गाय के सवाल पर घिरी सरकार, दिल्ली में संगठनों की बैठक कल

Posted: November 22, 2014 in Uncategorized

हिन्दू मुसलमान और गाय का सवाल

देश की मुख्यधारा का बताता है कि अंग्रेजी भारतीय सिपाहियों ने जानवरों की चर्बी से बने कारतूसों के खिलाफ दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के खिलाफ बगावत की| विश्वप्रसिद्ध इतिहासकार अमरेश मिश्र बताते हैं 25 जुलाई 1857 को बहादुर शाह ज़फर ने आदेश किया कि रियासत की सभी गायों को लाकर राजकीय कांजी हाउस में जमा किया जाए और गौवध करने वाले के हाथ कलम कर दिए जाएँ| गौरक्षा के लिए जिस प्रकार सनातनी जातियों  और मुसलमान सिपाहियों ने जो लड़ाई शुरू की  जाहिर है कि बहादुर शाह ज़फर का आदेश उसी के लिए राज्य के समर्थन का नतीजा था| यह बात सिर्फ सरसरी तौर पर इतिहास जानने वाले जानते हैं|

गौरक्षा आन्दोलन के युवा  नेता आदर्श बाजपेई  कहते हैं कि  भारत  देश की जनश्रुतियों में  मनुष्य और पशुओं के बीच का समन्वय भी बड़ा जीवंत और पारस्परिक पूरकता की एक बड़ी मिसाल है| पंचतंत्र की कहानियां जानने वाले जानते हैं कि हाथी से लेकर चूहे तक की सामाजिक  व्यवस्था में क्या भूमिका है| कहावतें और जनश्रुतियां देश के सामाजिक ताने बाने में पालतू पशुओं में घोड़े, गधे , बिल्ली, कुत्ते, से लेकर जंगली जानवरों सियार, शेर, चीता, भालू, मयूर, कौव्वे, कोयल तक के महत्व को रेखांकित करती हैं| शेर को जंगल का राजा, बिल्ली को मौसी, और गाय को माता कहते हुए इस समाज ने जानवरों के प्रति पारस्परिक सम्बन्ध को ही सामाजिक मान्यताओं का मजबूत आधार दिया है| इतिहास गवाह है कि  इस तथ्य के मार्फ़त ही बाबर, हुमायूँ, अकबर और हैदर अली जैसे नामचीन मुस्लिम  शासकों को गोवंश का खैरख्वाह कहता है|”

इस बात की तस्दीक करती है एक प्रतिष्ठित वेबसाईट स्क्रोल.इन वेबसाईट के मुताबिक बाबर ने गौ रक्षा की जो  परम्परा शुरू की उसे हुमायूँ ने आगे बढाया और  गौ हत्या को जघन्य अपराध माना| 1586 में मुग़ल बादशाह अकबर ने गौहत्या रोकने फरमान जारी किया| सिख और मराठा जातियों के राजाओं ने भी गोवंश संवर्धन की परम्परा को बढ़ाने में ही देश और समाज की भलाई मानी| मैसूर के शासक हैदर अली के बाद 1857 में  आखिरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फर ने हिन्दू समाज की इसी गौभक्ति के लिए गौहत्या को दंडनीय अपराध घोषित किया| कालांतर में गुलाम भारत के सरकारी षड्यंत्रों के चलते कई संस्थानों ने मिल कर  गाय का  राजनीतिकरण किया|

गाय के मुद्दे को विवादित विषय बनाने वाले सरकारी संतों और तथाकथित सेकुलरों की पर तंज कसते हुए सर्वेन्ट्स ऑफ़ पीपुल सोसाइटी के अध्यक्ष  हुए अमरेश मिश्र कहते हैं कि बड़ा सवाल तो मनुष्य और प्रकृति, मनुष्य और  पशु-पक्षियों  के आपसी सम्बन्ध का भी है| मनुष्य और प्रकृति के बीच के सम्बन्ध के लिए भारतीय परम्पराएँ दुनिया के लिए आदर्श रही हैं| संभवतः इसी लिए भारत को विश्व गुरु माना जाता रहा है|

ब्राह्मण राजनीति से जुड़े युवा नेता पंडित ज्ञान प्रकाश मिश्र करारा व्यंग्य करते हुए कहते हैं, “विश्व गुरु का ढोल भाजपा के नाम हो गया और उसे पीट-पीट के भाजपा ने अच्छे दिन लाने के दावे किये| हरियाणा में हुए भीषण गोवध से व्यथित  संत गोपाल दास ने अनशन फिर से शुरू किया जिसके दमन के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने बर्बरता पूर्वक संत और उनके समर्थकों को गिरफ्तार करवा दिया| सरकार की इन दोहरी नीतियों के चलते गाय के प्रति श्रृद्धा रखने वाले हिन्दू और मुसलमान नागरिकों में भारी असंतोष व्याप्त है|”

गौरतलब है कि मुस्लिम युवक फैज़ खान ने लम्बे समय तक जंतर मंतर पर अनशन किया था और भारी जनसमर्थन हासिल किया था| युवा सामाजिक कार्यकर्ता अनवर अली बताते हैं कि फैज़ का आन्दोलन एक गंभीर मुद्दे को लेकर था जिसमे गाय की हिफाज़त में महंगाई और प्रदूषण के साथ-साथ ग्रामीण विकास भी जुड़े हुए थे|

Captureचुनाव पूर्व की तस्वीरें दिखाते हुए आन्दोलन के संयोजक विकास पूछते हैं कि आप ही बताओ कि  इन तस्वीरों में यह  नरेन्द्र मोदी और और राजनाथ सिंह की   गोभक्ति  है या एक शानदार अभिनय| भाजपा ने यदि गावो “विश्वस्य मातरः” कह के वोट मुकम्मल करने की कला खोज निकाली तो केंद्र  और प्रदेश में सरकार  गौ रक्षा में हीला हवाली क्यों ? गाय का विरोधाभासी सवाल सिर्फ राजनैतिक समीक्षा भर नहीं, यह सवाल तो सरकार  के दोमुहेपन यानि भ्रष्टाचार का भी प्रतीक है|

आम आदमी की वरिष्ठ रणनीतिकार रही पूजा बहुखंडी इस मुद्दे को हर आदमी से जुड़ा देखती हैं| पूजा कहती हैं कि, “आज के शहरी आम आदमियों में किसका  बच्चा  बिना  दूध के दुनिया देख लेगा| दूध अमूल का हो या मदर डेयरी का निकलता तो किसी न किसी जानवर से ही है| ऐसे में क्या ये कम अचम्भा है कि अपने बच्चों के लिए फिक्रमंद लोग जानवरों के लिए तनिक भी फिक्रमंद नहीं| दूध के दाम चालीस और पचास रुपये लीटर हो जाने के बावजूद भाजपा सरकारें हिन्दू समाज में गाय की भूमिका को इतना अनदेखा करके किस अहंकार का परिचय दे रही हैं ? क्या भाजपा के नेतृत्व में बनी ये सरकारें इतनी  निर्बुद्धि हो गयीं  है या सत्ता के अहंकार में दुधमुंहे बच्चों और देश के संतों को भूल गयी भाजपा सरकार?| इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के मुखिया की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आने से पूजा को गहरी निराशा है| लेकिन उनका मानना है कि ,”गाय का सवाल हर पार्टी से के लिए भले राजनीतिक हानि लाभ भर हो लेकिन ये देश के आम आदमी के जीवनमर्रा जमीनी सवालों में से एक  है| इस पर बहुत सी पार्टियों के सांसदों से बात की है| हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा से अलग हुई पार्टी शिव सेना के सांसदों ने इस मुद्दे को सांसद में उठाने का और पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया है|”

ऐसे गंभीर सवालों को लेकर  गौ रक्षा कार्यकर्ता सत्ताधीशों से भी मिले| भाजपा के वरिष्ठ राजनेता और मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि हम दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे| कृषि गृह राज्यमंत्री राधा मोहन सिंह और संजीव बालियान ने घटना से सम्बंधित पुलिस अधिकारियों से बात भी की और समुचित कारवाई का भरोसा दिलाया है| वहीँ गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संतों और महिलाओं के साथ हुई बर्बरता को घटना को एक गलती के तौर पर स्वीकार किया है|

संत गोपालदास के समर्थकों ने  जंतर मंतर पर आन्दोलन को जारी रखा है और साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय को भी संपर्क करने का प्रयास किया है| आन्दोलनकारियों की उम्मीद तो कुछ यूँ है कि हिंदुत्व के मुद्दे पर नही तो इंसानियत के मुद्दे पर ही मोदी जी इस मुद्दे को संज्ञान में लेंगे| लेकिन सरकारी हीला हवाली से आहत आन्दोलनकारियों का एक समूह इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक जन आन्दोलन के पक्ष में खड़ा नज़र आता है| इसके लिए आन्दोलनकारियों ने कल रविवार को एक बैठक रामकृष्ण आश्रम मार्ग मेट्रो के समीप स्थित गुरु रामराय उदासीन आश्रम में आयोजित की है| विश्व हिन्दू कांग्रेस और धार्मिक संगठनों से मिल रहे समर्थन से बैठक में भीषण गहमागहमी रहने की सम्भावना है| सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक कई सांसदों ने मुद्दे पर मौखिक समर्थन दिया है और बैठक में शामिल रहने के संकेत भी दिए हैं| शिव सेना और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की मानें तो दिल्ली की राजनीतिक चौसर पर कई बड़े चेहरे चमक सकते हैं|

संपर्क:

विकास: 9999998647

आदर्श :    7275555755

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