नर्मदा के डूब प्रभावितों का तीसरे दिन भी जल सत्याग्रह जारी

Posted: September 3, 2013 in Education, Politics, Youths and Nation

मप्र के खंडवा, हरदा और देवास में नर्मदा के डूब प्रभावितों का तीसरे दिन भी तीनों जिलों में जोर शोर से जल सत्याग्रह जारी।
हरदा में 125 विस्थापित गिरफ्तार ।
1500 एकड़ जमीन टापू बनी, कई घरों में पानी घुसा ।
प्रमुख कार्यकर्त्ता चित्तरूपा पालित सहित 70 विस्थापित जेल में ।

इंदिरा सागर बांध प्रभावितों द्वारा 1 सितम्बर से प्रारंभ किये गए जल सत्याग्रह तीसरे दिन भी तीनों जिलों खंडवा, हरदा और देवास में जोर शोर से जारी रहा. खंडवा में ग्राम मालूद, हरदा में ग्राम कालिसराय और देवास में ग्राम मेल पिपलिया में सैकड़ो विस्थापितों ने जल सत्याग्रह जारी रखा. इस बीच इंदिरा सागर का पानी आज 261.93 तक बढ़ा दिया गया जिससे लगभग 1500 एकड़ जमीन टापू बन गयी है और कई घरों में पानी भर गया है.

हरदा जिले के ग्राम बिछोला में कल गिरफ्तारियों के बाद डूब के ग्राम कालिसराय में सैकड़ो प्रभावितों द्वारा जल सत्याग्रह प्रारंभ कर दिया गया था. आज भारी संख्या में पुलिस बल नावों के द्वारा सत्याग्रह स्थल तक पहुंचा और वहां 125 महिला पुरुष सत्याग्रहियों को गिरफ्तार किया गया.

देवास जिले के मेल पिपलिया गाँव में आज भी पुरे उत्साह के साथ जल सत्याग्रह जारी रहा. लगभग 500 विस्थापित सत्याग्रह पर बैठे. मेल पिपलिया से कल गिरफ्तार की गयी 58 महिलाओं को आज गाँव में लाकर छोड़ दिया गया. कल जल सत्याग्रह से गिरफ्तार किये गए 64 पुरुषों को कन्नोद जेल में रखा गया है. महेश्वर बांध प्रभावितों का एक दल आज मेलपिपलिया में जल सत्याग्रह में शामिल हुआ.

खंडवा जिले में ग्राम बडखालिया में पुलिस करवाई के बाद डूब के ग्राम मालूद में कल से प्रारंभ किये गए जल सत्याग्रह में सैकड़ों विस्थापित शामिल हुए जिनमे बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं.

नर्मदा आन्दोलन की वरिष्ठ कार्यकर्ता चित्तरूपा पालित सहित 70 प्रभावित अभी भी जेल में बंद हैं. सुश्री पालित इंदौर की केंद्रीय जेल में, 64 विस्थापित कन्नोद जेल में और 6 विस्थापित खंडवा जेल में बंद हैं.

हजारों एकड़ जमीन टापू बनी, कई घरों में पानी घुसा
इंदिरा सागर बांध में पानी का स्तर 261.93 मीटर तक बढ़ा दिया गया है जिस कारण देवास, हरदा और खंडवा जिले में लगभग 1500 एकड़ जमीन टापू बन गयी है,कई घरों में पानी भर गया है और सैकड़ों घर टापू बन गए है. इस प्रकार बिना अधिग्रहण, पुनर्वास के घर डूब रहे हैं और सैकड़ों किसान अपनी जीविका के एकमात्र साधन से वंचित हो जायेंगे.

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