हमारे नेता को गाली ना दें भारत-रत्न जी ?

Posted: November 19, 2013 in Education, Geopolitics, Politics, Youths and Nation

बाबा विजयेन्द्र

अभी अभी भारत-रत्न बने रसायनशास्त्री नेता को ‘मूर्ख’ कह कर गरियाते आये हैं। इस रसायन शास्त्री का नेताओं के प्रति हुए इस भौतिक-परिवर्तन को समझा जा सकता है . राव को गुस्सा है कि इन नेताओं को अगर भारत-रत्न  देना ही था तो फिर सचिन के बाद दिया होता। सचिन के शोर में राव साहेब को नोटिस ही नहीं लिया।  राव साहेब को फिर से ‘पोलिटिकल-केमेस्ट्री’ पढनी चाहिए

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राजनेता इन्हे मूर्ख बना गए । आप  राव साहेब नेता को मूर्ख कह रहे है. यह आपकी मूर्खता है। भारत का नेता अगर मूर्ख है तो फिर आपकी विद्वता को आँकी कैसे गयी ? इन मूर्खों द्वारा  दिया गया भारत- रत्न सम्मान वापस क्यों नहीं कर देते ? इस दो कौड़ी के सम्मान की क्या जरूरत है। मल्टीब्रांड सम्मान ले बेहतर होगा। विदेशी सम्मान के भूखे लोग भारत के नेता को गरियाते रहते हैं। मैगसासे ,बूकर  आदि दिए ही जाते हैं कि ये अपने नेता को जमकर नीचा दिखाए।              भ्रष्ट , बलात्कारी, चोर और लूटेरा साबित करने के लिए इन्हे पैसे मिल रहे हैं। राव अरविंद केजरीवाल को तो आप जानते ही हैं वो भी मैग्सैसे प्राप्त करके भारत भर के नेताओं को भ्रष्ट साबित करने में लगे हैं. अरविन्द केजरीवाल को जरुरत है भ्रष्टाचार की जिससे वो सबको दोषी ठहरा के देश के नेतृत्व और नीयत को नीचा दिखा सकें.उसी के सुर में सुर मिला के आप भी वही कहानी दोहरा रहे हैं.  आप जैसे विद्वान और लोग यह कैसे भूलते हैं कि इसी तंत्र ने अरविन्द को मौका दिया है और और जिसे आप मूर्ख कह रहे हैं उसी मूर्ख तबके ने आपको भारत रत्न का तमगा।  इतिहास गवाह है कि गुलामी के दिनों में कितने बुद्धिजीवी और प्रतिभा संपन्न लोग अंग्रेजी  राज और बाज़ार  की चाटुकारिता और दलाली करते रहे  है. भारत की आज़ादी की बात की थी भारत के मूर्खों ने, तमाम नेताओं ने. उन्ही नेताओं की दीवानगी की  देन है आपके देश की आज़ादी। आपके वक्तव्य के विरोध में मै यह कहना चाहूंगा कि देश के नेता मूर्ख और चोर नहीं हैं. भारत के नेताओं में आत्मीयता है, सम्बन्ध बोध है उस नेता के पास किसी तबके के  कोई भी लोग आते हैं तो उसे वे सम्मान से देखते हैं. वहीँ पर देश के बुद्धिजीवी और नौकरशाह अपनी अकर्मण्यता को छिपाने के लिए देश के नेताओं को मूर्ख बता रहे हैं दोषी ठहरा रहे हैं. बहुत से षड़यंत्र चल रहे हैं देश की जनभावना बहलाने और आत्म विश्वास को कमजोर करने के लिए. अगर देश के भारत रत्न यह कहने लगें कि नेता मूर्ख और चोर हैं तो हम कहाँ से लायेंगे देश देश के नेता किसको सौंपेंगे देश की बागडोर, इस प्रकार का वक्तव्य क्या यह साबित करने की कवायद है कि देश की संसद अब हमारे नेताओं  नहीं चल रही, संसद का भी निजीकरण कर दिया जाये।  राव साहब नेता शब्द को  गाली बनाने की कवायद मत कीजिए, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की नज़र में देश की धरती रत्न गर्भा है और देश का बच्चा -बच्चा भारत रत्न है.

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बाबा विजयेंद्र ने जेपी के    सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन से निकलकर बिहार के तमाम जमीनी आंदोलनों में पैंतीस वर्षों तक संघर्ष  किया है.     नव उदारवाद के दौर में भारत की आम जनता के लिए नए रास्तों की तलाश में “आज़ादी बचाओ आंदोलन” और “युवा भारत” सरीखे प्रयोगों को लम्बे समय तक जिया है.  इसी राजनैतिक प्रयोगवादिता के चलते नक्सल आंदोलन से लेकर संघ तक का सफ़र भी  तय किया। वर्त्तमान में राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक स्वराज खबर के समूह संपादक हैं.

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