भारत रत्न -सचिन तेंदुलकर ??

Posted: November 19, 2013 in Education, Geopolitics, Politics, Youths and Nation

बी एस पाबला

सचिन तेंदुलकर  उस एक भारी-भरकम क्लब के कर्मचारी हैं जो Board of Control for Cricket In India (BCCI) कहलाता है। विशुद्ध व्यवसायिक नज़रिये सरीखे इस प्रतिष्ठान के दो मशहूर प्रोजेक्ट हैं जिन्हें नाम दिया गया है टीम इंडिया और आईपीएल। इन दोनों के अपने अपने ग्रुप मेंबर हैं जिन्हें निश्चित वेतन के अलावा अच्छा प्रदर्शन करने पर आम कारखाने जैसे बोनस भी दिया जाता है।

बात कुछ जमी नहीं! क्योंकि तभी ख्याल आया इन्कम टैक्स वाले उस झंझट का जिसमें इनकम टैक्स अफसर द्वारा सवाल ज़वाब किए जाने पर सचिन (जी) ने कहा था कि he is a non-professional cricketer और playing cricket is not his profession इसलिए फॉर्म में लिखा गया कि Income from playing cricket is reflected as ‘income from other sources’!

यह सब Sachin R. Tendulkar vs. Assistant Commissioner of Income-tax, Range 193/ IT APPEAL NOS. 428 TO 430 AND 6862 (MUM.) OF 2008 के आधिकारिक दस्तावेज़ में दर्ज़ है। तो इन भाई सा’ब को खेल के लिए कोई सम्मान कैसे दे सकती है सरकार? जब वह खुद कह रहे हों कि he is a popular model who acts in various commercials for endorsing products of various companies… A major part of the income derived by him during the year is from the exercise of his profession as an ‘actor’ in these commercials… the income derived by him from ‘acting’ has been reflected as income from “business & profession”!!

मतलब यह हुआ कि मुख्य कमाई तो विज्ञापनों की शूटिंग, मॉडलिंग से है क्रिकेट तो बस यूँ ही कभी कभी खेल लेते हैं ज़नाब!

इन सब बातों के बीच भारत सरकार के इन्कम टैक्स अफ़सर ने इसी दस्तावेज़ के अनुसार कह डाला कि He is engaged in the activity of playing cricket as a paid job rather than as an amateur.

चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है  कि शपथपत्र देकर खुद खिलाड़ी और यह बोर्ड अदालत में कह चुके हैं कि हम भारत देश के लिए नहीं खेलते, अपने बोर्ड को मुनाफा दिलवाने के लिए खेलते हैं और खिलाड़ी ठेके, कॉंट्रेक्ट पर रखे जाते हैं जिनका भुगतान किया जाता है उन्हें, मुनाफा लाने पर। साथ ही यह भी कह डाला कि ना तो हम भारत का तिरंगा फहराते हैं और ना ही किसी राजकीय चिन्ह का प्रयोग कहीं करते हैं!!

ऐसे ही एक मौके पर सुपरिचित हिंदी ब्लॉगर जीतू चौधरी ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि जहाँ भी क्रिकेट से कमाई की बात आती है तो ये अपने आप को भारत के प्रतिनिधि कहते, सारा माल कमाते, बटोरते और हजम कर जाते हैं। लेकिन जहाँ भी सरकार इनसे कुछ फ्री में मांगना चाहती तो ये लोग फ़टाक से एक प्राइवेट क्लब मे बदल जाते।

और तो और, न्यायालय मे दिए शपथपत्र (जो अब इनकी नाक की नकेल बन जाएगा) मे ये लोग चीख चीख कर कहते कि हम तो भारत का प्रतिनिधित्व ही नही करते, ना ही हम सरकार से जुड़े है, हम तो सिर्फ़ एक क्लब है जहाँ कुछ खिलाड़ी हमारे कर्मचारी है, और अपने कर्मचारियों को खेलने के लिए हम विदेशों मे भेजते है। ना तो हम भारत मे क्रिकेट के सरोकार से जुड़े है और ना ही हम खेल मंत्रालय के अधीन है। पूरा शपथ पत्र अगर आप पढे तो आप इनकी महानता के गुण गाने लग पड़ो।

………लो जी, यह प्रश्न तो अब भी सामने खड़ा कि तनख्वाह ले कर अपने मालिक को मुनाफ़ा दिलवाने वाल़े कर्मचारी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्या?

अब आप ही सहायता करो!1476718_762422523773643_1791095550_n

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Comments
  1. Shakeel Chauhan says:

    Shame, Sachin shoudn’t be honored by BHARAT RATNA. He does not deserve for this so please do not insult India and Indians.

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