रहस्य परत-दर-परत :युवा भारत, राजीव दीक्षित और भारत स्वाभिमान आन्दोलन

Posted: December 9, 2014 in Education, Geopolitics, Politics, Youths and Nation

1799025_880071302033881_7986616807598658352_oदेश जागरुक नौजवानों में शायद ही कोई हो जो आज़ादी बचाओ आन्दोलन के प्रमुख रहे राजीव दीक्षित के नाम से वाकिफ़ न हो| नव उदारवादी व्यवस्था के विरोध में इलाहबाद में स्वर्गीय प्रोफ़ेसर बनवारी लाल शर्मा द्वारा भरी हुंकार के दौरान देश भर के हजारों युवा प्रोफ़ेसर साहब के साथ आज़ादी बचाने के लिए जुड़े| उनमे से प्रखरतम बौद्धिक चेतना और जनता की आवाज बनकर निकले राजीव दीक्षित| राजीव दीक्षित के सहयोगियों में प्रमुख रहे ध्रुव साहनी बताते हैं कि     2009 मे राजीव भाई बाबा रामदेव के संपर्क मे आए और बाबा रामदेव को देश की गंभीर समस्याओ और उनके समाधानो से परिचित करवाया और विदेशो मे जमा कालेधन आदि के विषय मे बताया और उनके साथ मिल कर आंदोलन को आगे बढाने का फैसला किया| आजादी बचाओ के कुछ कार्यकर्ता राजीव भाई के इस निर्णय से सहमत नहीं थे|

फिर भी राजीव भाई ने 5 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान आंदोलन की नीव रखी| आन्दोलन का मुख्य उदेश्य लोगो को अपनी विचार धारा से जोडना, उनको देश की मुख्य समस्याओ का कारण और समाधान बताना| योग और आयुर्वेद से लोगो को निरोगी बनाना और भारत स्वाभिमान आंदोलन के साथ जोड कर 2014 मे देश से अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नई पार्टी का निर्माण करना था जिसका उदेश्य भारत मे चल रही अँग्रेजी व्यवस्थाओ को पूर्ण रूप से खत्म करना, विदेशो मे जमा काला धन, वापिस लाना, गौ ह्त्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना, और एक वाक्य मे कहा जाए ये आंदोलन सम्पूर्ण आजादी को लाने के लिए व्यवस्था परिवर्तन के लिए शुरू किया गया था|
आन्दोलन की गरिमा और उसमे लोगों की भागीदारी के बारे में बताया जाता है कि राजीव भाई के व्याख्यान सुन कर मात्र ढाई महीने मे 6 लाख कार्यकर्ता पूरे देश मे प्रत्यक्ष रूप मे इस अंदोलन से जुड गए थे राजीव भाई पतंजलि मे भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ के बीच व्याख्यान दिया करते थे जो पतंजलि योगपीठ के आस्था चैनल पर के माध्यम से भारत के लोगो तक पहुंचा करते थे| समर्थकों का मानना है कि राजीव भाई राजनैतिक एकीकरण में विश्वास रखते थे उनका का कहना था भारत की सभी राजनीतिक पार्टियो के पास कुल सदस्यो की संख्या मात्र 5 करोड़ है यदि हम इससे ज्यादा लोगो को अपने साथ जोड़ लेते है और जरूरत पड़ी तो देश के 79 बड़े संतो से समर्थन मांगेगे जिनके साथ देश के 45 करोड़ लोग है ! तो हम एक नई पार्टी बनाकर उनको 2014 मे जीतकर पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन कर देंगे |
राजीव दीक्षित के कर्मयोगी होने की बात स्वीकार करते हुए ध्रुव सहनी मानते हैं कि इतना सब होने के बावजूद  राजीव भाई भारत स्वाभिमान आंदोलन के प्रतिनिधि बनकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले गाँव-गाँव शहर-शहर जाया करते थे पहले की तरह व्याख्यान देकर लोगो को भारत स्वाभिमान से जुडने के लिए प्रेरित करते थे|


क्या हुआ नवम्बर 2010 में

सोशल मीडिया पर लिखी गयी एक पोस्ट में ध्रुव साहनी ने खुलासा करते हुए लिखा है कि लगभग आधे भारत की यात्रा करने के बाद राजीव भाई 26 नवंबर 2010 को उडीसा से छतीसगढ राज्य के एक शहर रायगढ पहुंचे वहाँ उन्होने 2 जन सभाओ को आयोजित किया| इसके पश्चात अगले दिन 27 नवंबर 2010 को जंजगीर जिले मे दो विशाल जन सभाए की इसी प्रकार 28 नवंबर बिलासपुर जिले मे व्याख्यान देने से पश्चात 29 नवंबर 2010 को छतीसगढ के दुर्ग जिले मे पहुंचे|

उनके साथ छतीसगढ के राज्य प्रभारी दया सागर और कुछ अन्य लोग साथ थे | दुर्ग जिले मे उनकी दो विशाल जन सभाए आयोजित थी पहली जनसभा तहसील बेमतरा मे सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक थी |राजीव भाई ने विशाल जन सभा को आयोजित किया| इसके बाद का कार्यक्रम साय 4 बजे दुर्ग मे था, जिसके लिए वह दोपहर 2 बजे बेमेतरा तहसील से रवाना हुए |

साथ ही ध्रुव साहनी ने इशारा किया है कि  इस बात की घटना विश्वास योग्य नहीं है इसके बाद की सारी घटना उस समय उपस्थित छतीसगढ के प्रभारी दयासागर और कुछ अन्य साथियो द्वारा बताई गई है| उन लोगो का कहना है गाडी मे बैठने के बाद उनका शरीर पसीना पसीना हो गया ! दयासागर ने राजीव जी से पूछा तो जवाब मिला की मुझे थोडी गैस सीने मे चढ गई है शोचलाय जाऊँ तो ठीक हो जाऊंगा|

फिर दयासागर तुरंत उनको दुर्ग के अपने आश्रम मे ले गए वहाँ राजीव भाई शोचालय गए और जब कुछ देर बाद बाहर नहीं आए तो दयासागर ने उनको आवाज दी राजीव भाई ने दबी दबी आवाज मे कहा गाडी स्टार्ट करो मैं निकल रहा हूँ ! जब काफी देर बाद राजीव भाई बाहर नहीं आए तो दरवाजा खोला गया राजीव भाई पसीने से लथपत होकर नीचे गिरे हुए थे| उनको बिस्तर पर लिटाया गया और पानी छिडका गया दयासागर ने उनको अस्पताल चलने को कहा ! राजीव भाई ने मना कर दिया उन्होने कहा होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाएंगे |

थोडी देर बाद होमियोपैथी डॉक्टर आकर उनको दवाइयाँ दी | फिर भी आराम ना आने पर उनको भिलाई से सेक्टर 9 मे इस्पात स्वयं अस्पताल मे भर्ती किया गया| इस अस्पताल मे अच्छी सुविधाइए ना होने के कारण उनको दूसरी जगह  मे भर्ती करवाया गया| राजीव भाई एलोपेथी चिकित्सा लेने से मना करते रहे| उनका संकल्प इतना मजबूत था कि वो अस्पताल मे भर्ती नहीं होना चाहते थे ! उनका कहना था कि सारी जिंदगी एलोपेथी चिकित्सा नहीं ली तो अब कैसे ले लू ? ऐसा कहा जाता है कि इसी समय बाबा रामदेव ने उनसे फोन पर बात की और उनको आईसीयु मे भर्ती होने को कहा|

फिर राजीव भाई 5 डॉक्टरों की टीम के निरीक्षण मे आईसीयु भर्ती करवाएगे| उनकी अवस्था और भी गंभीर होती गई और रात्रि एक से दो के बीच डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित किया| सोशल मीडिया पर दिए गए  ध्रुव साहनी के वक्तव्य के मुताबिक   बेमेतरा तहसील से रवाना होने के बाद की ये सारी घटना राज्य प्रभारी दयासागर और अन्य अधिकारियों द्वारा बताई गई है अब ये कितनी सच है या झूठ ये तो उनके नार्को टेस्ट करने ही पता चलेगा |

राजीव जी की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बता कर सब तरफ प्रचारित किया गया| 30 नवंबर को उनके मृत शरीर को पतंजलि लाया गया जहां हजारो की संख्या मे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे| और 1 दिसंबर राजीव जी का दाह संस्कार कनखल हरिद्वार मे किया गया|

समर्थकों ने जताया हत्या का संदेह 

राजीव भाई के चाहने वालों का कहना है कि अंतिम समय मे राजीव जी का चेहरा पूरा हल्का नीला, काला पड गया था| उनके चाहने वालों ने बार-बार उनका पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया लेकिन पोस्टमार्ट्म नहीं करवाया गया| राजीव भाई की मौत लगभग भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत से मिलती जुलती है| ध्रुव साहनी की पोस्ट में ये भी कहा गया है कि ताशकंद से जब शास्त्री जी का मृत शरीर लाया गया था तो उनके भी चेहरे का रंग नीला, काला पड गया था| और अन्य लोगो की तरह राजीव भाई भी ये मानते थे कि शास्त्री जी को विष दिया गया था| राजीव भाई और शास्त्री जी की मृत्यु मे एक जो समानता है कि दोनों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था|
राजीव भाई दीक्षित की मृत्य  से जुडे कुछ सवाल सबके कान खड़े करने के लिए काफी हैं समर्थक चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो ताकि पता चल सके कि राजीव भाई की मृत्यु दिल का दौरा पडने से हुयी है ये किसके आदेश पर ये प्रचारित किया गया| 29 नवंबर दोपहर 2 बजे बेमेतरा से निकलने के पश्चात जब उनको गैस की समस्या हुए और रात 2 बजे जब उनको मृत घोषित किया गया इसके बीच मे पूरे 12 घंटे का समय था| जांच में इस बिंदु की भी तफ्तीश हो कि  घंटे मे मात्र एक गैस की समस्या का समाधान क्यों  नहीं हो पाया|अंत पोस्टमार्टम ना होने के कारण उनकी मृत्यु आजतक एक रहस्य ही बन कर रह गई असामयिक मृत्यु के पश्चात् आखिर पोस्ट मार्टम करवाने मे क्या तकलीफ थी| राजीव दीक्षित  का फोन जो हमेशा आन रहता था उस 2 बजे बाद बंद क्यों था| राजीव दीक्षित  के पास एक थैला रहता था जिसमे वो हमेशा आयुर्वेदिक, होमियोपैथी दवाएं रखते थे वो थैला खाली क्यों था |
संदेह खड़े करने के सबब और भी हैं मसलन 30 नवंबर को जब उनको पतंजलि योगपीठ मे अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था उनके मुंह और नाक से क्या टपक रहा था उनके सिर को माथे से लेकर पीछे तक काले रंग के पालिथीन से क्यूँ ढका था ?
राजीव भाई की अंतिम विडियो जो आस्था चैनल पर दिखाई गई तो उसको एडिट कर चेहरे का रंग सफेद कर क्यों दिखाया गया समर्थक कहते हैं कि  अगर किसी के मन को चोर नहीं था तो विडियो एडिट करने की क्या जरूरत थी ??
राजीव दीक्षित की मौत का सम्बन्ध विदेशी ताकतों से जुड़े होने का संदेह जाहिर करते हुए ध्रुव साहनी ने दावा किया कि   राजीव भाई की मृत्यु के बाद पतंजलि से जुड़े एक बहुत बड़े सदस्य को इंग्लैंड ने सम्मानित किया था, साथ ही इसको पुख्ता करते हुए विदेशी ताकतों के आर्थिक हित होने का भी हवाला दिया है उन्होंने स्पष्ट किया है कि ये बात  सब जानते है ये विदेशी लोग बिना अपने हित के किसी को आवर्ड नहीं देते|
राजीव भाई के कई समर्थक उनके जाने के बाद बाबा रामदेव से काफी खफा है क्योंकि बाबा रामदेव अपने एक व्याख्यान मे कहा कि राजीव भाई को हार्ट ब्लोकेज था, शुगर की समस्या थी, बी.पी. भी था राजीव भाई पतंजलि योगपीठ की बनी दवा मधुनाशनी खाते थे !

पूर्व में दिए एक व्याख्यान में राजीव दीक्षित ने खुद बताया  था कि  उनका शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल सब नार्मल है| साथ ही दावा किया था कि  वे पिछले 20 साल से डॉक्टर के पास नहीं गए और अगले 15 साल तक जाने की संभावना नहीं है|राजीव दीक्षित  के चाहने वालो का कहना है कि हम कुछ देर के लिए राजीव भाई की मृत्यु पर प्रश्न नहीं उठाते लेकिन हमको एक बात समझ नहीं आती कि पतंजलि योगपीठ वालों ने राजीव भाई की मृत्यु के बाद उनको तिरस्कृत करना क्यों शुरू कर दिया अब योगपीठ के कार्यक्रमों में मंचो के पीछे उनकी फोटो भी  नहीं लगाई जाती| साथ ही साथ आस्था चैनल पर उनके व्याख्यान भी दिखने बंद हो  गए ??
इसके अतिरिक्त उनके कुछ समर्थक कहते हैं कि भारत स्वाभिमान आंदोलन की स्थापना जिस उदेश्य के लिए हुए थी राजीव भाई की मृत्यु के बाबा रामदेव उस राह हट क्यों गए ? राजीव भाई और बाबा खुद कहते थे कि सब राजनीतिक पार्टियां एक जैसी है हम 2014 मे अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे !

बदले हालात तो हर शख्स ने मुंह फेर लिया 

राजीव दीक्षित के समर्थकों के संदेह को ख़ारिज भी कर दिया जाये तो भी बहुत से लोग रहे जिन्होंने बाबा रामदेव को अपनी उम्मीदों का साझीदार बनाया|   पिछले दशक में बाबा रामदेव के उदय और पतंजलि योगपीठ के संचालक बाबा रामदेव के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर साथ चलने का वादा करने वाले युवा भारत के लोग कहाँ हैं| युवा भारत से निकले राजीव दीक्षित ने   बाबा रामदेव और पतंजलि योगपीठ का जमीनी आधार बनाने में स्वदेशी और भारत स्वाभिमान आन्दोलन ने बड़ी भूमिका निभाई| 
फिलहाल बाबा रामदेव पर आर्थिक हित साधने का आरोप है| समर्थक कहते हैं कि स्वदेशी और स्वराज के प्रणेता  राजीव दीक्षित  की मृत्यु के बाद बाबा रामदेव ने भारत स्वाभिमान के आंदोलन की दिशा बदल दी और राजीव की सोच के विरुद्ध उन्हे भाजपा सरकार का समर्थन किया| परिणाम सामने है कि भाजपा के सबसे बड़े दावों में से एक  गौ ह्त्या अभी तक तक बंद नहीं हुई| इस पर तुर्रा यह भी है कि  3 हजार 527 करोड़ की सबसिडी दी कत्लखानो को दी है| मोदी सरकार मनमोहन सरकार से 10 कदम आगे जाकर विदेशी कंपनियो को भारत मे बुला रही है जिसके राजीव दीक्षित  कड़े विरोधी थे|

राजीव दीक्षित के विचारों से अभिभूत रहे श्रोताओं के मुताबिक, “राजीव भाई ने  ने अपने पूरे जीवन मे देश भर मे घूम घूम कर 5000 से ज्यादा व्याख्यान दिये| सन 2005 तक वह भारत के पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण चार बार भ्रमण कर चुके थे| उन्होने बहुराष्ट्रीय  कंपनियो की नाक मे दम कर रखा था| ये अलग बात है कि इतना विशाल व्यक्तित्व मुख्यधारा की मीडिया के लिए अछूत बना रहा|  क्योकि वह देश से जुडे ऐसे मुद्दो पर बात करते थे की एक बार लोग सुन ले तो देश मे 1857 से बडी क्रांति हो जाती ! वह ऐसे ओजस्वी वक्ता थे जिनकी वाणी पर साक्षात माँ सरस्वती  निवास करती थी। जब वे बोलते थे तो स्रोता घण्टों मन्त्र-मुग्ध होकर उनको सुना करते थे !”
राजीव दीक्षित  के समर्थको में प्रमुख ध्रुव साहनी का कहना है की काश बाबा रामदेव ने जितना प्रचार भाजपा-मोदी का किया उसका 20% भी राजीव भाई का किया होता आज उनके साथ 5 करोड़ लोगो की फोज होती जो ये पूरी व्यवस्था बदल डालती| लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो पाया और हमारे हाथ फिर से 5 साल के लिए बंध गए|
फिलहाल  राजीव भाई के  बहुत से चाहने वाले भारत स्वाभिमान से हट कर अपने अपने स्तर पर राजीव दीक्षित  का प्रचार करने मे लगे हैं| फिलहाल की मानें तो बाबा रामदेव को जेड प्लस सिक्योरिटी मिल चुकी है और राजसत्ता सत्ता की नजदीकियों से बहुत से बिगड़े काम भी बन पड़े हैं| सुना जा रहा है कि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बाबा रामदेव के प्रकल्पों में निवेश का भी करार किया है| राजीव दीक्षित के समर्थकों ने बाबा रामदेव से अलग होकर अलग राह पकड़ी है और फिलहाल उनके विरोधी तेवर जरुर बाबा रामदेव के लिए चिंता का सबब बने हैं|सवालों और संदेहों के घेरे में बाबा रामदेव  खड़े तो हैं लेकिन देखना होगा कि सरकारी प्रश्रय से संदेह का लाभ कितने दिन मिल पाता है| 

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Comments
  1. इस रेहेस्य का पर्दा जल्द उठेगा

  2. और जल्द उन गद्दारों के चेहरे सामने आएंगे

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