गुरु दक्षिणा का संघी ड्रामा

Posted: July 22, 2013 in Education, Geopolitics, Politics, Youths and Nation

kangresh modi copy

Photo: swarajkhabar.com

(बाबा विजयेन्द्र)
मैं संघ से निकाला गया तनखैया स्वयंसेवक हूँ. वर्षों तक मैंने संघ के दक्षिणा कार्यक्रम में भाग लिया है. वर्षों तक लिफाफा- बंद दक्षिणा अर्पित करता रहा हूँ. बंद लिफाफे में अर्पित किये गए उस दक्षिणा को याद कर मैं रोमांचित हो रहा हूँ. अभी स्वयंसेवक होता तो संघ के अधिकारी घर पर अवश्य ही पहुंचे होते और मेरे कई पुश्तों का हालचाल पूछते, खाना खाते और तब बात होती कि इस बार मैं कितने अंकों में दक्षिणा कर रहा हूँ? औकात देखकर हमारा अंक निर्धारित होता। मैं कहता की स्थिति ठीक नहीं है, व्यापार मंदा है. इस बार दो अंक में ही दक्षिणा रहने दीजिये प्रचारक महोदय? तब महाराष्ट्रीयन हिन्दी में प्रचारक महोदय अपना बौद्धिक पेलते? हिन्दू-राष्ट्र की दुहाई देते, पतत्वेषकायो नमस्ते- नमस्ते’ की याद दिलाते और कहते- नहीं नहीं इस बार पांच या छह अंकों में गुरु-दक्षिणा करनी है आपको? आप एक अखबार के संपादक हैं? फर्जी पत्रकारिता करते ही होंगे और इस फर्जी पत्रकारिता में कितनी कमाई होती है यह मुझे मत समझाईये. मैं संघ का प्रचारक हूँ कोई पप्पू नहीं? संघ-प्रचारक का मान रखने को मैं विवश होता?

आज सब लोग अपने- अपने गुरु की पूजा करते हैं? मैं गुरुविहीन हूँ. शायद इसलिए जीवन में अन्धकार भी छाया है? अगर संघ में दक्षिणा अभी तक देता रहता तो मुझे भी सत्ता तक पहुँचने का आशीर्वाद मिलता? विधायक बनता, सांसद बनता और मंत्री होता? अपनी ही किस्मत पर मैं स्वयं पिशाब करता रहा? सभी मित्र सलाह देते रहते हैं कि मैं या तो किसी योग-गुरु की शरण ले लूं या फिर संघ – गुरु की ? बिना शरण गए सत्ता कहाँ से मिलेगी? शरण संघ की हो या सोनिया की ,सत्ता की साधना तो एक जैसी ही होगी? समाज और देश की दीनता दूर हो या न हो, अपनी दीनता तो दूर कर ही लूं.? इस उधेरबुन से मुझे निकालिए मेरे प्यारे भाईयो?

भागवत जी पटना में हैं. इसी गुरु- दक्षिणा कार्यक्रम में भाग लेने बिहार गए हैं. पूर्व स्वयंसेवक – मित्र नीतीश का राज कैसा है ? यह देखना और गैर सरकारी पार्टी बनी भाजपा का हालचाल जानना भी तो जरूरी था ? पटना के इस गुरु – दक्षिणा कार्यक्रम में सभी’गटों’ के नायक भी जमा हुए होंगें ? नरेन्द्र मोदी न सही, पर सुशील मोदी तो होंगें ही ? बिना मोदी का मोहन ‘ भागवत-कथा ‘ सम्भव ही नहीं? हर वक्त एक मोदी चाहिए मोहन जी को ? भागवत दक्षिणा में सुशील मोदी से क्या मांगें होंगें ? शायद कितने अंकों में दक्षिणा की चर्चा तो नहीं ही किये होंगें? पर कितनी सीटें एमपी की जीत कर दे रहे हो, यह चर्चा अवश्य ही हुई होगी ?

विरथ- मोदी क्या बोले होंगें, पता नहीं ? पर संघ – गुरु भागवत पटना से निराश ही लौट रहे होंगें ? बिहार भाजपा में बगावत का स्वर उन्हें भी सुनायी पड़ा होगा ?दर्जनों विधायक बगावत पर उतर आये हैं. एक विधायक तो निष्कासित भी कर दिए गए हैं .

इधर बागी विधायक पर नीतीश की गिद्धदृष्टि लगी हुई है ? ज़द [यु] एकदम मूंह बायी खड़ी है. इंतजार है कि कितने विधायक – स्वयंसेवक एकलव्य की तरह अंगूठा कटाते हैं या ठेंगा दिखाते हैं ?

दिल्ली में भी भाजपा परेशां है . यहाँ भी गुरु दक्षिणा के नाम पर बहुत सारे नेता ठेंगा दिखाने को तैयार हैं ? मोदी के गुरु आडवाणी इस चेला के आतंक से कोपभवन में बैठ गए हैं . आडवाणी ने तो पूरी जिन्दगी ही संघ को दक्षिणा में दे दी थी.पर गुरु तो गुरु ही ठहरे ? संघ-भक्ति का फायदा आडवाणी को नहीं मिल पाया तो पावदान बने छोटे-छोटे स्वयंसेवक की क्या विसात ? ये स्वयंसेवक भागवत के सपनों को साकार करने के लिए बूथ- मेनेजर ही तो बनेंगें ? इन स्वयंसेवक के लिए तो ‘ भारत माता की जय ‘ यानी ‘ ‘ ‘ भारत सरकार ‘ है . वैसे अभी भाजपा का यह असंगठित-विद्रोह है और यह कभी भी संगठित -विद्रोह का शक्ल ले सकता है ? कल मैंने संघ के पूर्व प्रिय स्वयंसेवक गोविन्दाचार्य को भी भाजपा के खिलाफ ताल ठोंकते देखा ? गोविन्द की चर्चा इसलिए कर रहा हूँ की जब जब उमा भारती का पर कतरने लगती है भाजपा तब तब गोविन्दाचार्य वैकल्पिक राजनीति की बात करने लगते हैं . यशवंत सिन्हा तो मोदी को अपनी औकात में रहने का सलाह दे चुके हैं ? पार्टी के भोभा-शंख नकबी ,शहनबाज और अनुराग ठाकुर मोदी की ठकुरसुहाती में यशवंत सिन्हा की ऐसी तैसी करने की भी कोशिश की . भाजपा का सिन्हा- ब्रदर्स हों या डी-फोर[ भाजपा ] ये सब मोहन भागवत का उपदेश सुनने को तैयार नहीं हैं

संघ का गुरु भगवा-ध्वज है . इस भगवा का इश्तेमाल भी सियासत के लिए हो रहा है । प्रतीक के तौर पर भले ही कुछ गप्प मार लें पर हाल के दिनों में सरसंघचालकों का सियासी हस्तक्षेप बढ़ा ही है. गुरु- शिष्य परंपरा पोलिटिकल-टर्मीनोलोजी है . आज भी समाज बेचैन है असली गुरु को दक्षिणा देने के लिए . अब गुरु ख़त्म हुए केवल गुरुघंटाल शेष रह गए हैं.

Courtesy: http:swarajkhabar.com

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