Archive for the ‘Children and Child Rights’ Category


राकेश मिश्र

भारत देश का शायद ही कोई बच्चा हो जिसने दूध के बिना दुनिया देखी हो| जब से होश संभाला है देखते ही देखते दूध के दाम पांच रुपये लीटर  से पैंतालिस रुपये लीटर हो गए| पिछले दशक में दूध के दाम जिस प्रकार बढे हैं उससे तो यही लगता है की दूध भी अब अमीरों की लक्जरी की वस्तु बनता जा रहा है|

इस मुद्दे पर जितने लोग इकट्ठे हुए हैं.. और जितने लोग गाँव की मिट्टी से जुड़े हैं उनमे से कौन इस बात से इनकार करेगा की गाँव और गाँव की जमीन का सबसे आसानी से भला हो सकता है तो गाय की परवरिश से| गाय से सीधे जुडी है गाँव की खेती और कुपोषण से|

जिसके आंकड़े कुछ इस तरह के हालात बयां करते हैं

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पिछले एक दशक में भारत की खेती योग्य 12.5 करोड़ हेक्टेयर जमीन में से 1  करोड़ 8० लाख जमीन खेती से बाहर  हो गयी|

आंकड़े बताते हैं की देश का हर चौथा आदमी भूखा है और हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है|

पिछले एक दशक में देश के किसान की माली हालत कुछ यूँ रही है की लगभग ढाई लाख किसानों ने आत्म हत्या की| काबिले गौर बात ये है की ज्यादातर किसान मदर इण्डिया वाले सुक्खी लालाओं के कर्ज और ब्याज से बुरी तरह प्रताड़ित थे |

Photo Courtesy : Reuters

गोबर की खाद से फसल और मिट्टी का स्वस्थ्य ठीक होता है | लेकिन हरित क्रांति में भारतीय सांस्कृतिक विरासत का ये तथ्य हमेशा के लिए उपेक्षित बना दिया गया| भारत  में हरित क्रांति, फोर्ड के ट्रेक्टर और भोपाल गैस वाले दाऊ केमिकल्स के कीटनाशकों से परवान चढ़ी |   किसान भले ही ज्यों के त्यों रहे हों यूरिया कंपनियों के लाभ दिन दूना रात चौगुना बढ़ते रहे| फोर्ड का ट्रेक्टर लेकर औसत दर्जे के किसानों को  कर्ज चुकाते हुए कई दशक गुजर गए |

गाय और पशुधन की बदहाली से हालत ये हुई की आज भी औसत जोत के किसानों की पैदावार खाने पीने भर को भी पूरी नहीं होती| उस पर महंगाई की मार से गाँव भी अछूते नहीं रहे| जाहिर है की उदारीकरण के बाद से  जमीन पर खेती करना सबसे चुनौती पूर्ण काम बन गया है|

एक नजर जंतर मंतर

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जंतर मंतर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का एक समूह भी था| उनका मुद्दा था गन्ने की फसल के भुगतान न हो पाने का| पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान के लिए मीलों  द्वारा तीन साल से गन्ने का  भुगतान न हो पाने की वजह से खाने तक को मोहताज हैं| उनके नेता हैं वी एन सिंह जिनके साथी हजारों किसान अन्ना के आन्दोलन में शामिल हुए| इस आशा के साथ की अन्ना हजारे और “एनजीओ ब्रिगेड” वाले इस मसले को उठाएंगे| मंच से हजारों बातें हुयीं दर्जनों भाषण और बयानबाजियां हवा में उछाली गईं| लेकिन किसानों से सीधा जुदा मसला भूमि अधिग्रहण आन्दोलन से अछूता ही रहा| इस मसाले पर प्रख्यात गाँधीवादी अन्ना हजारे, जलपुरुष राजेंद्र सिंह, जैसी नामचीन शख्सियतों के इस प्रकार से मुह फेर लेने से असली आन्दोलनकारी किसानों को गहरी निराशा हुई है|

गौरक्षा पर आन्दोलन में शामिल लोग मोदी सरकार के यू टर्न से पहले से ही निराश हैं|

कुछ इसी प्रकार की निराशा हुई है गौरक्षा के सवाल पर तीन महीने से जेल में बंद संत गोपाल दास समर्थकों को भी| संत गोपाल दास ने तिहाड़ जेल में  इक्कीस तारीख से निर्जल अनशन शुरू कर दिया है| फाफी अरसे पहले संत गोपाल दास और तमाम संतों के साथ हुए क्रूरतम सरकारी अत्याचार पर तमाम संगठनों ने आन्दोलन शुरू किया था| जन्तर मंतर पर आन्दोलन का सिलसिला फिलहाल जारी है| समर्थकों पिछले कई दिनों से  भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ आन्दोलन के लिए जुटने वालों से संत गोपाल दास की ससम्मान रिहाई और गौरक्षा मामले में समर्थन माँगा| गाय, गाँव और गंगा वाले भारत देश के इस मूलभूत मुद्दे पर एनजीओ ब्रिगेड के प्रदर्शनकारियों की अनिच्छा साबित करती है की जमीनों की सौदेबाजी और दलालों की कारस्तानी के बीच गाय और गाँव की हैसियत कुछ भी नहीं|

‘अन्ना जी की रैली में आए हैं। हमारे नेताजी लेकर आए हैं। हमें नहीं पता यह धरना-प्रदर्शन किस लिए हो रहा है।’

यह कहना है कटनी, मध्यप्रदेश से जंतर-मंतर पर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में अन्ना हजारे के दो दिवसीय धरने में शामिल होने आए किसान खदामी लाल का। उनके साथ 200 से अधिक लोग आए हैं। किसानों को जिस तरीके से बरगला के लाया गया वो इतने से ही साफ़ हो जाती है|

इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। लेकिन अधिकतर को नहीं पता कि अन्ना धरना क्यों दे रहे हैं। कई किसानों ने बात करने से साफ इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि नेताजी ने किसी भी बाहरी से बात करने से मना किया है। आपको जो पूछना है नेताजी से पूछें।

इनके नेता हैं प्रख्यात समाजवादी एक्टिविस्ट सुनीलम जिनके नाम नक्सली आन्दोलन में शामिल होने के कई मामले जुड़े हैं|

एकता परिषद के अध्यक्ष पी   वी राजगोपाल गाय और गाँव की बात न करके जल, जंगल और जमीन की बात करते हैं| विदेशी बीवी के साथ जय जगत का नारा लगाने वाले राजगोपाल के ट्रेवलर और आन्दोलन के खर्चे किस कंपनी के चंदे से चलते हैं इस बात का जिक्र करने से ही आप जन विरोधी हो जायेंगे| ठीक उसी तरह जैसे गाय गाँव और गंगा की समग्र बात करने वाले लोग विकास विरोधी ठहरा दिए जाते हैं|

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भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ एकजुट दिखने वाले इन सभी लोगों ने जंतर मंतर पर ही अलग अलग मंच बना लिए और आन्दोलन में शामिल जनता के लिए पूरे दिन ऊहापोह की स्थिति बनी रही| मंच भी बने  तीन जिसमे से अन्ना हजारे के मंच के सञ्चालन में लगे लोग दिन भर घोषणा   करते रहे की अन्ना अभी थोड़ी देर में आने वाले हैं| जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM ) की मेधा पाटेकर और राकेश रफीक अन्ना के साथ अलग मंच पर नज़र आये तो पी वी राजगोपाल और राजेंद्र सिंह अलग दिखाई दिए| पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का अलग धडा राष्ट्रीय अध्यक्ष वी एन सिंह के नेतृत्व में अलग थलग पड़ा रहा तो इस आन्दोलन में गाय के सवाल की भूमिका तलाश  रहे गोविन्दाचार्य मंच पर जगह नहीं पा सके| कुल मिला कर कुछ लोग मंच पर तो कुछ लोग मीडिया की नज़रों में जमीन तलाशते रहे|

अब बात करते हैं भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की तो भूमि अधिग्रहण के मसले पर जंतर मंतर पर जुटे लोगों ने इतने गंभीर मुद्दे पर अपरिपक्वता का

परिचय दिया है| इतनी नामचीन हस्तियों ने जिस प्रकार से एक जुट होने का प्रयत्न किया है वह निशिचित रूप से बनने से पहले ही बिखर चुकी है| जानकार लोग  इस मुद्दे की उच्छाल में  अरविन्द केजरीवाल का शामिल      आम आदमी पार्टी के राजनैतिक विस्तार के तौर पर देख रहे हैं| कहना वाजिब भी लगता है क्योंकि संसद के विधान सभा सत्र में संसद की चौखट पर हो रहे आन्दोलन से मोदी  सरकार के साथ सौदेबाजी के लिए माहौल तो बना ही दिया|

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1. When there is a CIA-organised false flag attack there is usually a drill going on at the same time.

In the attack on the Peshawar School:
One of the wounded students, Abdullah Jamal, said that he was with a group of teenagers who were getting first aid training with a team of Pakistani army medics when the violence began.

attack on army school in Pakistan

Irfan Shah told how he was sitting in his class at 10:30 when he heard the sound of firing outside.

Shah told MailOnline: ‘It was our social studies period.

“Our teacher first told us that some kind of drill was going on and that we do not need to worry.”

Read more: http://www.dailymail.

A plainclothes security officer.

2. When there is a CIA-organised false flag attack, the security services are often late in responding.

“After half an hour of the attack, the army came and sealed the school,” a teacher who escaped told a private television channel.

attack on army school in Pakistan

Blackwater.

3. In a CIA-organised false flag attack, there are the ‘patsies’ and there are ‘the real killers’.
In Peshawar, the ‘patsies’ had instructions not to kill children.
Our suicide bombers have entered the school, they have instructions not to harm the children, but to target the army personnel,” a spokesperson for the Pakistani Taliban told Reuters.
4. In a CIA-organised false flag attack, the CIA usually gets help from elements of the local police and military.
Eyewitnesses said the attackers were dressed in army uniforms.

In 2009, Israeli foreign minister Avigdor Lieberman said Pakistan was a greater threat to his country than Iran.

In Pakistan, there seems to be a Gladio-style operation which aims to promote the interests of certain gangsters.

On 16 December 2014, it was reported that mysterious gunmen had killed 132 children at a ‘heavily guarded’ military-run high school in Peshawar (above) in Pakistan.

Killing spree at Pakistan school, 132 students dead.

Attack on church in Peshawar, Pakistan, Sept. 22, 2013

This attack on the school looks like a false-flag inside job carried out by the security services.

Several children said that the gunmen communicated with each other in a foreign language.
Witnesses said that some of the gunmen were wearing Pakistani military uniforms.

Killing spree at Pakistan school, 132 students dead.


The 2004 attack on a school in Russia’s Beslan, which killed more than 330 people, was blamed on the CIA.

The Pakistani military is said to use Islamist militants to carry out attacks in places such as Kashmir and Afghanistan.

Killing spree at Pakistan school, 132 students dead.


David Headley, drug dealer and ‘CIA asset’.
Peshawar is an area where the drugs and weapons mafias are active, and it is an area known well by ‘CIA asset’ David Headley.
Reportedly, the so called Islamic terrorism is Pakistan is all about gang warfare.
According to Rakesh S. , at gather.com,
1. In the North West Frontier Province of Pakistan we find

(A) The ordinary people who often have no land, no jobs and little to eat. They are often treated like slaves.

(B) the rich elite who are made up of such people as army generals who run businesses, large landowners, warlords who sell drugs and guns, and certain mullahs with links to crime.

2. The ordinary people are often forced to work for the local warlords.

These ordinary people appear to be Islamic Terrorists but are, in fact, unwilling mercenaries for the warlords.

These unwilling mercenaries get slaughtered in the wars between the warlords and wars against the Pakistan government.

Bin laden worked for the Jewish Russian Mafia and the CIA, reportedly.
Rakesh.S writes that according to a Peshawar politician:

‘The Great Jihad of the 1980s was a myth…
‘People like Osama Bin Laden and Gulbuddin Hekmateyar were basically running mercenary operations and protection rackets with money from the Gulf and from Saudi Arabia, with arms provided by the CIA and MI6, and with the protection of Pakistan’s notorious Inter Service Intelligence (ISI) agency.’

Reagan’s friends.
The Taliban is being blamed for the attack on the Peshawar school.

Pakistan President Asif Ali Zardari has said that the CIA and Pakistan’s ISI together created the Taliban.

“The ISI and CIA created them together,” Zardari told the NBC news channel in an interview.

(informationliberation – CIA and ISI together created Taliban, says …)

Baitullah Mehsud

“For years the US mysteriously refused to kill former Pakistan Taliban chief Baitullah Mehsud via remote drone despite being offered his precise location by Pakistani intelligence authorities.”

It is believed that the Taliban is run by elements of the security services of the USA, UK, Israel, India and Pakistan.

Apparently the Pakistan Taliban are armed with US weapons.

(aangirfan: PAKISTAN TALIBAN ARMED WITH WEAPONS FROM USA, GERMANY …)

Dawood Ibrahim, Pakistani gangster and ‘CIA asset’.
Apparently the US owns a lot of top Pakistanis.

US Security Firm Bribes Pakistani Officials, Top Interior Ministry Officer Arrested

US officials have said that the CIA had routinely brought ISI operatives to a secret training facility in North Carolina.

(‘No smoking gun linking command to militants’ )

Some of the ‘bombers’ in Pakistan “have acknowledged that they have been trained by Israeli and Indian intelligences agencies in the camps located in Afghanistan.”

On 5 November 2009, The Nation (Pakistan) referred to Journalists as spies in FATA (part of Pakistan bordering Afghanistan)?.

Matthew Rosenberg, South Asian correspondent of the Wall Street Journal, has been spotted travelling frequently between Washington, Islamabad, Peshawar and New Delhi during the last couple of months….

According to an official of a law enforcement agency, who requested anonymity, Matthew was working as chief operative of the CIA and Blackwater in Peshawar. The law enforcement agencies, he said, had also traced Matthew’s links with Israel’s intelligence agency Mossad as well.

According to the BBC, “on Christmas Day 2007, the Afghan government said it was expelling two high level diplomats, one a British UN political affairs expert, the other, an Irishman and the acting head of the European Union mission.”

(BBC NEWS ‘Great Game’ or just misunderstanding?)

According to the Independent: “Britain planned to build a Taliban training camp for 2,000 fighters in southern Afghanistan.”

(Revealed: British plan to build training camp for Taliban fighters …)

A post at this site Cached tells us of the British government link to the terror in Pakistan.

In 2007 Pakistani Intelligence traced the source of much of terror in Pakistan to a ‘terrorist’ camp in Helmand province in Afghanistan.

The camp was run by Michael Semple and Mervyn Patterson.

Both of these British spooks were ostensibly working with humanitarian organizations.

Following extraordinary intelligence work by ISI, Karzai of Afghanistan and high officials in the Musharraf government exchanged visits which eventually resulted in the arrest and expulsion of Patterson and Semple from Afghanistan.

The real story was that these training camps were to create the Pakistan Taliban or Tehreek-e Taliban-e Pakistan (TMP); but why?

If the Taliban were to take over some areas in Pakistan and a part of the capital, then this would provide a sufficient basis for the US to bomb Pakistani nuclear installations and cease their nuclear weapons.

There were serious war plans and military exercises conducted by US forces for this scenario.

British India (www.zum.de/whkmla/histatlas)

On 19 October 2009, it was treported that the Pakistan Taliban (TTP) leaders were being evacuated by mysterious airlifts

“Mysterious airlifting of some Taliban elements from areas of the Pakistan-Afghanistan border linking Waziristan have been reported by several sources and fears are growing that anti-Pakistan TTP terrorists are also being rescued by their “foreign allies” from across the border.

“The unexplained movements of “un-marked” helicopters and aircraft have been reported since the last few days along the Pak-Afghan border and one source claimed that they were being transported to the Eastern Afghanistan.

“Some experts believe that secret allies of the friendly-Talibans took the action in order to secure the militants from an assault in South Waziristan by Pakistani Armed Forces while others believe the secret evacuation was part of a larger deal between some Western States and “good Taliban.”

“The airlifting and evacuation of TTP leaders from South Waziristan coincided with a report by foreign news media or a similar mysterious evacuation of “militants” from South Afghanistan to North Afghanistan.

“An Iranian news site on October 18 reported that the “British Army has been relocating Taliban insurgents from southern Afghanistan to the north by providing transportation means.”

“Quoting diplomats who spoke on condition of anonymity, the Iranian site claimed that insurgents are being airlifted from the southern province of Helmand to the north amid increasing violence in the northern parts of the country.

“The PressTV.com also claimed that “the aircraft used for the transfer have been identified as British Chinook helicopters.”

“The report suggested that the secret operation was being launched under the supervision of Afghan Interior Minister Mohammad Hanif Atmar, who “was still operating under the British guidance.”

“Afghanistan’s Pajhwok news agency reported that ‘US ambassador scotched speculation that his country was helping terrorists in the north, saying America had nothing to do with the air-dropping of armed men from helicopters in Samangan, Baghlan and Kunduz provinces.’

“At an October 11 news conference in Kabul, President Hamid Karzai had himself claimed that “some unidentified helicopters dropped armed men in the northern provinces at night.”

“According to a Pajhowk news report President Karzai revealed “the government had been receiving evidence of the air-dropping of gunmen from mysterious helicopters in the provinces over the last five months.”

“A comprehensive investigation is underway to determine which country the helicopters belong to; why armed men are being infiltrated into the region; and whether increasing insecurity in the north is linked to it.”

Mehsud, used by the CIA to get US troops into Pakistan?

Baithullah Mehsud, a ‘deceased’ tribal leader in Pakistan, may have links to the CIA.

Source: http://aanirfan.blogspot.in/

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Marriage is tough on both men and women, and living with another person for years in the same house while facing the challenges of raising children, financing your life, working and dealing with health problems is never easy.

So if you want a rock solid marriage, one that will go the long haul – Read these words of advice carefully, and write them on your heart!

89 Tips for a Divorce-Proof Marriage:

1. Do it by surprise from time to time, leave love notes around the house.

2.Work as a team.

3. Say i love you to one another everyday.

4. Give a hug or kiss everyday

5. Do not withold sex unless its a mutual consent or special circumstances!

6. At least one date night once a week, and go over and beyond to make it special

7. Become each others best friend

8. Let no one get involved with your marital affairs includes parents, in laws and friends!

9. Exercise and work out together

10. Put your children first, then your marriage, then your extended family, then everything else in thats order.

11. Become transparent with one another.

12. Set boundaries for your marriage. It’s important that you both know what you can and cannot do.

13. Lay aside your pride and ego – the winner of the argument is usually the loser!

14. Make his or her favorite meal.

15. Do things your spouse loves without you basing it on their performance.

16. Don’t go tit for tat. Learn to let go.

17. Don’t let the sun go down while you angry – another words try to resolve the issue asap

18. Fellowship, and get around other happily married couples

19. Plan and surprise your spouse with a romantic vacations as your budget allows

20. Live a healthy lifestyle

21. Look into his or her eyes, touch their face and give thanks for him or her who puts up with you during the good and bad times

22. Don’t lie to each other. A hard truth is always better then an easy lie

23. Ask your mate if their are any needs going unmet.

24. Spend some type of quality time with your spouse

25. Invest in your marriage – do a marriage retreat at least 2x a year

26. Read Quran together and discuss God’s plan for marriage.

27. Renew your vows – remember your promise to your spouse at the alter – for better or worse in sickness and in health.

28. Be ready to make many sacrifices – things you may not feel like doing – but do them anyway

29. Be ready to make many compromises.

30. Listen to your spouse’s guidance.

31. Ask your mate for areas where they can improve in.

32. Hear one another out.

33. Try to resolve problems and issues when your both calm.

34. Instead of trying to be right look for the solution that brings peace.

35. Do not use sarcasm.

36. Tell your spouse you can’t live without them.

37. If you know you did wrong, be ready to make things right.

38. Be ready to apologize and be ready to forgive when the situation arises.

39. Fight for your marriage!

40. Don’t focus on your spouse weakness but focus on their strengths.

41. Keep good company around you and your ,you want people who can encourage and uplift you!

42. Husbands help out around the house – remember that your wife is a helpmate but that doesnt mean she does everything.

43. Wives encourage your husband give them praise, it strengthens them.

44. Find out your strengths and weaknesses and be ready to help one another with where you are weak.

45. Support one anothers goals and dreams.

46. Always consult one another when making big decisions

47. Give many compliments to one another

48. Understand the grass is not greener , you just have to water your lawn more

49. Don’t compare your marriage with someone else’s – you dont know whats goign on behind closed doors

50. Watch what you take into your spirit. Today’s reality shows, our society’s view, and what you see on tv are not good examples for marriage.

51. Never embarass your spouse in public – deal with your issues in private

52. Wives spend time encouraging him and supporting him and their is nothing you won’t happily get.

53. Do not verbally abuse your spouse.

54. Do not physically abuse your spouse.

55. Do not bring up your past arguments, and disagreements.

56. Never bring up or use something in an argument, your spouse told you in confidence about him or her.

57. Let your spouse know you can be trusted.

58. Don’t give your spouse any reason to feel insecure.

59. Read books on becoming a better husband.

60. Read books on becoming a better wife.

61. Learn your spouses love language.

62. Always be in a learning process with getting to know your spouses likes and dislikes.

63. Husbands make love to her mind during the day and the rest will follow

64. Try not to let your children see you in disagreement or arguing.

65. Husbands surprise her with roses and the like, not just for birthdays, holidays and anniversary, but just because

66. Wives, your husbans love surprises also, put on one of his favorite nighties just because.

67. Don’t always try to get your way, but try to find a way that works for both of you

68. Alone time – yes its needed, but don’t go overboard. Let your mate know your thinking of them

69. Its healthy to have your time with friends, so long as they respect your marriage

70. Never cheat.

71. Never try to justify a wrong.

72. Stay fit and stay looking your best for your husband or wife.

73. Hear your spouse out before jumping to conclusions.

74. Don’t keep your spouse in the dark about things.

75. Never bad mouth your spouse to anyone.

76. Keep your love life between the two of you.

77. Your objective should be to make your spouse a better person as a result of being with you not by control but by love.

78. Open your spouse up to new things that are healthy for him or her.

79. Be open to new things, allow your spouse the chance to treat you like a king or queen

80. Communicate – he or she cannot read your mind.

81. Say what you mean, mean what you say.

82. Take your time to cool off, but when you start acting like room-mates your marriage is in trouble

83. Love, respect, loyalty and faithfulness should all be a given.

84. Have a vision and purpose for your marriage

85. Keep in mind your spouse is not your enemy but your best friend

86. Don’t look at marriage as an obligation but look at it as chance to love your mate unconditionally.

87. Our character should reflect the fruits of the spirit, love, patience, kindness, long suffering

88. Your objective should not be to change your spouse, but for your spouse to see your change

89. You cant change your spouse, but you can change how you love them and how you react to them


एक डॉक्टर को जैसे ही एक अर्जेन्ट
सर्जरी के बारे में फोन
करके बताया गया.

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वो जितना जल्दी वहाँ आ सकते थे आ गए.
वो तुरंत ही कपडे बदल कर ऑपरेशन थिएटर
की और बढे. डॉक्टर
को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए
जिसका इलाज होना था.
पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे, और
चिल्लाने लगे..

“आखिर इतनी देर तक कहाँ थे आप?
क्या आपको पता नहीं है
की मेरे बच्चे की जिंदगी खतरे में
है.क्याआपकी कोई
जिम्मेदारी नहीं बनती.. आपकाकोई
कर्तव्य है या नहीं? ”
डॉक्टर ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ
कहा-
“मुझे माफ़ कीजिये, मैं हॉस्पिटल में
नहीं था. मुझे जैसे ही पता लगा,
जितनी जल्दी हो सका मैंआ गया.. अब आप
शांत हो जाइए, गुस्से
से कुछ नहींहोगा”
ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया.
भला अपनेबेटे की इस
नाजुक हालत में वो शांत कैसे रह सकते थे…
उन्होंने कहा-
“ऐसे समय में दूसरों को संयम
रखनेका कहना बहुत आसान है.
आपको क्या पता की मेरे मन में बहुत आसान
है.
आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल
रहा है.. अगर
आपका बेटा इस तरह मर
रहा होता तो क्या आप इतनी देर करते..
यदि आपका बेटामर जाए अभी, तो आप
शांत रहेगे? कहिये..”
डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा-
“किसी की मौत और जिंदगी ईश्वर के हाथ
में है. हम केवल उसे
बचाने का प्रयास कर सकते है.. आप ईश्वर
से प्राथना कीजिये..
और मैं अन्दर जाकर ऑपरेशन करता हूँ…”
ये कहकर डॉक्टर अंदर चले गए.. करीब 3
घंटो तक ऑपरेशन
चला.. लड़के के पिता भी धीरज के साथ
बाहर बैठे रहे..
ऑपरेशन के बाद जैसे ही डाक्टर बाहर
निकले.. वे मुस्कुराते हुए,
सीधे पिता के पास गए.. और उन्हें कहा-
“ईश्वर का बहुत ही आशीर्वाद है.
आपका बेटा अब ठीक है.. अब
आपको जो भी सवाल पूछना हो पीछे आ
रही नर्स से पूछ
लीजियेगा..
ये कहकर वो जल्दी में चले गए..
उनके बेटे की जान बच गयी इसके लिए
वो बहुत खुशतो हुए.. पर
जैसे ही नर्स उनके पास आई.. वे बोले..
“ये कैसे डॉक्टर है.. इन्हें किस बात
का गुरुर है.. इनके पास हमारे
लिए जरा भी समय नहीं है..”
तब नर्स ने उन्हें बताया.. कि ये
वही डॉक्टर है जिसके बेटे के
साथ आपके बेटे का एक्सीडेण्ट
हो गया था….. उस दुर्घटना में
इनके बेटे की मृत्यु गयी.. और हमने जब उन्हें
फोन किया गया..
तो वे उसके क्रियाकर्म कर रहे थे… और
सब कुछ जानते हुए
भी वो यहाँ आए और आपके बेटे का इलाज
किया….



वीरों और जवानों का देश, बागी बलिया उत्तरप्रदेश” के फेसबुक से

 


Dehradun :Uttarakhand could be the first Himalayan state in the country to have gold mines.An Indian subsidiary of a Canadian-based company Peeble Creek Resources Ltd will soon start drilling in the highly fragile and ecologically sensitive Askot village of Pitthoragarh district of the Kumaon region for minerals including gold.

The company had been given a prospecting license by the state government for the project site for the exploration and testing of mines.
Already the company has been given land for exploration. In 2006, the company had demanded 386 hectares on lease basis, comprising 275 hectares of government land and 110 hectares of agricultural land.

Canada’s Pebble Creek mining company has announced from its headquarters in Vancouver that it was all set to commence drilling operations at its Askot project.

Situated in Pitthoragarh district, Askot may contain deposits of gold, silver, copper, zinc and lead.

The Vancouver-based company said it would undertake drilling operations up to the depth of 7,000m to ascertain the quantity of the minerals in the Askot belt.

Company officials said drilling would start after its equipment from its base in Rajasthan got shifted to Uttarakhand this week.

Pebble Creek vice-president William A Sheppard will be in India to oversee the drilling operations at the Uttarakhand site.

The Canadian company, which has been operating in India for the past 15 years, said the Askot project was “the most advanced of the non-ferrous exploration and development projects in India operated by foreign junior exploration companies”.

Pebble Creek is one of the 10 major mining companies from Canada that have been active in India for many years.

On the other hand, environmental groups have raised their concern at the mining and processing of gold ore in the highly fragile and ecologically sensitive Himalayan region.

There was opposition by environmental groups at the public hearing held in November 2006 by the Uttarakhand Pollution Control Board.

“Askot deposit” is located at Askot village in the Himalayan foothills and was assessed by Paul Bosewell of Resource Engineering and Development Ltd, Wales, UK.

According to preliminary metallurgical survey, he estimated 1.707 million tonnes of ore containing 2.43 per cent copper, 3.68 per cent lead and 5.65 per cent zinc, with an assumption of 150 gram per tonne of silver and 0.5 grams per tonne of gold in the deposit – a world-class high-grade deposit.

Lawyers Initiative for Forests and Environment (LIFE), a Delhi-based environment group, has raised objections on the project.
Ritwick Dutta, a Supreme Court lawyer said the project would prove disastrous for the ecology of the area. The group alleged that the ore would be processed with cyanide and other chemicals and the remains would again be deposited in the hills.

“This highly chemical ore will find its way through rainwater in the rivers and water bodies creating havoc. The blasting of the mountains will lead to air, noise and water pollution threatening Askot village that is situated above the mining area,” Dutta said.

SMA Kazmi

Tribune News Service


आज देश चौराहे पर आ खड़ा हुआ है। हमारी आजादी ,हमारी संप्रभूता सूली पर टंगी दिख रही है। अंग्रेजों की गुलामी से ज्यादा दर्दनाक है यह बाजारवाद की गुलामी। दुनिया के सबसे युवा देश इस प्रकार की दिशाहीनता का शिकार हो तो दुर्भाग्य ही है
देश में चीखते सवालों का अम्बार लगा है। देश की एकता-अखंडता खंडित हो रही है। देशभक्ति का मतलब पाकिस्तान और साम्राज्यवादी शक्तियों को गाली देना भर रह गया है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा किसी राष्ट्र की शक्ति होते हैं। किसी भी राष्ट्र की शक्ति का आंकलन वहां की युवा शक्ति से किया जा सकता है। लेकिन प्रश्न ये है कि आखिर युवा की परिभाषा क्या है? युवा कोई कायिक अभिव्यक्ति नहीं है, युवा किसी उम्रवय का नाम नहीं है, युवा एक गुणवाचक संज्ञा है। युवा वही है जिसके अन्दर युयुत्सा है, जिजीविषा है सवालों के जवाब तलाशने की। जिसके अन्दर जोश है देश के चीखते सवालों से लड़ने का। हहराती नदी के जैसा कैशोर्य ही नहीं होगा, तब फिर वह युवा कैसा? उद्दंडता ही नहीं, तब फिर यौवन कैसा? युवा का तो अर्थ ही उस हिलोर मारती नदी के जैसा है जो पहाड़ों की छाती को चीरकर आगे बढ़ जाती है। ईंट के घेरे में बंधकर बहने वाली नाली से किसी पहाड़ का सीना चीरने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? 
स्वामी विवेकानंद ने ऐसे थके हुए और लाचार युवाओं को ‘वयस्क बालक’ कहकर संबोधित किया था। यदि युवा का अर्थ सिर्फ उम्र से ही है तब फिर चालीस करोड़ युवाओं का देश भारत आज तक भी वैश्विक परिदृश्य में अपनी छाप छोड़ने में क्यों नहीं सफल हो सका है?
कारण स्पष्ट है, यहाँ का युवा निस्तेज हो गया है।
यद्यपि युवाओं ने कई बार अपनी शक्ति का परिचय दिया है। आजादी के समय जब विवेकानंद आदर्श थे, तब भगत सिंह, राजगुरु जैसे युवाओं ने इतिहास लिखा। जब सुभाष और चन्द्रशेखर ‘आजाद’ आदर्श थे, तब युवाओं ने 1974 की क्रांति लिखी थी। अब आदर्श बदल रहे हैं, अब राहुल और वरुण आदर्श हैं। आज चारों ओर युवा नेतृत्व की बात है। लेकिन युवा का अर्थ मात्र सोनिया का पुत्र होना ही तो नहीं होता, या कि सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अखिलेश यादव और जयंत का अर्थ युवा नहीं है।
युवा का अर्थ सलमान खान और आमिर खान भी नहीं होता। इन बिम्बों के पीछे दौड़ रही यह लाचार जमात युवा कहलाने के लायक नहीं रह गयी है।
कॉलेजों के आगे सीटी बजाने वाली इस पीढ़ी से क्रांति की उम्मीद नहीं की जा सकती है। सिगरेट के धुंए के बहाने अपनी जिम्मेदारियों से पलायन करने वाली युवाओं की इस भीड़ से फिर कोई 1942 और 1974 नहीं दुहराया जा सकेगा। रियलिटी शो में अपनी पहचान खोजते इन युवाओं से असल जिन्दगी के सवालों से जूझने की उम्मीद करना बेमानी है।
स्वामी जी ने कहा था, ‘‘सभी मरेंगे- साधु या असाधु, धनी या दरिद्र- सभी मरेंगे। चिर काल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ। भारत में घोर कपट समा गया है। चाहिए चरित्र, चाहिए इस तरह की दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके।’’
इस शांत और लाचार युवा से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। स्वामी जी ने युवाओं को ललकारते हुए कहा था, ‘‘तुमने बहुत बहादुरी की है। शाबाश! हिचकने वाले पीछे रह जायेंगे और तुम कूद कर सबके आगे पहुँच जाओगे। जो अपना उद्धार करने में लगे हुए हैं, वे न तो अपना उद्धार ही कर सकेंगे और न दूसरों का। ऐसा शोर – गुल मचाओ की उसकी आवाज दुनिया के कोने कोने में फैल जाय। कुछ लोग ऐसे हैं, जो कि दूसरों की त्रुटियों को देखने के लिए तैयार बैठे हैं, किन्तु कार्य करने के समय उनका पता नहीं चलता है। जुट जाओ, अपनी शक्ति के अनुसार आगे बढ़ो। तूफान मचा दो तूफान!’’
रोटी और डिग्री के पीछे भागते युवाओं को पुकारते हुए स्वामी जी ने कहा था,‘‘मेरी दृढ धारणा है कि तुममें अन्धविश्वास नहीं है। तुममें वह शक्ति विद्यमान है, जो संसार को हिला सकती है, धीरे – धीरे और अन्य लोग भी आयेंगे। ‘साहसी’ शब्द और उससे अधिक ‘साहसी’ कर्मों की हमें आवश्यकता है। उठो! उठो! संसार दुःख से जल रहा है। क्या तुम सो सकते हो? हम बार-बार पुकारें, जब तक सोते हुए देवता न जाग उठें, जब तक अन्तर्यामी देव उस पुकार का उत्तर न दें। जीवन में और क्या है? इससे महान कर्म क्या है?
और तुम लोग क्या कर रहे हो?!! जीवन भर केवल बेकार बातें किया करते हो, व्यर्थ बकवाद करने वालों, तुम लोग क्या हो? जाकर लज्जा से मुँह छिपा लो। सठियाई बुध्दिवालों, तुम्हारी तो देश से बाहर निकलते ही जाति चली जायगी! अपनी खोपडी में वर्षों के अन्धविश्वास का निरन्तर वृध्दिगत कूड़ा-कर्कट भरे बैठे, सैकडों वर्षों से केवल आहार की छुआछूत के विवाद में ही अपनी सारी शक्ति नष्ट करनेवाले, युगों के सामाजिक अत्याचार से अपनी सारी मानवता का गला घोटने वाले, भला बताओ तो सही, तुम कौन हो? और तुम इस समय कर ही क्या रहे हो?! किताबें हाथ में लिए तुम केवल समुद्र के किनारे फिर रहे हो। तीस रुपये की मुंशी-गिरी के लिए अथवा बहुत हुआ, तो एक वकील बनने के लिए जी-जान से तड़प रहे हो — यही तो भारतवर्ष के नवयुवकों की सबसे बडी महत्वाकांक्षा है। तिस पर इन विद्यार्थियों के भी झुण्ड के झुण्ड बच्चे पैदा हो जाते हैं, जो भूख से तड़पते हुए उन्हें घेरकर ‘रोटी दो, रोटी दो’ चिल्लाते रहते हैं। क्या समुद्र में इतना पानी भी न रहा कि तुम उसमें विश्वविद्यालय के डिप्लोमा, गाउन और पुस्तकों के समेत डूब मरो ? आओ, मनुष्य बनो! उन पाखण्डी पुरोहितों को, जो सदैव उन्नत्ति के मार्ग में बाधक होते हैं, ठोकरें मारकर निकाल दो, क्योंकि उनका सुधार कभी न होगा, उनके हृदय कभी विशाल न होंगे। उनकी उत्पत्ति तो सैकड़ों वर्षों के अन्धविश्वासों और अत्याचारों के फलस्वरूप हुई है। पहले पुरोहिती पाखंड को जड़-मूल से निकाल फेंको। आओ, मनुष्य बनो। कूपमंडूकता छोड़ो और बाहर दृष्टि डालो। देखो, अन्य देश किस तरह आगे बढ़ रहे हैं। क्या तुम्हें मनुष्य से प्रेम है? यदि ‘हाँ’ तो आओ, हम लोग उच्चता और उन्नति के मार्ग में प्रयत्नशील हों। पीछे मुडकर मत देखो; अत्यन्त निकट और प्रिय सम्बन्धी रोते हों, तो रोने दो, पीछे देखो ही मत। केवल आगे बढते जाओ। भारतमाता कम से कम एक हजार युवकों का बलिदान चाहती है — मस्तिष्क – वाले युवकों का, पशुओं का नहीं।’’
आज देश के समक्ष असंख्य चीखते सवाल हैं। बेरोजगारी, भुखमरी, लाचारी, बेगारी, महंगाई।।। और भी ना जाने क्या-क्या? है कोई विकल्प किसी के पास? आज युवा, नरेन्द्र नाथ दत्त तो हैं, लेकिन ना उस नरेन्द्र में विवेकानंद बनने की युयुत्सा है और ना ही किसी परमहंस में आज देश-हित को निज-हित से ऊपर मानकर किसी नरेन्द्र को विवेकानंद बनने की दीक्षा देने का साहस ही शेष है।
लेकिन फिर भी उम्मीद है, ‘‘कोई नरेन्द्र फिर से विवेकानंद बनेगा।’’


तुलसीदास जी ने निम्नलिखित  दोहों को अलग-अलग सन्दर्भों में  रामचरित मानस में लिखा था
अनुज-वधू, भगिनी, सुत-नारी, सुन सठ ये कन्या सम चारी।
इन्हें कुदृष्टि बिलोके जोई, ताहि बधे कछु पाप न होई।
और
ढोल गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी।
तो हुआ यूँ कि दोनों चौपाइयों का सन्देश सन्दर्भों से अलग करके देखने वाले बुद्धिजीवियों ने पहले वाले को तो दरकिनार कर दिया और दूसरी वाली  चौपाई  के स्वयंम्भु विवेचन को भारतीय संस्कृति का सर्वकालिक सत्य साबित करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। वही दृष्टान्त इन दोनों घटनाओं के एकल  विमीय विवेचन में नज़र आता है। एक घटना के सभी नज़रियों का सम्मान किया जाना लोकतंत्र की भी पहली शर्त है जिसकी प्राथमिक इकाई परिवार नाम की संस्था है।
मेरी धृष्टता क्षमा करें। यदि परिवार और समाज आज की युवा पीढ़ी को बेहतर जीवन दर्शन देने में असमर्थ है तो उसका मूल यही है कि युवा पीढ़ी की समझ  और उसके जीवन के नवीन आयामों की तलाश में  सुधारवादियों को विश्वास नहीं है। भारतीय समाज के परम्परावादियों और प्रगतिवादियों को अलग-अलग देखा जाए तो इसी अविश्वास की पराकाष्ठा पारिवारिक हिंसा और फैशन के नाम पर बढती नग्नता तक चली जाती है।  यही  अविश्वास परिवार की मूल परम्परा में विखंडन और सामाजिक सरोकारों से युवाओं की उदासीनता तक पहुँच चुका है। देश काल और परिस्थितियों के अनुसार जब व्यक्ति को दोस्त यार रिश्तेदार या व्यवस्था से सहयोग नहीं मिलता तो निराश होकर अपनी उम्मीदें अपनी अगली पीढ़ी में देखता है उसका पालन पोषण पूरी लगन से करता है और उसमे संस्कार और संभावनाओं के बीज डालता है यहीं से शुरू होती है उस पीढ़ी के सामाजिक सरकारों और जीवन दर्शन के प्रति प्रारम्भिक जागरूकता और जिज्ञासा। इसी तथ्य के अनुरूप सांस्कृतिक और आर्थिक आक्रमणों के दौर में  सदियों से  ब्राह्मण के बेटे ब्राह्मण होकर शिक्षक बनते रहे और क्षत्रियों ने सीमाओं की सुरक्षा में जीवन देना सहर्ष स्वीकार किया  शूद्रों ने सामाजिक सेवा के दायित्वों से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया  और वैश्यों ने समाज के पालन पोषण की चुनौतियों को स्वीकार किया और उसी तन्मयता से करते रहे।   इन्ही सरोकारों के विकास में अपने मान, मर्यादा और मानक तय किये।
सारे समाज ने उनके कार्यों और योगदान के अनुरूप सम्मान दिया। किसी लिखित संविधान के न होते हुए भी भावनात्मक जुड़ाव के स्तर पर ऐसी समग्रता का उदहारण इस देश की संस्कृति में मौजूद है। सांस्कृतिक समष्टि में संवादहीनता और संवेदना की कमी अविश्वास पैदा करती है और पारस्परिक अविश्वास के बिना मनुष्य का सामाजिक जीवन तो दूर सामूहिक जुड़ाव तक संभव नहीं। जिसका नतीजा जातिवाद, भाई भतीजावाद और यहाँ तक कि चारित्रिक भ्रष्टाचार तक होता है। इस संवादहीनता की कमी को मीडिया या दूसरे सामाजिक उपकरणों से भरने की बजाय पारस्परिक संवाद पर जोर देने को नज़रअंदाज़ करते जाने का नतीजा इस देश की वर्तमान समस्याओं के मूल में स्पष्ट नज़र आता है।
वापस परिवार पर आते हैं तो नज़र आता है कि वर्तमान दौर के डाक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक जैसे वेतनभोगी या व्यापारी तो अपनी अगली पीढ़ी को उसी के अनुरूप बनाने में रूचि रखते हैं। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि दार्शनिक और तत्ववेत्ता अपने सामाजिक सरोकारों में अपने बच्चों को शामिल करने से भी भय खाते हैं।  बच्चे भी जीवन मूल्यों के प्रति जब अपने अभिभावकों को अनासक्त देखते हैं तभी उनका परम्परा और उस पर बनी व्यवस्था में अविश्वास उत्पन्न होता है। राष्ट्र और वैश्विक सन्दर्भों में पल रहे अपने सपनों से विलग रखते हुए संवादहीनता को औपचारिक शिक्षा से पाटने की उम्मीद रखना कितना उचित है? यह आर्थिक आक्रमण के आगे समर्पण सरीखी घटना है। अब इस घडी में संवादहीनता और समन्वय की कमी को तर्कों या तथ्यों के सहारे प्रतिपादित कर रहे तर्कवीर समाजवादी कब तक अनदेखी करते रहेंगे इसका तो पता नहीं लेकिन समकालीन चुनौतियों और राष्ट्रीय एकता के विखंडन के इस मूल तत्व की उपेक्षा या मसखरी करके स्वान्तः सुखाय की मनोवृत्ति से समाज सुधार के संकल्प लिए लोगों के लिए स्वसमीक्षा की जरुरत को इनकार नहीं किया जा सकता।

Here, is the story of our very own Dr Sanjukta Parashar, a young and dynamic IPS officer, who followed the footsteps of Kiran Bedi in one of the most male-dominated profession in the world.

She is the first and only Assamese lady IPS officer. Despite having secured 85th Position (All India Ranking) in the UPSC, she opted the call of the uniform by joining the Police service, when most other women cadres chose to join IAS, reported Assam’s daily The Sentinel.

Born to Dulal Chandra Barua, an engineer with the irrigation state department and her mother Meena Devi, who worked with the Assam Health Services. She passed out her Class X from Holy Child School in Guwahati and graduated at Indraprastha College for Women in New Delhi. Then she went to Jawaharlal Nehru University (JNU) for her Masters, M.phil and Ph D.

In 2008, when she got her new job posting as Assistant Commandant of Makum. Maybe it was an interesting sign of fortunate or unfortunate experience, within two hours of her joining the office, she was assigned to move to Udalguri, upon urgent intervention to prevent the situation in the area where ethnic clashes between the Bodo and illegal migrants from Bangladeshi had broken out. There she realized how one could lose everything in just a fraction of a second, simply on account of being born to a different community.

Later the same year, she got married to Puru Gupta, who is currently the Deputy Commissioner of Chirang district of Assam and they are blessed with a two-year-old son. Dr Sanjukta Parashar, now holds the post of Superintendent of Police (SP) of Jorhat District of Assam.


Coca-Cola has been at the center of controversy ever since the fizzy drink first graced the shelves. Myths and rumors are abound about the ingredients used to make Coke. While some of this is either unproven, or blown out of proportion, many of these stories are quite true, and quite disturbing. Let’s take a look at 10 of the most controversial ingredients/contaminants found in Coca-Cola and analyze what scientific studies reveal. This is not so much to scare you into pouring all of your Coke down the toilet, but more to encourage you to inform yourself about what you are drinking.

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According to research carried out by the French National Institute for Consumer Affairs, more than half of well-known colas contain tiny traces of booze. Don’t worry though; you would have to drink something like 13,000 cans of the stuff to even come close to being legally drunk. Scientists tested 19 different brands and discovered levels of alcohol as low as 10 mg/liter. As expected, the French study sparked quite a controversy, and divided the Muslim community into pro- and anti-Coca-Cola campaigners. While some Muslims believe that it is irrelevant if the product contains 0.001% alcohol or 100% – it is haram either way – others find it acceptable, since small traces of alcohol can be found in a lot of things, including many fruit-based products.

9. CITRIC ACID

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Manufacturers commonly use citric acid as a preservative and flavor enhancer. However, contrary to what you might expect, 99% of the citric acid added to drinks and foods does not come from citrus fruits. Extracting citric acid from lemons, limes, oranges, and grapefruits is far too expensive for the corporations. And so we get the artificial stuff that  you consume every time you sip your Coke. However, any concerns that the citric acid in Coke is bad for you is both erroneous and the result of an undeserved bad reputation. Basically, a study in the British Dental Journal claimed to find a strong link between carbonated beverages and tooth erosion. Consuming at least four glasses of carbonated soft drinks a day was associated with a 252% higher risk of tooth problems in 12-year-olds, and a 513% higher risk in 14-year-old children. This is almost certainly not taking other factors into account, as Coca Cola has a pH of 2.525 (Diet Coke has 3.289,) and while battery acid (an actual corrosive) has a pH very close to 1. In short, citric acid is a very weak acid, and comparing it to something truly destructive has nothing to do with reality. And now we get into more harmful territory …

8. PHOSPHORIC ACID

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Phosphoric acid – also known as orthophosphoric acid – is used as an acidifying agent to add tartness to cola. This, combined with the  huge amounts of high fructose corn syrup mixed in, both mask and balance the acidity of carbonated drinks. A study was published in the American Journal of Clinical Nutrition, which provides reasonable evidence to support the association between consumption of cola and lower bone density. Some studies claim that phosphoric acid lowers the levels of calcium. Moreover, a team of scientists from the US National Institutes of Health has found that drinking two or more colas a day doubles the risk of kidney stones. Now, Coca-Cola contains various acids but as we discussed earlier, none are potent enough to dissolve a nail, tooth or penny in four days.

7. MERCURY

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The Institute for Agriculture and Trade Policy has discovered that 9 of 20 tested samples of commercial high-fructose corn syrup were contaminated with mercury. The Institute also found that 55 kid-friendly foods and soft drinks contained total mercury, which is any combination of inorganic, organic or metallic mercury. As you can see, there are plenty of products with higher mercury levels than Coke, but the level is still fairly high:

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If you are asking yourself how the heck mercury would have gotten into high-fructose corn syrup, here’s a possible answer: mercury-grade caustic soda and hydrochloric acid are primarily used to separate corn starch from the corn kernel, and to adjust the pH level of the process. The contamination seems to occur when mercury-grade caustic soda and outdated mercury cell technology are used in the production of HFCS. The good news is that mercury-contaminated HFCS is a completely avoidable problem, since mercury-free versions of the two reagents are available.

6. SODIUM BENZOATE

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Manufacturers commonly use sodium benzoate as a preservative, and you can find it in carbonated drinks, pickles, soy sauce, dressings, jams and fruit juices, cosmetics, medicines, and so on. The International Programme on Chemical Safety, and other regulatory bodies, found no adverse effects in humans at doses of 650 to 830 mg. per day. The effects of higher amounts are unknown, but almost certainly bad, judging by the increased obesity rates all over the world. Sodium benzoate does not occur naturally in foods and drinks. Manufacturers try to confuse consumers by masking these preservatives with labels that say antimicrobial nutrients. If processed foods are not part of your daily diet, there are no risks, but let’s be honest, it is. We all know what an integral part of the modern lifestyle processed, convenient foods are. Coca-Cola is in the process of phasing out the controversial additive in the UK, due to consumer pressure, but fruit-juice based products will still contain it.

Courtesy : http://myscienceacademy.org/2013/08/15/10-controversial-ingredients-found-in-coca-cola/


भारत सरकार का दावा है कि 2004 से अब तक देश में गरीबी एक तिहाई कम हुई है और इसका श्रेय सरकारी योजनाओं को दिया है लेकिन क्या सचमुच ये आंकड़े भरोसा करने लायक हैं.

भारतीय योजना आयोग ने जो आंकड़े दिए हैं उनके मुताबिक वित्तीय वर्ष 2004-05 से 2011-12 के दौरान 13.8 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल गए. इन आंकड़ों के मुताबिक भारत की 1.2 अरब की आबादी में अब 26.9 करोड़ लोग ही गरीबी रेखा के नीचे हैं. 2004 से देश चला रहे भारत के सत्ताधारी गठबंधन यूपीए का दावा है कि पिछले कुछ सालों में तेज आर्थिक विकास हुआ है और सरकार ने लोगों की भलाई के लिए जो कार्यक्रम चलाए उससे भारत में गरीबों की संख्या बहुत तेजी से घटी है. यूपीए के प्रवक्ता भक्त चरण दास ने हाल ही में कहा था, “देश भर में गरीबी के स्तर में आई कमी से यूपीए सरकार की गरीबों और समग्र विकास के लिए बनाई नीति साफ तौर पुष्ट हो गई है.”

सरकार ने जिन आंकड़ों को अपने दावे का आधार बनाया है उस पर नीति बनाने वालों और अर्थशास्त्रियों के बीच मतभेद है. सबसे बड़ा मसला गरीबी रेखा का ही है. योजना आयोग शहरी क्षेत्र में 33 और ग्रामीण क्षेत्र में 27 रुपये रोज से कम कमाने वालों को गरीब मानता है. गरीबी रेखा तय करने के इस तरीके को ना सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता बल्कि ग्रामीण विकास मंत्रालय भी गलत मानता है. आलोचकों का कहना है कि एक दिन में 33 रुपये पर सिर्फ जिंदा रहा जा सकता है और गरीबी रेखा को कम से कम इस लायक होना चाहिए कि उससे एक “स्वीकार्य” जीवनशैली हासिल की जा सके.

राजनीतिक कदम

हैदराबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स के चेयरमैन वीके श्रीनिवासन का कहना है कि आंकड़ों को इस तरह से पेश किया गया इससे सरकार की छवि अच्छी बन सके. अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए सरकार के लिए इसकी जरूरत समझी भी जा सकती है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि योजना आयोग चार से पांच सालों के अंतर पर आंकड़े जारी करता है. जल्दबाजी में 2011-12 का आंकड़ा जारी करना यह संदेह पैदा करता है कि आयोग, “यूपीए सरकार की उपलब्धियों के दावे मजबूत करना” चाहता था क्योंकि सरकार 2014 के चुनावों की तैयारी कर रही है. श्रीनिवासन ने डीडब्ल्यू से कहा, “जानकारों ने कितनी दक्षता के साथ गरीबी की रेखा तैयार की इसकी बजाय इस वक्त ऐसे आंकड़ों का राजनीतिक लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल करने के पीछे उद्देश्य पर सवाल पूछना चाहिए.”

33 रुपये दिन की कमाई गरीबी रेखा से ऊपर

लाखों कुपोषित

सुपरपावर बनने की इच्छा रखने वाले देश में करोड़ों लोगों के पास पेट भर खाना, साफ पानी और शौचालय तक नहीं है. दुनिया में भूखे लोगों वाले 79 देशों की सूची में भारत 75वें नंबर पर है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के मुताबिक 2012 में भारत में 21.7 करोड़ लोग कुपोषित थे. सिर्फ इतना ही नहीं पांच साल से कम उम्र के करीब आधे बच्चे कुपोषित हैं और यह सिलसिला कई साल से चला आ रहा है. हालांकि इसके बाद भी कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि भारत में सरकारी योजनाओं के दम पर गरीबी कुछ कम हुई है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अरविंद पनगड़िया का कहना है, “सबसे पहले तो विकास ने नौकरी के बेहतर मौके और बढ़िया वेतन पैदा किया है और इस तरह से गरीबों को फायदेमंद रोजगार मिला है.” दूसरी ओर समाजशास्त्री कह रहे हैं कि वेतन बढ़ने से सरकार का राजस्व भी बढ़ा है और सामाजिक योजनाओं के लिए अब उसके पास ज्यादा पैसा है.

सामाजिक योजनाओं में कमियां

सरकार ने खाद्य सुरक्षा बिल तैयार किया है. अभी अध्यादेश के रूप में पास हुए इस बिल पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लगनी बाकी है. इस कानून के जरिए सरकार भारत की करीब 67 फीसदी आबादी को कम पैसे में खाना देने की तैयारी में है. योजना आयोग के मुताबिक देश में 22 फीसदी लोग ही गरीब हैं लेकिन सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की 75 फीसदी और शहरों की 50 फीसदी आबादी को सब्सिडी वाला अनाज देगी. हालांकि इसमें भी प्राथमिकता वाले परिवार तय किए जाएंगे. इन्हें तय मात्रा में 3 रुपये किलो चावल, 2 रूपये किलो गेहूं और 1 रुपये किलो बाजरा दिया जाएगा. इसे दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य योजना कहा जा रहा है. हालांकि पनगड़िया का कहना है कि इस तरह की योजनाएं दुधारी तलवार की तरह हैं. यह परिवारों का भोजन पर खर्च तो घटाएंगी ही योजना को लागू करने में भारी गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार भी होगा. पनगड़िया ने कहा, “यह गरीबी मिटाने का आदर्श तरीका नहीं है.”

उपलब्धियों का दावा करती यूपीए सरकार

नए तरीकों की जरूरत

कई अर्थशास्त्री इस बात पर जोर दे रहे हैं कि गरीबी की गणना और उससे लड़ने के लिए नए तरीके इस्तेमाल करने की जरूरत है. श्रीनिवासन ने संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास सूचकांक की तरह बहुआयामी गरीबी सूचकांक बनाने का सुझाव दिया है. इसमें जीवनशैली, स्वास्थ्य और शिक्षा के आधार पर कमी की तीव्रता पर नजर रखी जाए. दूसरे शब्दों में कहें तो मानव विकास को सिर्फ आमदनी और खर्च के हिसाब से नापने की बजाय जीवन प्रत्याशा और शिक्षा की गुणवत्ता जैसी चीजों से भी नापना होगा. पनगड़िया का कहना है कि वो इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि गरीबी से लड़ने के लिए संरचनात्मक सुधार करने होंगे.
इन आंकड़ों के बीच नेता भी अजीब बयान देने से बाज नहीं आते. राजबब्बर मुंबई में 12 रुपये में पेट भर खाना खिलाने का दावा करते हैं तो राहुल गांधी गरीबी को मानसिक अवस्था बताते हैं.

रिपोर्टः श्रीनिवास मजूमदारु/एनआर

संपादनः आभा मोंढे

Courtesy: http://www.dw.de