गंगा रक्षा के लिए गंभीर है टैनरी उद्योग: इरशाद मिर्जा

Posted: August 20, 2013 in Education, Politics, Youths and Nation
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कानपुर। कानपुर की गंगा और नगर निकाय की चुनौतियां विषय पर शास्त्री भवन में 18 अगस्त को  गंगा  एलायंस द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में टैनरी उद्योग का पक्ष रखते हुए पद्म श्री इर्शाद मिर्जा ने कहा कि गंगा हर धर्म की है इसे हिंदू या मुस्लिम नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टैनरी उद्योग कानपुर में सबसे बड़ा रोजगार का संगठित उद्योग है जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। गंगा प्रदुषण के समाधान निकालने में इसकों नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। टेैनरी उद्योग के लिए बन रहे नए प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें प्रदुषण को न्यूनतम किया जा सकेगा और जो ठोस कचड़ा निकलेगा वह सड़क निर्माण के काम में आ सकेगा। ऐसा करने से नदी में हो रहे प्रदुषण पर नियंत्रण लग सकेगा। उन्होने कहा कि टैनरी उद्योग गंगा गंगा में प्रदुषण की रोक थाम के लिए गंभीर है और आपसी तालमेल रखने में विश्वास करता है। उन्होंने गंगा प्रदुषण को रोकने के लिए सरकार से भी अपेक्षा की।

इस अवसर पर उपस्थित बंेगलुरू से आए तकनीकि विशेषज्ञ प्रो. के. चंद्रमौली ने उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक के गंगा किनारे बसे शहरों की यात्रा के अनुभव को बताते हुए कहा कि ऐसा मानना कि कानपुर से ही गंगा को ज्यादा खतरा है ठीक नहीं। सहारनपुर की कागज मिलों से तथा गढ़ मुक्तेश्वर तक के उद्योगों से गंगा का पानी पहले ही प्रदुषित होकर आता है। उन्होंने तस्वीरों को दिखाते हुए बताया कि कुंभ के दौरान गंगा के पानी का गाढ़े भूरे रंग का होना यही प्रदर्शित करता है कि कपड़ा उद्योग, रसायन उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग द्वारा भी बहुत बड़ी मात्रा प्रदुषित जल गंगा में आकर मिलता है जिसपर लोगांे का ध्यान नहीं है। उन्होंने बताया कि नगर विकास कार्यो में तकनीकि खामियों की वजह से लोगों को पेयजल से लेकर भीषण जल भराव तक की समस्याओं के समाधान के लिए औपचारिक चर्चाओं की जरूरत है जहां सरकारी मशीनरी जनता के साथ विचार विमर्श कर समाधान की तलाश करे। इसके लिए सरकारी अधिकारियों, सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को गंभीर होकर काम करना चाहिए।

इस अवसर पर डिवाइन फाॅर चेंज के माध्यम से बच्चों में सामाजिक चेतना के विकास के लिए प्रयासरत युवाओं में इंजीनियर प्रनोति  गुप्ता ने बच्चों में गंगा के प्रति अलख जगाने की रूपरेखा सामने रखी।

जेपी आंदोलन के अलावे आधा दर्जन आंदोलनों का नेतृत्व करनेवाली पुतुल ने जन भागीदारी का पक्ष रखते हुए कहा कि यदि सरकार यह मानकर चल रही है कि बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा प्रायोजित सरकारी योजनाएं बगैर लोगों को शामिल किए कामयाबी हासिल कर लेगी तो यह गलतफहमी है। उन्होंने कहा कि अफसरशाही और टेक्नोक्रेसी चली पिछली गंगा कार्ययोजनाओं के नतीजे सबके सामने है और इस असफलता की उचित समीक्षा किए बगैर नई लीपापोती का दौर जारी है। इस हाल में जनता को आगे बढ़कर सबाल उठाने होंगे ताकि शासन को चुनौतियों का आभास कराया जा सके। इसके लिए कार्यशाला में उन्होंने एक अंतरिम कार्यदल की घोषणा की जिसमें एस. बी. शर्मा, अजय अनमोल, मोना सूद, सुरेश त्रिवेदी तथा कुलदीप सक्सेना जैसे प्रख्यात सामाजिक नेताओं को शामिल किया तथा सहयोग देने का संकल्प लिया गया।

Cciurtesy: http://swarajkhabar.com/

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