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राकेश मिश्र

वेब मीडिया के प्राथमिक अन्वेषण में सूत्रों से जानकारी मिली है कि  भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागडे के की तलाशी के सन्दर्भ में यू ट्यूब पर जारी किया गया विडियो फ़र्ज़ी है. “अरूप भट्टाचार्य” नाम के यू ट्यूब एकाउंट से जारी किये गए इस विडियो की खबरें मुख्य धारा का भारतीय मीडिया धड़ल्ले से चला रहा है. ब्राजील के किसी छद्म एकाउन्ट “अरूप भट्टाचार्य” के विडियो लिंक

में 23 दिसम्बर 2013 को जारी किये गए इस विडियो में न्यूज़ एक्स और सी एन एन के प्रसारण अंशों के साथ साथ एनबीसी चैनल की एक वेबसाइट (http://www.wkyc.com/) द्वारा 12 फरवरी 2008 को जारी किये गये विडियो से काट के बनाया गया है.

यह भी गौरतलब है कि इस विडियो पर अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से भी फ़र्ज़ी होने के बयान की ही पुष्टि हुई है. निश्चित तौर पर केविटी सर्च और स्ट्रिप सर्च कोई मामूली बात नहीं है. जिस प्रकार से बेहद अशोभनीय स्थितियों से भारतीय राजनयिक को गुजरना पड़ा है वह भले ही अमेरिकी लिहाज से सामान्य कार्यवाही प्रक्रिया हो लेकिन भारतीय सम्प्रभुता के लिहाज से बेहद निंदनीय है. इस आपत्तिजनक विडियो के अंशों के वास्तविक मामले में भी स्ट्रिप सर्च की वजह से अमेरिकी सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी.

भारतीय सम्प्रभुता को चुनौती

भले ही सलमान खुर्शीद कहें कि अमेरिकी सहयोग से मामला सुलझा लिया गया है लेकिन जिस प्रकार से इंटरनेट और विभिन्न माध्यमों में यह विडियो वायरस के तौर पर फैला है उसमे भारतीय विदेश नीति और खास तौर से विदेशी राजनयिकों की बेहद फ़ज़ीहत हो रही है. जाहिर है कि ऐसे में अमेरिका से आशा की जाती है कि उनके अपने स्वदेशी सूचना तंत्रों से भारतीय सन्दर्भों में इस प्रकार की अवास्तविक और अमानवीय भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाए। यद्यपि यह अमेरिकी अधिकारियों के लिए बाएं हाथ के खेल जैसा ही है फिर भी इस प्रकार की वाहियात घटनाओं पर कोई ठोस कार्यवाही न करके उस पर कोरी बयानबाजियां करना कहीं न कहीं भारत की सम्प्रभु जनता, भारतीय राजनयिकों और प्रवासियों के मनोबल को कमजोर करने के तौर पर लिया जाना चाहिए। भूराजनैतिक सन्दर्भों में ऐसी घटनाओं के सन्दर्भ में  भारतीय विदेश विभाग की उपेक्षा के चलते जनमानस में बेहद असंतोष व्याप्त है.

Source : http://hellocampus.org