ध मूर्तियों कों डायनामाईट से उडाया। आंबेडकर ने बौद्ध धर्म की तबाही के लिये मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया। पाकिस्तान में दलित बौद्धों को शव का अंतिम संस्कार करने के लिये स्मशान उपलब्ध नहीं। रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यानमार में घुसपैठ कर बौद्धों की जमीन-घर छिन लिया। थायलैंड में बौद्ध लोगो के सर कलम किये। लखनऊ में मुस्लिमों ने बुद्ध मुर्तिया तोड़ दी।

आज की विश्व की राजनीति में घट रही इन घटनाओं को एकांगी रूप में देखना बड़ी भूल होगी। जगतीकरण के इस दौर में पूरा जगत तो एक नहीं हुआ, पर साम्राज्यवादी ताकतों का गठजोड़ अंतर्राष्ट्रीय अवश्य हो गया. जर्मनी के हिटलर और इजरायल की सुखद चर्चा संघ की शाखा पर अक्सर ही होती है. संघ भारत में इजरायली आतंक का भारतीय संस्करण है. मालेगांव का बम विस्फोट बहुत चीजों का साफ करता है.

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फ़िलहाल मोदी बिहार में हुंकार भर चुके हैं. अमित शाह उत्तर प्रदेश में मोर्चा लिए हुए हैं. दिल्ली का रास्ता बिहार और यु पी को नकार कर सम्भव नहीं है. मंडल और कमंडल की लड़ाई का हाईटेक एवं लेटेस्ट मॉडल इस चुनाव में देखने को मिलेगा. संघ का स्थापना स्थल और दीक्षा ग्राम पास में ही है. बस एक बीच की दीवार ही बाधक है. जिस दिन यह दीवार टूटी की संघ का हिन्दू-राष्ट्र अस्तित्व में आ जायेगा. चुनाव जीतने के लिए भाजपा दंगा करबा सकती है और कांग्रेस युद्ध करबा सकती है. सम्भव है कि अब कही सारनाथ पर अटैक न हो? सारनाथ पर अटैक के बाद बुद्ध कहाँ से मुस्कुरा पायेंगें? बुद्ध के वारिस को ही तो मारने की गहरी साजिश हैं ये चुनाव, चुनावी खेल और बम ब्लास्ट? इसे डिफ्यूज करने के लिए न केवल समाज को सावधान रहना होगा वल्कि आगे भी आना होगा.

साभार : स्वराज खबर

http://swarajkhabar.com/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82/

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Comments
  1. deepak kumar misra says:

    राम !
    .
    राम भारतवर्ष के आराध्य हैं, इससे हर भारतीय को सहमत होना ही पड़ेगा, जो सहमत नहीं होगा …………….. ?
    दीपक

  2. ये वर्ग बौद्धिक और शारीरिक रूप से स्वयंसेवकों को संघ की जानकारी तो देते ही हैं साथ-साथ समाज, राष्ट्र और धर्म की शिक्षा भी देते हैं.

  3. भाजपा ने इसे पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने की कार्रवाई की तरह प्रस्तुत किया है.

  4. ये वर्ग बौद्धिक और शारीरिक रूप से स्वयंसेवकों को संघ की जानकारी तो देते ही हैं साथ-साथ समाज, राष्ट्र और धर्म की शिक्षा भी देते हैं.

  5. संविधान के तीन प्रमुख भाग हैं। भाग एक में संघ तथा उसका राज्यक्षेत्रों के विषय में टिप्पणीं की गई है तथा यह बताया गया है कि राज्य क्या हैं और उनके अधिकार क्या हैं। दूसरे भाग में नागरिकता के विषय में बताया गया है कि भारतीय नागरिक कहलाने का अधिकार किन लोगों के पास है और किन लोगों के पास नहीं है। विदेश में रहने वाले कौन लोग भारतीय नागरिक के अधिकार प्राप्त कर सकते हैं और कौन नहीं कर सकते। तीसरे भाग में भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के विषय में विस्तार से बताया गया है। • संविधान की प्रस्तावना बाहर सेट मुख्य उद्देश्य है जो संविधान सभा को प्राप्त करने का इरादा है. • ‘उद्देश्य’ संकल्प डॉ। भीम राव अंबेडकर द्वारा प्रस्तावित है और संविधान सभा द्वारा पारित, अंततः भारत के संविधान की प्रस्तावना बन गया. • जैसा कि उच्चतम न्यायालय ने मनाया है, प्रस्तावना संविधान के निर्माताओं के मन को जानने की कुंजी है. • यह भी भारत के लोगों के आदर्शों और आकांक्षाओं का प्रतीक है. • संविधान (42 वां संशोधन) अधिनियम, 1976 प्रस्तावना में संशोधन और शब्द समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और प्रस्तावना के लिए वफ़ादारी जोड़ी. • प्रस्तावना प्रकृति में गैर न्यायोचित है, राज्य के नीति theDirective सिद्धांतों की तरह और कानून की एक अदालत में लागू नहीं किया जा सकता है. यह न तो राज्य के तीन अंगों को मूल शक्ति (निश्चित और वास्तविक शक्ति) प्रदान कर सकते हैं, और न ही संविधान के प्रावधानों के तहत अपनी शक्तियों की सीमा. • संविधान की प्रस्तावना विशिष्ट प्रावधान नहीं ओवरराइड कर सकते हैं. दोनों के बीच किसी भी संघर्ष के मामले में, बाद अभिभावी होगी. तो •, यह एक बहुत ही सीमित भूमिका निभानी है. • उच्चतम न्यायालय ने मनाया प्रस्तावना संविधान के प्रावधानों के आसपास अस्पष्टता को दूर करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

  6. भाजपा ने इसे पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपने की कार्रवाई की तरह प्रस्तुत किया है.

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